नोएडा प्राधिकरण या प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी.
भ्रष्टाचार के अनेकों मामलों में सरकार की छवि ख़राब करने का काम कर चुकी नोएडा अथॉरिटी पर अब भी कोई असर होता नहीं दिख रहा है। पिछले दिनों भ्रष्टाचार के बड़े बड़े खुलासे होने पर भी नोएडा अथॉरिटी ने अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना शायद अभी ज़रूरी नहीं समझा है तभी तो एक पुलिस फ़ोर्स के डी.एस.पी जिसको की प्रतिनियुक्ति पर नोएडा अथॉरिटी की सुरक्षा व्यवस्था हेतु सरकार से माँगा गया था, उसे बिना उसके मूल विभाग व् मंत्रालय को सूचित किये व् अनुमति लिए बिना ही नोएडा ऑथरिटी का भण्डार क्रय अधिकारी (एस पी ओ ) बना डाला। जिसके द्धारा करोड़ों रुपयों की सरकारी धनराशि के कार्यों को किया जा रहा है, जिसके लिए किसी टेक्निकल अफसर की योग्यता अनिवार्य है परन्तु पुलिस विभाग के एक नॉन टेक्निकल अधिकारी से नोएडा अथॉरिटी पिछले काफी समय से उक्त कार्य को करवा रही है जबकि नोएडा अथॉरिटी में इस कार्य को करने की योग्यता रखने वाले कई टेक्निकल ऑफिसर्स उसके पास ही मौजूद हैं। अतः यह बात समझ से परे है की अपने पास मौजूद बेहतरीन टेक्निकल ऑफिसर्स को भण्डार क्रय अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण व् ज़िम्मेदारी पूर्ण कार्य को न देते हुए, पुलिस विभाग से अथॉरिटी की सुरक्षा व्यवस्था हेतु बुलाये गए नॉन टेक्निकल अधिकारी को क्यों इस पोस्ट पर बैठा दिया गया।
क्यूँ एक Police Force के DSP को नोएडा अथॉरिटी ने बिना “पुलिस मुख्यालय” (Police Headquarters) की अनुमति लिए अथॉरिटी का sale-purchase ऑफिसरबना दिया ???
क्या नोएडा अथॉरिटी में Sale-Purchase का कार्य करना Police Force के “DSP” का काम है ???
”नोएडा प्राधिकरण” में क्या फिर होने जा रहा है एक और ”बड़ा घोटाला” ???
नोएडा अथॉरिटी पिछले दिनों भ्रष्टाचार के कई बड़े बड़े मामलों में पूरे देश में चर्चा का विषय बनी रही। तत्पश्चात इसके आला अधिकारियों व् यहाँ तक की उत्तर प्रदेशके मा. मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने भी प्रदेश की जनता को यह आश्वासन दिया की नोएडा अथॉरिटी में व्याप्त भ्रष्टाचार को पूरी तरह ख़तम कर दिया जाएगा तथाइसके लिए दोषी अफसरों पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी । विभिन्न सूत्रों से जानकारी प्राप्त हुई की उक्त DSP महोदय वर्तमान सरकार के एक बहुत ”बड़े व प्रभावशाली नेता जी” का आशिर्वाद प्राप्त हैं, इसलिए नेता जी के इशारे पर ही इनका ट्रान्सफर नोएडा अथॉरिटी में कराकर, इन्हें यह मलाईदार पोस्टिंग दी गयी है।हमने सूत्रों से प्राप्त जानकारी की सच्चाई जानने की मंशा से इस सम्बन्ध में 30.10.2014 को एक RTI दाखिल कर दी। जिसका नोएडा प्राधिकरण कोई संतोष जनकजवाब कई माह बीतने पर भी नहीं दे सका। अतः हमने इसकी प्रथम अपील दायर कर दी, जिसकी 30.1.2015 तय की गयी परन्तु जब हम उक्त दिन सुनवाई परनोएडा प्राधिकरण पहुंचे तो मामले की सुनवाई कर रहे अपील अधिकारी के स्टाफ ने बोला की आज आपकी सुनवाई टाल दी गयी है। सुनवाई हेतु कोई दूसरी तारीखआपको पत्र भेज कर बता देंगे। जबकि RTI एक्ट के अनुसार यदि यह सुनवाई टाल दी गयी थी तो RTI आवेदक को पूर्व में सूचित किया जाना चाहिए था। परन्तु यहाँपुनः नोएडा अथॉरिटी ने एक सरकारी विभाग की तरह कार्य करना ज़रूरी नहीं समझते हुए एक प्राइवेट कंपनी की तरह ही काम करना उचित समझा।
क्या ऐसे मिटेगा “भ्रष्टाचार” ???
देश की मीडिया से जनहित में अपील है की नोएडा अथॉरिटी व् प्रदेश की मुख्यमंत्री जी से जनता की और से उक्त प्रकरण में जवाब मांगे और पूछे की क्यों नोएडाअथॉरिटी पब्लिक के पैसों को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह उपयोग कर रही है। क्यों नोएडा अथॉरिटी सब नियम, कायदे, कानूनो को ताक पर रखते हुए अपने मनमुताबिक़ नयी नयी पोस्ट बनाकर, सरकारी धन का दुरूपयोग धड़ल्ले से कर रही है।

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