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दिल्ली में बढ रहे कोरोना को लेकर फूटा समाजसेवियों का घुस्सा | टेन न्यूज लाइव पर “सेव और सिटी” शो

ABHISHEK SHARMA

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दिल्ली में कोरोना के केस लगातार बढ़ने से सरकार की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली सरकार बाजार बंद करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि कोरोना रोकने के लिए छोटे स्तर पर लॉकडाउन भी लगाया जा सकता है। वहीं, दिल्ली में अब शादी में 200 की जगह 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे। दिल्ली सरकार ने इसको लेकर केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। दो दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में कोरोना के हालात की समीक्षा की थी।

कोरोना को लेकर टेन न्यूज लगातार लाइव कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को इसके प्रति जागरूक एवं सचेत कर रहे हैं विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए दर्शकों को कोरोना के बचाव उपाय के बारे में बताया जाता है इसी क्रम में ते न्यूज़ पर लाइव कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें चुनाव और त्योहारों के बाद कोरोना के प्रभाव को लेकर बातचीत की गई इसमें विभिन्न क्षेत्रों से संबंध रखने वाले लोग शामिल हुए जिन्होंने कोरोना को मात दी है इस दौरान उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और कोरोना के दौरान उन्होंने किस प्रकार की परेशानियों का सामना किया यह भी दर्शकों के सामने बताएं

लाइव कार्यक्रम में पैनलिस्ट की भूमिका में जाने-माने लोग उपस्थित रहे। इनमें नवजीवन विहार की आरडब्लयूए सचिव डॉ रूबी मखीजा, नेहा पुरी, कोनरवा के संस्थापक महासचिव चेतन शर्मा, शिक्षाविद रुचिका राय मदन, ईस्ट दिल्ली आरडब्लूए जॉइंट फ्रंट, बी.एस वोहरा, अनिल सूद, अध्यक्ष, एसपी चेतना एवं पर्यावरणविद

वहीं, इस कार्यक्रम का संचालन बेहद शानदार तरीके से राजीव काकरिया द्वारा किया गया। उन्होंने दर्शकों के मन में उठने वाले सवालों को पैनलिस्ट से पूछा और लोगों के सवालों के जवाब दिए गए।

बी.एस वोहरा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि दिल्ली में फिलहाल रिकवरी रेट 90% चल रहा है। लेकिन जब कोरोना शुरू हुआ था, तब सरकार ने कहा था कि कुल संक्रमित लोगों में 85% लोग खुद ब खुद ठीक हो जाएंगे। तो हम इसे सरकार की उपलब्धि नहीं मानेंगे। सरकार ने केवल 5% काम किया है। उन्होंने कहा कि हमने कोरोना को लेकर सरकार को कई बार पत्र लिखे हैं। लेकिन उनको सिर्फ फॉरवर्ड कर दिया जाता है, बाकी उनका कोई काम नहीं है।

उन्होंने कहा कि मैंने आज भी सरकार को मैसेज भेजा कि सरकार के पास दिल्ली में कुल 166 वेंटीलेटर और 246 आईसीयू के बेड बचे हुए हैं और उन्हें बताया कि अभी दिल्ली में इन सब चीजों की जरूरत पड़ने वाली है। इस मैसेज के बदले जवाब आया कि आपका मैसेज सत्येंद्र जैन को फॉरवर्ड कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अमित शाह ने कहा था कि स्थिति नियंत्रित हो जाएगी। यहां पर टेस्ट बढ़ाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या रैपिड एंटीजन और आरटीपीसीआर टेस्ट की हो रही है। आजकल डॉक्टर ज्यादातर लोगों के रैपिड एंटीजन टेस्ट कर रहे हैं। उसमें वर्तमान की स्थिति का पता चलेगा। जबकि आरटीपीसीआर टेस्ट अधिक होने चाहिए, उनकी संख्या घट रही है। जब से आरटीपीसीआर टेस्ट की संख्या बढ़ाई गई है, तो संक्रमित मरीजों की भी संख्या बढ़ गई है। सरकार को लोगों के जीने मरने से भी फर्क नहीं पड़ रहा है। सरकार को बस रेवेन्यू और जीएसटी से मतलब है।

उन्होंने कहा कि 26 अक्टूबर से 14 नवंबर तक दिल्ली में 13 लोग कोरोना से मर गए। उनको बचाने के लिए सरकार द्वारा कोई कोशिश नहीं की गई। सरकार ने ना बाजार बंद कराए, ना बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया गया और लोग बिना मास्क के बाजारों में घूमते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में कोरोना और विकराल रूप धारण कर लेगा, जिसको रोकना सरकार की पहुंच से बाहर होगा।

डॉ रूबी मखीजा ने कहा कि सरकारों ने कोरोना काल में किस तरह का काम किया है, यह हम सब ने देखा है। पहले सरकार इकॅनाॅमी गिरने का नाटक करती रही। जबकि इस महामारी को लेकर हम पहले से सचेत थे और देश में कोरोना फैलने से पहले तैयारियां काफी हद तक हो गई थी। हमारे पास पर्याप्त स्वास्थ्य उपकरण और दवाइयां थी। लॉकडाउन में काफी अच्छे से सख्ती की गई श, लेकिन इसको जब अनलॉक किया गया तो सरकार बड़ी जल्दी में दिखी।

उन्होने कहा कि अनलाॅक में एकदम बाजार खोल दिए, मॉल और दुकानें खोल दी। सरकार उन्हें अनलॉक के लिए पूरी तरह से तैयारी नहीं की थी। अनलॉक होते ही बाजारों में भीड़ पहले की तरह दिख रही थी। सबको पता है कि अर्थव्यवस्था भी बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन लोगों का जीवन भी महत्वपूर्ण है। सरकार को पता है कि अनलॉक करते समय उनसे क्या गलतियां हुई हैं।

उन्होंने कहा कि आरटी पीसीआर और रैपिड एंटीजन टेस्ट में भी काफी गलतियां हुई हैं। आरटी पीसीआर के जब टेस्ट किए जाते हैं कोरोना का संक्रमण आरटी पीसीआर टेस्ट में 78 से 80% रहता है। जबकि रैपिड एंटीजन में 50% संक्रमण का पता चलता है। रैपिड एंटीजन में हम कोरोना वायरस को सही से पकड़ नहीं पा रहे हैं। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी लोगों को कोरोना के लक्षण आ रहे हैं, जो कि बेहद खतरनाक है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब सरकार फिर से लॉकडाउन लगाने के बारे में सोच रही है। सरकार को अब सोचना नहीं चाहिए। जल्द से जल्द लॉकडाउन लगा दिया जाए या कम से कम नाइट कर्फ्यू ही लगा दें, ताकि लोगों को यह मन में रहे कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है। उससे सावधान रहने की जरूरत है। इससे रात की मूवमेंट पर भी पाबंदी लगेगी और काफी हद तक कोरोना की चेन टूटने में मदद मिल सकेगी।

रुचिका रॉय मदन ने कहा कि यह हम सभी को पता है कि सरकार हर कदम पर नाकाम साबित हो रही है। स्कूलों के खोलने की बात चल रही है। बच्चे स्कूल में अभी सरवाइव नहीं कर पाएंगे, लेकिन हम बच्चों को ऐसे ही अगली कक्षा में प्रमोट भी नहीं कर सकते हैं। इससे उसका आधा कोर्स छूट जाएगा और जो नॉलेज बच्चे को होनी चाहिए वह नहीं मिल पाएगी।

 

उन्होंने कहा कि अभी स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लास बच्चों को दी जा रही है। जब स्कूल जाते थे तो पीटीएम में अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चे की कमजोरियों के बारे में चर्चा करते थे। कोई भी बच्चा जब सामने रहेगा तो उसकी एक्टिविटी पर अधिक नजर रह सकेगी। अब त्योहारों में अभिभावक भी बच्चों की ऑनलाइन क्लास को सीरियस नहीं ले रहे हैं।

नेहा पुरी ने अपने वक्तव्य में बताया कि उनके एक रिश्तेदार अभी दिवाली से 4 दिन पहले कोरोना से संक्रमित मिले हैं। उन्होंने पहला टेस्ट एंटीजन कराया तो वह नेगेटिव आया लेकिन वह कमजोर महसूस कर रहे थे और कोरोना के लक्षण भी दिख रहे थे। तो उन्होंने आरटी पीसीआर टेस्ट कराया और घर में क्वॉरंटीन कर दिया और जब आरटी पीसीआर का रिजल्ट आया तो उसमें वह पॉजिटिव पाए गए। वह हृदय रोगी हैं, उनके काफी गंभीर ऑपरेशन हुए थे।

अब उनके जो बाकी बॉडी टेस्ट कराए हैं तो उनमें किडनी में समस्या है। इसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि इनको अस्पताल में भर्ती कराना होगा। डॉक्टरों ने मैक्स के लिए बोला, जब वहां की फीडबैक ली गई तो, लोगों का कहना है कि अस्पताल में हो कर भी ऐसे लग रहा है जैसे पटरी पर पड़े हैं। ना उनकी कोई देखभाल हो रही है और ना ही अच्छे से उपचार किया जा रहा है।

प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के नाम पर लूट मची हुई है। मैक्स अस्पताल में बेड की कमी हो गई है। जिसके चलते बाहर टेंट लगा दिए गए हैं और वहां कोरोना मरीजों को लिटा दिया गया है। इस तरह से कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा अधिक हो जाता है। लेकिन सरकार इन मामलों पर ध्यान नहीं दे रही है।

दिल्ली में कोरोना की स्थिति को चेतन शर्मा ने शायराना अंदाज में बयान करते हुए कहा कि दिल्ली में मरीजों की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें जहर नहीं मिल रहा है, तो वक्त पर दवाई भी नहीं मिल रही है। दिल्ली में 24 मार्च से कोरोना महामारी फैलने शुरू हुई। इसको लेकर तमाम प्रकार की बैठक की गई। कोरोना भारत में आने से पहले ही इसकी तैयारियां हो चुकी थी।

उन्होंने कहा कि अब दिल्ली में कोरोना मरीजों को ट्रेस और फॉलोअप नहीं किया जा रहा है। सरकार कोरोना को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। कोरोना समय के साथ-साथ अपना प्रारूप भी बदल रहा है। अब बताया जा रहा है कि यह हवा में भी फैल रहा है। अब समस्या को हल करने के लिए सरकार के पास एक्शन प्लान होना चाहिए था।

अब सरोजिनी, सदर बाजार और भीड़भाड़ वाले बाजार खोल दिए गए हैं। स्थिति इतनी बुरी हो चुकी है कि 1 घंटे में 4 मौत हो रही हैं। अब दिल्ली में कोरोना के नाम पर खेल हो रहा है। किसी की भी मौत हो रही है तो उसको कोरोना बता दिया जाता है। परिजनों को डेडबॉडी भी डिब्बे में पैक करके दी जाती है। अंतिम दर्शन के लिए भी एक इंसान जा पा रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की हालत बद से बदतर होती जा रही है। सरकार को इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है। अब समय आ गया है कि कोरोना को लेकर प्लानिंग की जाए और इस से लड़ने के लिए एक्शन प्लान तैयार कर धरातल पर उतारें। कोरोना को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

अनिल सूद ने बताया कि सरकार के पास अभी बेड और वेंटिलेटर की कमी है। अस्पतालों में मेडिकल सुविधा का अभाव देखा जा सकता है। दिल्ली में अभी कोरोना रेट 11% चल रहा है। अगर रोज1 लाख टेस्ट हों तो 11 हजार लोग पॉजिटिव मिलेंगे। सरकार के पास इतनी तैयारियां नहीं हैं कि लोगों को कोरोना से बचा सके।

उन्होंने कहा कि 750 बेड दिल्ली के लिए नाकाफी हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि दिल्ली में कोरोना का तीसरा पीक खत्म हो चुका है। यह समझ नहीं आ रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री किस तरह से पीक को काउंट कर रहे हैं। लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है तो वह लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं करना चाहते हैं। लोग जान बचाने के लिए होम क्वॉरेंटाइन या प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इतनी सारी सुविधाएं होने के बावजूद भी सरकार मदद मांगती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं देती है। 5 साल पहले केजरीवाल कहते थे कि दिल्ली में 5000 बेड बढ़ा देंगे तो अब कहां गया उनका वादा। सरकार ने रेल के डिब्बों में कोरोना मरीजों को रखने की व्यवस्था की थी, तो अब क्यों नहीं कर पा रहे हैं।

सरकार ने दिल्ली के बहुत सारे होटल अधिग्रहीत कर लिए थे , इसके बावजूद भी यहां बेड की कमी आ रही है। तो यह बात समझ से परे है। सरकार के सारे दावे खोखले हैं सरकार कोरोना की गाइडलाइन सही ढंग से लागू नहीं करा पाई। सरकार सिर्फ जीएसटी के पीछे लगी हुई है। उन्हें लोगों की जान से लेना देना नहीं है। सरकार ने दिल्ली की जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को ठीक करने के लिए लोगों को इकट्ठा होना पड़ेगा और सरकार को एक झटका देना पड़ेगा तभी यहां के हालात कुछ ठीक हो सकेंगे।

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