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33 अस्पतालों के 80 प्रतिशत आईसीयू बेड आरक्षित मामले में सुप्रीम कोर्ट का बयान , हाईकोर्ट जाए दिल्ली सरकार

ROHIT SHARMA

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नई दिल्ली :– दिल्ली में बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट अपील दायर की थी , जिसमे उन्होंने कहा था कि दिल्ली के 33 अस्पतालों में 80 प्रतिशत आईसीयू बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व किया जाए ।

 

 

वही इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने आप सरकार से कहा कि वह 33 निजी अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों के लिए 80 प्रतिशत आईसीयू बेड आरक्षित करने के फैसले पर लगी रोक के खिलाफ अपनी याचिका लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय जाए।

 

 

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अवकाश पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के अचानक तेजी से बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिल्ली सरकार की याचिका का संज्ञान लेते हुए कहा कि उच्च न्यायालय में इस याचिका पर 27 नवम्बर की बजाय 12 नवंबर को सुनवाई की जाए।

 

 

उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 22 सितम्बर को दिल्ली सरकार के 12 सितम्बर के आदेश पर रोक लगा दी थी। दिल्ली सरकार ने राजधानी के 33 बड़े निजी अस्पतालों में आईसीयू के 80 प्रतिशत बेड कोविड-19 के मरीजों के लिये आरक्षित रखने का आदेश दिया था।

 

आपको बता दें कि एकल पीठ ने कहा था कि निजी अस्पतालों को आईसीयू के 80 प्रतिशत बेड कोविड-19 के मरीजों के लिये आरक्षित रखने का आदेश अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। सरकार ने एकल पीठ के आदेश को उच्च न्यायालय की खंडपीठ में चुनौती दे रखी है जहां यह मामला 27 नवंबर के लिये सूचीबद्ध था।

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