केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने एमिटी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कार्यान्वयन पर अधारित राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए और भारत के परिवर्तन में उसके प्रभावी योगदान की जानकारी प्रदान करने के लिए एमिटी विश्वविद्यालय मे ‘‘भारत को बदलने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन’’ विषय में दो दिवसीय वर्चुअल राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डा रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन डा डी पी सिंह, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान , एसोसिएशन आॅफ इंडियन यूनिवर्सिटीस के अध्यक्ष डा तेज प्रताप, एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश के चांसलर डा अतुल चौहान एंव एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला द्वारा किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर विभिन्न 8 विषयों पर परिचर्चा सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें देश के प्रख्यात विश्वविद्यालयों से लभगभ 60 से अधिक कुलपतियों एंव शिक्षाविद्ो ने शिरकत की और अपने विचार व्यक्त किये। इस कार्यक्रम में 7000 से अधिक प्रतिभागीयों ने विभिन्न तकनीक के माध्यम से हिस्सा लिया।
 राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डा रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने संबोधित करते हुए कहा कि आज देश विदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रति जोश एंव उत्साह दिख रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन पर आधारित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश के शिक्षा जगत कि विभूतियां एक़ित्रत हुई है जो विभिन्न क्षेत्रों पर वैचारिक मंथन और परिचर्चा करगेें। प्राचीन समय से हमारे देश को विश्व गुरू की उपाधि मिली हुई है और यहां विश्व के प्रख्यात विश्वविद्यालय नालंदा, तक्षशिला आदि थे और हम ज्ञान, विज्ञान, जीवन दर्शन, कला, प्रौद्योगिकी सभी क्षेत्रों मे अग्रणी थे। लार्ड मैकाले द्वारा प्रदान की गई शिक्षा नीति ने हमें अपनी जड़ों से दूर कर दिया और हम भारतीय ज्ञान परंपरा से कट गये। डा पोखरियाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 राष्ट्रीय, अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी और समावेशी है इसके साथ यह गुणवत्ता, समानता एंव उपलब्धता की आधारशीला पर आधारित है। इस नीति के तहत प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होगी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अंग्रेजी का कोई विरोध नही है। आज जो भी देश जर्मनी, जापान, फ्रांस, इजराईल आदि अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे है क्या वे किसी भी मामलें में अन्य देशों से पीछे है। उन्होनें कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा से पूर्व ग्राम समाज से लेकर अभिभावकों, शिक्षकों आदि लाखों व्यक्तियों से सुझाव प्राप्त किये गये और हर सुझाव का विश्लेषण भी किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों को सांस्कृतिक गतिविधियों, खेलकूद, वोकेशनल पाठयक्रम की शिक्षा दी जायेगी और रिपोर्ट कार्ड की बजाय प्रोगे्रस कार्ड प्राप्त होगा। छात्रों को भिन्न विषयों में रूचि के अनुसार शिक्षा ग्रहण करने की सुविधा होगी। उन्होनें कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध एंव अनुसंधान को पेटेंट के साथ बढ़ावा देना होगा। भारत में स्टे इन इंडिया एंव स्टडी इन इंडिया को बढ़ावा देगें जिससें हमारी प्रतिभा जो पढ़ने के लिए विदेश जाती है वो भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों मंे शिक्षा हासिल करें। डा पोखरियाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पूरी तरह छात्र के विकास पर आधारित है। हमें टैलेंट को पेटेंट के साथ जोड़ना होगा। उन्होनें कहा विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान अपने संस्थानों में विशेषज्ञों की टास्क फोर्स बनाये जो व्यवधान को समाधान की ओर ले जायें। विश्वविद्यालयों एंव संस्थानों के अपने मध्य समन्वय बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। हम सबका साथ, सबका विकास एंव विश्वास लेकर आगे बढ़ रहे है। डा पोखरियाल ने कहा कि एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा चौहान द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर प्रारंभ किया गया है जिसमें दो दिवसीय सम्मेलन में आयोजित सत्रों सभी को महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के चेयरमैन डा डी पी सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा एंव उसके कार्यान्वयन के लिए जिस गती के साथ कार्य किया जा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय कार्य है। 34 वर्षो के उपरांत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का निर्माण अत्यंत विचार विर्मश के बाद किया गया है जो शिक्षा क्षेत्र के हर खाताधारक की अकांक्षाओं एंव अपेक्षाओं पर आधारित है। यह शिक्षा नीति छात्र केन्द्रीत है और स्वामी विवेकानंद, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, महामना मदनमोहन मालवीय और डा एपीजे अब्दुल कलाम के विचार दर्शन पर आधारित है। छात्रों में मूल्यों एंव संस्कृतियों का विकास, बहुविषयक को प्रोत्साहन आदि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के भाग है। यह नीति देश को अधिक समर्थ एंव विकसित राष्ट्र बनने में सहायक सिद्ध होगी।
एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि देश के शिक्षा मंत्री के विचारों ने हमारे अंदर नई उर्जा एंव विचारों को प्रोत्साहित किया है। शिक्षा ही किसी भी देश के विकास का मूल आधार है। शिक्षा मंत्रीजी की दूरदर्शिता से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन से देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव होगा और छात्रों के संपूर्ण विकास हेतु प्रतिबद्ध यह शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए हम कटिबद्ध है। डा चौहान ने कहा कि एमिटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देश विदेश से कुलपतियों, शिक्षाविद्ों सहित हजारों की संख्या में शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने हिस्सा लिया है।
एसोसिएशन आॅफ इंडियन यूनिवर्सिटीस के अध्यक्ष डा तेज प्रताप ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 समावेश है नये जमाने की आवश्यकताओं का और चुनौतियों का निराकरण भी है। देश में लगभग 1000 से अधिक विश्वविद्यालय एंव 40000 से अधिक शिक्षणसंस्थान है इसलिए हमें मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संर्दभ में जागरूकता एंव उसके कार्यान्वयन के लिए कार्य करना होगा। हमें केन्द्र्र सरकार एंव राज्य सरकार द्वारा प्रदान किये मार्गदर्शनों के साथ पाठयक्रमों की पुनःआकार देने, छात्रों की संख्या बढ़ाने की दिशा में कार्य करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक ऐसा दौर आया है जब विश्वविद्यालयों को मिल कर कार्य करना चाहिए।
एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश के चांसलर डा अतुल चौहान ने शिक्षा मंत्री एंव अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हम सभी के लिए आज अत्यंत गर्व का विषय है जब देश के शिक्षा मंत्रीजी सम्मेलन के माध्यम से हम सभी का मार्गदर्शन कर रहे है। वर्तमान समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन देश में सच्चे अर्थो में परिवर्तन लायेगा। यह नीति छात्र आधारित है जो तकनीकी शिक्षण पर परिवर्तीत हो रही है। पूरे देश में छात्रों को बहुविषयक शिक्षा ग्रहण करने का मौका प्राप्त होगा।
एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला ने संबोधित करते हुए कहा कि विद्या वही है जो हमें अज्ञानता से मुक्त करें। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 छात्रों को समस्या का समाधान करते हुए तार्कीक ढंग से शिक्षा ग्रहण करने में सहायक होगा। उन्होनें इस अवसर पर सम्मेलन में हिस्सा लेने आये सभी कुलपतियों, शिक्षाविद्ों, शिक्षकों आदि का स्वागत किया।
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न परिचर्चा सत्रों का आयोजन किया गया जिसके अंर्तगत प्रथम परिचर्चा सत्र ‘‘उच्चशिक्षा में समावेश के लिए उपलब्धता, समानता एंव सस्तीता में सुधार’’ पर आयोजित किया गया इस सत्र की अध्यक्षता की और नई दिल्ली के जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय के वाइस चासंलर प्रो सैयद एहतेशाम हसनेन, अमृतसर के गुरू नानक देव विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डा जसपाल सिंह सिंधु, पाॅंडिचेरी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो गुरमीत सिंह एंव टाटा इंस्टीटयूट आॅफ सोशियल सांइसेस की निदेशिका प्रो शालिनी भारत ने अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला द्वारा किया गया।
इग्नू के वाइस चांसलर प्रो नागेश्वर राव ने संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा निति 2020 के अंर्तगत सभी को समान अवसर एंव उपलब्धता प्रदान करने के लिए बहु विषयक को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होनें सरकार द्वारा संचालित किये जा रहे स्वयंम जो कि एक खुला आॅनलाइन पाठयक्रम मंच है के बारे में बताते हुए कहा कि यह एक बेहतरीन, सस्ता एंव सभी के लिए सुलभ शिक्षा प्राप्त करने का माध्यम है। जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय के वाइस चासंलर प्रो सैयद एहतेशाम हसनेन ने संबोधित करते हुए कहा कि 34 वर्षो के लंबे अंतराल बाद बनाई गई इस राष्ट्रीय शिक्षा निति से चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, प्रवेश एंव निकासी का आसान रास्ता, सच्चे अर्थो में बहुविषयक बेहतरीन है जिससे हमारे छात्र अवश्य लाभांवित होगें। अमृतसर के गुरू नानक देव विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डा जसपाल सिंह सिंधु ने कहा कि अच्छे शिक्षक एंव अच्छी शिक्षण प्रणाली एक बेहतरीन छात्र का निर्माण करने में सहायक होती है। विश्वविद्यालय का आपसी सहयोग छात्रों के विकास हेतु एक आवश्यक कदम है। पाॅंडिचेरी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो गुरमीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 हम सही दिशा में विकास करेगें। उन्होनें कहा कि यह प्रथम भारत केन्द्रीत नीति है। भाषा ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम है और छात्रा प्रारंभिक अवस्था में अपनी मातृभाषा में अधिक तेजी से विकास कर सकेगें। इस नीति में शिक्षा को सशक्त बनाने का माध्यम बनाया गया है। टाटा इंस्टीटयूट आॅफ सोशियल सांइसेस की निदेशिका प्रो शालिनी भारत ने कहा कि उपलब्धता, समानता एंव सस्तीता आज विश्व में हर उच्च शिक्षा के लिए चुनौती बनी है। उन्होने सभी छात्रों पुरूष, बालिकाओं, ट्रांस जेंडर, दिव्यांग, एसटी एससी, आदि को समान अवसर देने के लिए नीतियां बनाने एंव सुविधायें प्रदान करने पर बल दिया।
इस अवसर पर सम्मेलन के प्रथम दिन द्वितीय सत्र में सम्रग एवं बहुउददेशीय उच्च शिक्षा के माध्यम से अनुकूल शिक्षा परिवेश विषय पर, तृतीय सत्र में उत्कृष्टता के लिए व्यावसायिक और शिक्षा का पुनजागरण विषय पर और चतुर्थ सत्र में विकास और स्थिरता के लिए उच्च शिक्षा और अनुसंधान में डिजिटल परिवर्तन पर परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया।

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