आकाशवाणी कैजुअल अनाउन्सर/कम्पीयर्स के नि यमितीकरण हेतु बनेगी संयुक्त समीति*

*आकाशवाणी कैजुअल अनाउन्सर/कम्पीयर्स के नियमितीकरण हेतु बनेगी संयुक्त समीति*

भारत की पहली सरकारी इलेक्ट्रॉनिक मिडिया आकाशवाणी (ऑल इण्डिया रेडिओ) के कैजुअल अनाउन्सर /कम्पीयर की आवाज़ आखिर केंद्रीय सरकार ने सुन ली।नियमितीकरण की अपनी मांगो को लेकर जंतर मंतर दिल्ली में 5 दिसंबर 2016 से धरना प्रदर्शन कर रहे आकाशवाणी के कैजुअल कर्मियों की मांग पर कार्यवाही के उद्येश्य से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा अखिलभारतीय आकाशवाणी कैजुअल अनाउन्सर/कम्पीयर्स युनियन के शिष्ट मंडल को संयुक्त बैठक में चर्चा हेतु आमंत्रित किया गया, इस दौरान नियमितीकरण की संभावनाओं को तलाशते हुए कैजुअल अनाउंसर/कम्पीयर की वास्तविक संख्या तथा वित्तव्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई तथा आश्वासन दिया कि जल्द ही इस समस्या के सकारात्मक निराकरण हेतु एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि विगत लगभग 10 से 30 वर्षों से स्वीकृत एवं स्थायी उद्घोषक/कम्पीयर के रिक्त पडे़ पदों के सापेक्ष आकाशवाणी के पैनल में दीर्घावधि के लिए विधिवत लिखित परीक्षा,स्वर परीक्षोपरान्त चयनित कैजुअल कर्मचारी (कैजुअल उद्घोषक/कम्पीयर) रिक्त पडे़ पदों का कार्य बखूबी निभाते आ रहे हैं किन्तु कई वर्षों से आकाशवाणी के रेग्युलर कर्मचारियों की तरह तथा अन्य दो संवर्गो के नियमित किए जा चुके कैजुअल कर्मचारियों(कैजुअल प्रोडक्शन असिस्टेंट एवं कैजुअल जेनरल असिस्टेंट) के ही समान रुप से समान सेवा शर्तों पर(Similarly situated) लगातार कार्य करने के बावजूद इन्हें आज दिनांक तक रेग्युलर नहीं किया जा रहा है। जबकि माननीय CAT , माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय सहित कई संसदीय समितियों ने भी आकाशवाणी महानिदेशालय को वर्ष 1999 से अब तक कई आदेश/निर्देश जारी कर कहा है कि आकाशवाणी के सभी कैजुअल संवर्ग को नियमित करने की नीति बनाई जाए।किन्तु इन सभी आदेशों/ निर्देशों की अवहेलना करते हुए सिर्फ दो ही संवर्गों को नियमितिकरण का लाभ दिया गया है और दिया जा भी रहा है जबकि भूतकाल में (प्रसार भारती आने के वर्षों पूर्व)सभी संवर्गो के संग उद्घोषक संवर्ग के आकस्मिक कर्मचारियों का भी नियमितिकरण किया गया था किन्तु 10-30 वर्षों से वर्तमान में सेवारत वृहद् अनुभवी कैजुअल अनाउन्सर/कम्पीयर्स के नियमितिकरण के मामले में पक्षपात एवं भेदभाव( Discrimination) करते हुए आज तक नियमितिकरण का लाभ नहीं दिया गया है तथा आकाशवाणी
महानिदेशालय ने माननीय न्यायालय और संसद को भी इस बाबत तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने का तथा झूठी जानकारी देकर कई तरह से गुमराह करने का कार्य किया है।उल्लेखनीय है कि प्रसार भारती एवं आकाशवाणीमहानिदेशालय ने सरकार को कैजुअल्स की संख्या के विषय में हर बार ग़लत आकडे़ पेश करती रही है,कभी 10,000 तो कभी 20,000 और अभी 40000 तक के आँकडो़ से सरकार को गुमराह किया गया जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में वाद प्रस्तुत करते हुए कैजुअल्स की संख्या 4000 ही बताई है।
विदित हो कि भारत सरकार ने नए कैजुअल कर्मचारी भरती पर रोक लगा दी है फिर भी वृहद अनुभवी कैजुअल कर्मियों के सेवारत रहते
कई केन्द्रों पर अनावश्यक और अवैध रूप से अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को नए कैजुअल कर्मचारी के रुप में भरती किया है।इसतरह कई तरह की अनियमितताओं की विधिवत जानकारी पत्र के माध्यम से महानिदेशालय को दिया जाता रहा है।
किन्तु आज तक पूर्व की सरकारों द्वारा कई तरह की अनियमितताओं को नज़रअंदाज किया गया और नियमितिकरण के मामले में सिमिलर्ली सिचुएटेड वर्षों भूतकाल से सेवारत इन कैजुअल कर्मचारियों के संग पक्षपात एवं भेदभाव भी किया जाता रहा है।परन्तु वर्तमान सरकार के मंत्री ने की गयी चर्चा पर गंभीरता से संज्ञान लिया है।
नियमितिकरण और अनियमितताओं के संदर्भ में
संसद कक्ष में संपन्न संयुक्त बैठक में मुख्यरूप से माननीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमान् वेंकैय्या नायडू ने वित्त राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप, प्रसार भारती CEO तथा अखिलभारतीय आकाशवाणी कैजुअल अनाउन्सर/कम्पीयर्स युनियन के पदाधिकारियों की मौजूदगी में उक्त समस्याओं के समाधान के लिए कमिटि गठित कर
जल्द से जल्द नियमित करने का आश्वासन दिया l

मनोज पाठक
महासचिव एवं प्रवक्ता
अखिलभारतीय आकाशवाणी कैजुअल अनाउन्सर/कम्पीयर्स युनियन

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