ऐसे ईस्ट एमसीडी कमिश्नर के समय मे घाटे का प ेश हुआ
ऐसे ईस्ट एमसीडी कमिश्नर के समय मे घाटे का पेश हुआ जिसके अन्तर्गत राकेश गुप्ता और योगेन्द्र मान जैसे मातहत काम करते हो जहां किसी सरकार के सभी कामों मे घूसखोरी होती हो सरकार मे बैठे लोग बेइमान, भ्रष्ट, गुंडागर्दी से पब्लिक और मिडिया से दुर्व्यवहार करते हो जमीनी कार्य कुछ होता है कानून कुछ होता है उच्च अधिकारियों को सूचना उल्टी सीधी दी जाती है अधिकारी लोग अपनी अंधी कमाई के चक्कर मे आंख मून्द लेते है इनको सरकार की कमाई से ज्यादा अपने जेब मे कमाई रखना ज्यादा अच्छा लगता है ये काम तब समझ मे आया जब योगेन्द्र मान और राकेश गुप्ता (मीडिया विभाग) रिपोर्टर से निमन्त्रन्ड़ होने के बाद भी जब वे कवरेज करने पहुंचे बदतमीज़ी पर उतर आये और उनको कवरेज करने से मना कर दिया और ऐसा वे EDMC की प्रेस कोन्फ्रेन्से मे हमेशा करते है उनके उद्योग विहार, पटपड़गंज की कन्फरेन्स मे हमेशा उनके अपने ही 7-10 पत्रकार रहते है उनसे अपने मर्जी से समाचार लिखवा लेते है इससे ज्यादा कभी नही होते जबकि SDMC मे 25- 40 होते है इसी लिये वहां 75% ईमानदारी से काम होता है और ईएमसीडी की आदत के अनुसार इनके अलावा यदि कोई जाता है तो उसे रोक दिया जाता है 7-12-2016 को EDMC कमिश्नर श्री मोहनजीत सिंन्ह जी की कन्फरेन्स मे भी केवल 8-10 पत्रकार ही थे बाकी को मना कर दिया गया क्यू ! बिना उच्च अधिकारियों के ऐसा नही होता जिसमे से दो वहा खुद मौजूद है
तो दोस्तों नीयत मे खोट होगी तो घाटा तो होगा ही!
मीडिया के डायरेक्टर योगेन्द्र मान और राकेश गुप्ता अगर चपरासी की तरह रहेंगे दुर्व्यव्हार करेंगे उच्च अधिकारी से लेकर चपरासी तक घूसखोरी और भ्रष्टाचार मे लिप्त रहेंगे तो ईडीएमसी की लुटिया तो डूबे गी ही
अगर थोडी सी भी शर्म होगी तो उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक सुधार की शुरूवात तो करनी ही होगी
आज के लिये इतना ही
दिल्ली वासियों को भी इस घाटे के लिये आवाज उठानी चाहिये