बीस हजार रुपये की लोन से अब नहीं मिलती भैंसें

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स्वरोजगार योजना के तहत मिलने वाले अनुदान को नहीं ले रहे लाभार्थी, बंद करने की मांग
ग्रेटर नोएडा। सरकार द्वारा अनुसूचित जाति जन जाति विकास निगम लिमिटेड विभाग के जरिए संचालित की जा रही स्वरोजगार योजना को बंद करने की सिफारिश की गई है। योजना वही पुराने ढर्रे पर संचालित की जा रही हैप, जिसमे अनुदान की राशि वर्षों पहले जैसे दी जा रही है। जिसका लाभार्थी को फायदा नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते कोई भी योजना के तहत लाभ नहीं उठाना चाहता है। लिहाजा विभाग को लाभार्थी खोजना भारी पड़ा रहा है।
अनुसूचित जाति-जन जाति वर्ग के गरीब परिवारों को स्वरोजार दिलाने के उद्देश्य से वर्षों पहले अनुसूचित जाति जन जाति विकास निगम लिमिटेड विभाग का गठन गया था। यह विभाग आज भी जीवित है। इस विभाग द्वारा अनुसूचित जाति व जन जाति के गरीब परिवारों को कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराया जाता है। जिस पर कुछ अनुदान भी मिलता है। विभाग द्वारा लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाता है। स्वरोजगार के लिए भैंस, बकरी, मुर्गी पालन, दुकान खोलने या छोटे उद्योग स्थापित करने के लिए लोन दिया जाता है। योजना के तहत 20 साल पहले जो धनराशि दी जाती है, वही राशि आज भी दी जाती है। मसलन, भैंस खरीदने के लिए पहले भी कई साल पहले 20 हजार रुपये मिलता था, आज भी राशि लगभग उतनी ही दी जा रही है। जबकि महंगाई कई गुना बढ़ गई है और भैंसों की कीमत 50 हजार रुपये से भी अधिक हो चुका है। अगर कोई दुकान के लिए लोन लेता है, तो 20 से 25 हजार रुपये में कुछ भी नहीं कर सकता है। जिसके चलते विभाग द्वारा संचालित की जा रही योजना परवान नहीं चढ़ रही है। विभाग के प्रभारी अधिकारी कृष्णा प्रसाद ने बताया कि योजना के तहत लाभार्थी खोजना मुश्किल होता जा रहा है। विभाग को मिले लक्ष्य की पूर्ति भी नहीं हो पा रही है। विभाग लाभार्थियों को तलाश करके योजना का लाभ दिला रहा है, मगर कोई लोन लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत जिले में बजट आवंटित न करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।

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