हंगामे की भेंट चढ़ा एक बार फिर शीतकालीन सत् र , नतीजा कुछ भी नही निकला
दिल्ली प्रदेश नेशनल पैंथर्स पाटी के अध्यक्ष राजीव जौली खोसला ने शीतकालीन सत्र की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि तकरीबन 18 करोड़ रुपये रोज के संसद के शीतकालीन सत्र खर्च हो रहे थे, जो कि बिना किसी नतीजा निकले पानी में बह गये। तकरीबन 200 करोड़ से ज्यादा पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान खर्च हुए होंगे। नतीजा कुछ भी नहीं निकला, सिर्फ सांसद खामाखां में खींचतान करते रहे, जनता के हित की तो बात सामने नहीं आयी। आज 70 वर्ष आजादी के गुजर जाने के बाद भी जनता की सुनने वाला कोई नहीं। चुनाव के वक्त को सभी सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में टूटी-फूटी गलियों की धूल सूंघते फिरते हैं, मगर जीतते ही गोल भवन (यानी संसद में) पहुंचते ही सब कुछ भूल जाते हैं। कौन सी जनता और किसने उनको वोट देकर जिताया, सभी को तराजू में तोलकर तराजू में तोलते रहते हैं। भारत की जनता को आने वाले चुनावों में सोच-समझकर उम्मीदवारों का चयन करना चाहिए, जो सांसद कई बार चुने जा चुके हैं, मगर संसद में पहुंचने के बाद जनता को भूल जाते हैं, उन्हें बिल्कुल भी आगामी चुनाव में नहीं चुनना चाहिए। आज निर्भया बलात्कार की चौथी बरसी है, चौथी बरसी के दिन भी बलात्कार रुकने का नाम नहीं ले रहे। क्या कारण है? निर्भया की मां आज भी जंतर मंतर पर अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए दर’बदर की ठोकरें खा रही है, मगर मंत्री-संत्री हैं कि एक कान से सुनते हैं, दूसरे कान से निकाल देते हैं। आज नोटबंदी के 36वें दिन भी भोलीभाली मजदूर, मेहनतकश, ईमानदार जनता बैंकों की लाइन में लगी हुई है। दिल्ली की यह नजारा है तो गांव-देहातों का क्या हाल होगा, जहां आज आजादी के 70 साल गुजर जाने के बाद भी सड़कें-बिजली व पानी की सुविधा भी नहीं है और माननीय मोदी जी बात करते हैं कैशलेस भारत की, जबकि भारत में तकरीबन 60 से 70 प्रतिशत अशिक्षित जनता है व नए फोनों का उपयोग मात्र 15 से 18 प्रतिशत जनता कर रही है, जिसमें से 5 प्रतिशत जनता को ही पूरा उपयोग आता है, बाकी तो सब अनाड़ी हैं। जितेंद्र पाल – tennews. in
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