हिंदी विश्वविद्यालय ने किया चीनी विवि के स ाथ समझौता

हिंदी विश्वविद्यालय ने किया चीनी विवि के साथ समझौता
दोनों विवि के विद्यार्थी बनेंगे परस्पर मैत्री के वाहक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय और चीन के पेइजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी के साथ वर्धा में शुक्रवार को ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। वर्धा विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिकुलपति प्रो. आनंद वर्धन शर्मा और चीन के विश्विाद्यालय की ओर से पेइजिंग के फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी काउंसिल के चेयरमन प्रो. हान चन ने हस्ताक्षर किये। इससे दोनों विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के आदान-प्रदान, संगोष्ठी तथा कार्यशालाओं के आयोजन, सांस्कृ्तिक संबंधों का विस्‍तार आदि को बल मिलेगा ऐसी आशा दोनों विवि ने व्‍यक्‍त की है।
प्रतिकुलपति महोदय के कक्ष में आयोजित बैठक में चीन की ओर से इंटरनेशनल एक्सचेंज एण्ड को-आपरेशन ऑफिस की डायरेक्टर प्रो. ख चीन, पेइचिंग फॉरेन स्टाडीज यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. ली यालान (जो हिंदी विवि की छात्रा रही है), हिंदी विवि के चीनी भाषा के सहायक प्रोफेसर अनिर्बाण घोष, स्पेनिश के सहायक प्रोफेसर रवि कुमार, फ्रेंच के सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार, जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे प्रमुखता से उपस्थित थे।
बैठक में प्रतिकुलपति प्रो. आनंद वर्धन शर्मा सर ने कहा कि दोनों देशों में मित्रता को बढ़ावा देने के लिए विद्यार्थियों का आदान-प्रदान अहम विषय है। इससे साहित्य, संस्कृ्ति, भाषा, पर्यटन, विदेशी व्यापार, अनुसंधान जैसे क्षेत्र को एक नई पहचान मिल सकेगी और विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के साथ-साथ रोज़गार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
प्रो. हॉन चन ने बताया कि 1940 में स्था‍पित पेइचिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी, बीजिंग में विदेशी व्याापार, अंतरराष्ट्रीय संबंध, अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता जैसे विषयों पर अधिक बल दिया जाता है। उनके विवि में कुल 74 भाषाओं में अध्ययन होता है और इसमें भारत की आठ भाषाओं का समावेश है। इन भाषाओं में प्रमुख रूप में हिंदी, बंगला, तामिल, पालि, संस्कृत भाषाएं शामिल हैं। उन्होंने माना कि भारत एक उभरती हुए आर्थिक महासत्ता है और यहां युवाओं की अधिक संख्या होने से यह देश विश्व में युवाओं का देश कहलाता है। भारत की इस महत्ता‍ को देखकर खुशी होती है और इसलिए हमारा देश और हमारा विश्व‍विद्यालय वर्धा जैसे अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी की पढ़ाई के लिए अधिक से अधिक संख्या में विद्यार्थियों को भेज रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन और कार्यों की झलक भारत पर दिखायी पड़ती है। उन्होंने बताया कि चीन के विवि में पिछले दस वर्षों से हिंदी की पढ़ाई होती है।
इस अवसर पर प्रतिकुलपति प्रो. शर्मा जी ने चीन के प्रतिनिधि मंडल का भेंटवस्तु प्रदान कर स्वागत किया तथा चीनी प्रतिनिधि मंडल ने प्रो.शर्मा और अध्‍यापकों का स्वागत चीनी भेंटवस्तु से किया।
(फोटो : दीपक सालवे)

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