24 घंटे पानी देने की मंशा पर खाली मकान फेर रहे पानी

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शहरी क्षेत्र में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा 24 घंटे पानी देने की मंशा है, मगर यह परवान नहीं चढ़ती दिख रही है। इसके पीछे प्राधिकरण सेक्टरों में खाली पड़े मकानों को जिम्मेदार मान रहा है। कम्पलीशन के मकानों में करीब 30 फीसदी बर्बाद हो रहा है। जिससे प्राधिकरण लोगों तक भरपूर पानी नहीं पहुंचा पा रहा है। गर्मी दस्तक दे चुकी है और आने वाले गर्मी के महीनों में प्राधिकरण के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना चुनौती भरा होगा।
ग्रेटर नोएडा में अंडर ग्राउंड वाटर पीने योग्य है। प्राधिकरण को अभी पानी खरीदना नहीं पड़ रहा है और अंडर ग्राउंड वाॅटर को ही शोधित करके प्राधिकरण द्वारा घरों तक पहुंचाया जा रहा है। प्राधिकरण कागजों में 24 घंटे पानी देने की बात करता है। बीते दिनों काॅर्निवाल के दौरान भी चेयरमैन रमा रमन ने सेक्टरों में 24 घंटे पानी की सप्लाई करने का भरोसा दिया है। मगर यह मंशा पूरी नहीं हो सकती है। प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया है कि ग्रेटर नोएडा में हजारों की संख्या में मकान खाली पड़े हैं, जिन्हें कम्पलीशन दिया गया है और पानी का कनेक्शन दिया गया है। यहां पर कोई नहीं रहता है। सर्वे में पाया गया कि इन मकानों में करीब 30 फीसदी पानी बर्बाद हो रहा है। इन मकानों में पानी की टोटी टूटी हुई हैं, जिससे सप्लाई के दौरान पानी बहता रहता है। प्राधिकरण द्वारा इसे बंद भी नहीं कराया जाता है। गर्मी आने वाली है और प्राधिकरण के लिए गर्मी में पर्याप्त मात्रा में पानी की सप्लाई करना चुनौतीपूर्ण है। प्राधिकरण के ओएसडी योगेन्द्र यादव का कहना है कि कम्पलीशन के मकानों में पानी की बर्बादी हो रही है। जिसे रोकने के लिये सभी वर्क सर्किल को निर्देश दिये गये है कि जहां पर टोटी टूटी हो, उसे ठीक किया जाए।
जल निगम कर रहा सर्वे
वहीं, प्राधिकरण सेक्टरों में 24 घंटे पानी की सप्लाई करने की मंशा को अंजाम देने के लिए यूपी जल निगम की मदद ले रहा है। यूपी जल निगम को प्राधिकरण ने जिम्मेदारी सौंपी है। जल निगम द्वारा सर्वे किया जा रहा है। जिससे यह पता लगाया जाएगा कि सेक्टर में कितने पानी की आवश्यकता होगी। इसके लिए कितने यूजीआर, टंकी और अन्य जरूरतें होंगी। इसकी पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद प्राधिकरण आगे की कार्रवाई करेगा।

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