नोएडा : कोरोना मरीजों की हेल्पलाइन ही है , हेल्प्लेस | डीएम ने दिए जाँच के आदेश
Ten News Network
नोएडा :– राजधानी दिल्ली से सटे यूपी के गौतमबुद्धनगर जिले में कोरोना बेकाबू होता दिख रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कोरोना पीड़ित मरीजों को अस्पतालों में आईसीयू बेड तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मजबूरन पीड़तों को घर पर ही इलाज करना पड़ रहा है। इस कारण पूरे शहर में गम्भीर स्थिति है।
डीएम सुहास एलवाई ने अस्पतालों में बेड की स्थिति को लेकर एक सेंट्रलाइज कंट्रोल रूम बनाया है। इस कंट्रोल रूम से हर कोई सूचनाएं प्राप्त कर सकता है। अगर आप नोएडा-ग्रेटर नोएडा में रहते हैं और आपके यहां कोई कोरोना का मरीज है तो आप इस कंट्रोल रूम से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
इस कंट्रोल रूम से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अस्पतालों में बेड की स्थिति, ऑक्सीजन की उपलब्धता और रेमिडिसिविर दवा की उपलब्धता की जानकारी मिल सकेगी। डीएम सुहास एलवाई की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस कंट्रोल रूम से इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को लाभ मिलेगा। इसके लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया गया है। नंबर – 18004192211 पर कॉल कर कोई भी इस बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकता है। आपको बता दे की यह तमाम जानकारी जिला प्रशासन की तरफ से मुहैया करवाई गई |
खासबात यह है की जो जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है , उसको लेकर अच्छा रिस्पांस नहीं मिल रहा है | वही इस मामले में टेन न्यूज़ ने मरीजों के परिजनों से सम्पर्क किया , जिन्होंने इस हेल्पलाइन नंबर को मिलाया | पढ़े की आखिर क्या जवाब मिला हेल्पलाइन नंबर से:–
1 . ग्रेटर नोएडा के निवासी अंशु के ने कहा “गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने कोरोना मरीजों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया , मेरी मम्मी का नाम नीनेश है , उस पर मैने अपनी मम्मी को लेकर कॉल किया , क्योकि मेरी मम्मी कोरोना संक्रमित थी , उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी थी , जिसको लेकर मैने हेल्पलाइन नंबर पर फ़ोन किया | एक दिन में मैने 20 से ज्यादा फ़ोन किया , लेकिन फ़ोन नहीं मिला , फिर मैने कुछ देर बाद फ़ोन मिलाया , तब हेल्पलाइन वालों ने फ़ोन उठाया , मैने उनसे पहुँचा की मेरी मम्मी को कोविड है , उनकी तबियत ज्यादा ख़राब हो रही है , हमे बेड की जरूरत है , क्या बेड उपलब्ध करा सकते है , तो हेल्पलाइन वालों ने जवाब दिया की कोई बेड उपलब्ध नहीं है , आप खुद अस्पतालों में जाकर कोशिश करें” |
साथ ही उन्होंने कहा “हेल्पलाइन वालोँ ने हमे कोई रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दिया , न ही उन्होंने हमें कोई कॉल की , जो बता दे की बेड खाली हो चूका है , आप एडमिट हो जाएंगे | अंशु के ने बताया की अपनी मम्मी को किसी तरह सोर्स के माध्यम से प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया , जहाँ उनका उपचार चल रहा है , अभी उनकी तबियत में काफी ज्यादा सुधार है | अंशु के ने बताया की अगर में हेल्पलाइन पर निर्भर रहती तो में अपनी मम्मी को खो देती” |
2 . ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी गरिमा सक्सेना ने बताया ” उनके पति सौरभ सक्सेना कोरोना संक्रमित थे , उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी , मुझे किसी ने जिला प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर दिया , जो मैंने इस नंबर पर फोन किया , तो हेल्पलाइन नंबर वालों ने जवाब दिया कि कोई बेड खाली नहीं है , जैसे ही गौतमबुद्ध नगर के कोई भी अस्पताल में बेड खाली होता है, तो जानकारी दी जाएगी , आपकी शिकायत को दर्ज कर लिया है , ऐसा जवाब हेल्पलाइन वालों ने दिया | कुछ देर बाद कॉल आता है और उन्होंने कहा कि आपके पति सौरभ सक्सेना की तबीयत कैसी है , क्या उन्हें किसी चीज की दिक्कतें आ रही है , उन्होंने स्टेटस चेक किया |,
3 , नोफा संस्था की सदस्य निशा राय ने कहा “जो प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है , उस हेल्पलाइन नंबर पर अगर कोई व्यक्ति फोन करता है , तो अच्छा रिस्पांस नहीं मिलता , यह हेल्पलाइन वाले रजिस्ट्रेशन भी तक नहीं करते हैं | पहली बात यह है कि 10 से 15 बार फोन मिलाने के बाद फोन मिलता है और उसमें जवाब सिर्फ यही आता है कि बेड खाली नहीं है , डॉक्टर से बात तक नहीं कराते हैं |
“खासबात यह है कि कोई रजिस्ट्रेशन ना होने पर हेल्पलाइन नंबर वालों का कोई फोन तक वापस नहीं आता है , अगर रजिस्ट्रेशन होता तो फोन जरूर आता , जिसमें साफ स्पष्ट होता है कि उनकी तरफ से कितनी लापरवाही होती है | एक तरफ प्रशासन हेल्पलाइन नंबर जारी कर वाहवाही लूटता है , तो वही इस नंबर पर कोई रिस्पांस नहीं मिलता है , तो ऐसे हेल्पलाइन नंबर जारी करने का क्या फायदा | उन्होंने कहा हेल्पलाइन वाले कहते हैं कि आप खुद हॉस्पिटल में जाकर चेक करें कि बेड खाली है या नहीं , हम कैसे बताएं आपको , यह शब्द कहना मरीज के परिजनों को कितना बुरा लगता है कि आखिरकार जब उनके सामने उनके घर वाले की तबीयत बिगड़ती है और वहां दूसरी तरफ अच्छा रिस्पांस नहीं मिलता” |
4. नव ऊर्जा संस्था से डॉक्टर अतुल चौधरी ने कहा ” गौतमबुद्ध नगर के जिला अधिकारी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है , उसका रिस्पांस अच्छा नहीं है | मैंने खुद 10 से 20 बार फोन किया , लेकिन फोन बिजी जाता रहा , कुछ देर बाद फिर मैंने दोबारा फोन किया , तो उन्होंने फोन उठाया , मैंने उनसे पूछा कि कोई बेड खाली है , मुझे बहुत सख्त जरूरत है , तो उनका जवाब आया कि अभी फिलहाल कोई बेड खाली नहीं है | मैंने उनसे कहा कि आप मेरी डॉक्टर से बात करा दे तो , उन्होंने कोई रिस्पांस नहीं दिया और ना ही उन्होंने रजिस्ट्रेशन किया | जिससे कि वह मुझे वापस कॉल कर सकें और ना ही उन्होंने मुझे कोई रेजिस्ट्रेशन नंबर दिया , जो मैं यह नंबर बता कर अपना स्टेटस चेक कर लूं कि आखिरकार बेड खाली है या नहीं |
“साथ ही उन्होंने कहा कि बहुत से लोग आपदा में अवसर ढूंढते हैं | अतुल चौधरी ने कहा एक जिला एक हेल्पलाइन होना चाहिए , मैंने देखा है कि सीएमओ का अलग हेल्पलाइन नंबर है , सीएमएस का अलग हेल्पलाइन नंबर है , डीएम का अलग हेल्पलाइन नंबर है , जिले में सिर्फ एक हेल्पलइन होना चाहिए , जैसे कि वन डिस्टिक वन प्रोडक्ट , वैसे ही वन डिस्टिक वन हेल्पलाइन नंबर होना चाहिए , क्योंकि इतने सारे हेल्पलाइन नंबर से लोग कंफ्यूज होते हैं कि आखिर कौन से हेल्पलाइन नंबर को मिलाने से मदद मिलेगी , साथ ही उन्होंने कहा जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को जमीनी स्तर पर काम करना होगा , तब ही इन समस्याओं से निपटा जा सकेगा” |
5. ग्रेटर नोएडा वेस्ट निवासी शालिनी ने कहा की “गौतमबुद्ध नगर के जिला प्रशासन द्वारा जारी किया गया हेल्पलाइन नंबर पर काफी अच्छा रिस्पांस मिला , हमें एंबुलेंस की सुविधा मिली | साथ ही दवाइयों के लिए भी कॉल किया गया , तो हमें दवाइयां भी उपलब्ध कराई गई , सीएमओ की तरफ से फोन आया और पूछा कि आपके अंकल की तबीयत कैसी है | शालिनी ने कहा मेरे अंकल अब ठीक हैं , अब उनकी रिपोर्ट नेगेटिव है , प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था , मैं कहना चाहती हूं कि जिला प्रशासन ने बहुत अच्छा काम किया है” |
6. ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी मनोज ने कहा की जो गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है , उसका कोई अच्छा रिस्पांस नहीं है , उस हेल्पलाइन नंबर पर सिर्फ एक ही जवाब मिलता है कि बेड खाली नहीं है , डॉक्टर से बात नहीं कराते हैं , रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं देते हैं , अगर उनसे कहते हैं कि आप किसी वरिष्ठ अधिकारी का नंबर दे दीजिए , तो वह भी उपलब्ध नहीं कराते हैं | मैंने उनसे कहा कि मुझे एंबुलेंस की बहुत सख्त जरूरत है , लेकिन उन्होंने एंबुलेंस नहीं दी , मैंने फिर प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लिया और मेट्रो हॉस्पिटल सेक्टर 11 पहुंचा , जहां मेरे माताजी और पिताजी को इलाज नहीं मिला | 24 अप्रैल को मेरे माताजी और पिताजी का कोरोना वायरस से देहांत हो गया , अगर मुझे हेल्पलाइन नंबर से कुछ सुविधा मिल जाती तो आज मेरे माता-पिता जिंदा होते |
7 . नोएडा सेक्टर 78 के निवासी सचिन ने बताया कि “जो हेल्पलाइन नंबर जिला प्रशासन ने जारी किया है , उसका कोई अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है, जो उम्मीदें इस हेल्पलाइन नंबर से थी , उस पर पानी फिर गया है | जिला प्रशासन के द्वारा स्वास्थ्य सुविधाएं के बारे में लोगों को पता नहीं चल पाया , जिसके कारण बहुत से लोगों को इलाज न मिलने पर मौत हो गई , इस हेल्पलाइन नंबर पर ना तो कोई डॉक्टर बात करता है और ना ही किसी तरह का रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है, जिससे कि वह इस रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाकर अपनी बात अधिकारी से कर सके , मेरा मानना है कि इस हेल्पलाइन नंबर से कोई समस्या का हल नहीं हुआ है , लोगों को बेड तो छोड़िए , ऑक्सीजन तक नहीं मिली , इस हेल्पलाइन नंबर पर किसी भी तरह की कोई जानकारी सही तरीके से नहीं दी गई” |
8. नोएडा के समाजसेवी ब्रिगेडियर अशोक हक ने कहा “जो जिलाधिकारी द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया है , उससे कोविड-19 मरीजों को कोई फायदा नहीं मिला है , लोग बता रहे हैं कि कोई रिस्पांस नहीं है , पूरी जानकारी इस पर नहीं दी जा रही है , बेड के मामले में स्पष्ट कह देते हैं कि कोई बेड उपलब्ध नहीं है , ऑक्सीजन को लेकर साफ मना कर देते हैं , डॉक्टर से बात तक नहीं कराते हैं , साथ ही रजिस्ट्रेशन भी नहीं करते हैं” |
“जो जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने सोचा था कि पहले की तरह यह हेल्पलाइन अच्छा कारगर साबित होगा , लेकिन इसका उल्टा ही निकला | मतलब पहले के मुताबिक इस बार हेल्पलाइन नंबर कारगर साबित नहीं हो पाया , बताया जाता है इस हेल्पलाइन नंबर पर रोजाना 6000 कॉल आती है , लेकिन सिंगल डिजिट में बेड लोगों को मिल रहे है” |
9. समाजसेवी अमित गुप्ता ने बताया “हेल्पलाइन का कोई फायदा नजर नहीं आया , मैं खुद कोरोना पॉजिटिव था , मैंने खुद इस हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया और उनसे बेड के बारे में जानकारी ली , जिसको लेकर उन्होंने साफ मना कर दिया की बेड उपलब्ध नहीं है , 400 से लेकर 500 बेड की वेटिंग चल रही है , मतलब अभी मेरे से आगे 400 से 500 लोग इंतजार कर रहे हैं कि बेड उन्हें मिले | मैं लगातार कई दिनों तक हेल्पलाइन नंबर पर फोन करता रहा , लेकिन कोई सुविधाएं मुझे नहीं मिली |
10. नेफोवा संस्था के उपाध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि “जो गौतमबुद्ध नगर के डीएम सुहास एलवाई द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है , उसका रिस्पांस बिल्कुल जीरो है , कोई सुविधा है नहीं मिल रही है , हॉस्पिटल के अंदर कितने बेड खाली है उसके बारे में उन्हें खुद जानकारी नहीं है | वह कहते हैं कि हॉस्पिटल जाकर खुद पता कर लें कि बेड खाली है या नहीं , हमने उनसे कहा कि आप डॉक्टर से बात करा दें जिससे कि उनकी सलाह पर अपना इलाज घर पर ही कर ले , लेकिन उन्होंने बात तक नहीं कराई , मतलब साफ है कि अगर ऐसा रिस्पांस हेल्पलाइन नंबर पर मिलता है , तो ऐसा नंबर हमें नहीं चाहिए , क्योंकि जो लोग बीमार होते हैं , वह पहले से ही इतने स्ट्रेस होते हैं कि उन्हें समझ में नहीं आता कि वह क्या करें” |
11. फोनरवा संस्था के महासचिव केके जैन ने कहा कि “जो जिलाधिकारी द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है , उसका कोई रिस्पांस नहीं है , मैं खुद कोविड-19 था , मैंने इस नंबर पर फोन किया , तो मुझे किसी भी तरह की कोई सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई , मैं एक फोनरवा का सदस्य हूं , सब लोग मुझे जानते हैं , फिर भी मुझे स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं दी गई , तो आम जनता का क्या हाल होगा , इस हेल्पलाइन से जो उम्मीद थी उस पार पानी फिर गया”|
“इस हेल्पलाइन नंबर पर मैंने कहा कि आप डॉक्टर से बात करा दे , उन्होंने बात तक नहीं कराई और फोन काट दिया , फिर मैंने एंबुलेंस को लेकर फोन किया , तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि एंबुलेंस खाली नहीं है , मुझे ऑक्सीजन की जरूरत थी , तो मैंने इस हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया , तो उन्होंने कहा कि आप खुद ऑक्सीजन ढूंढ ले , मतलब इतना गंदा रिस्पांस मुझे इस हेल्पलाइन नंबर से मिला” |
“साथ ही उन्होंने कहा कि मेरा टेस्ट दिल्ली में हुआ था , जो दिल्ली में मेरा नाम रजिस्टर हुआ , हेल्पलाइन के द्वारा मुझे लगातार फोन आते रहे और पूछते रहे कि आप की तबीयत कैसी है , डॉक्टरों से मेरा संपर्क रहा और उन्हीं की बदौलत मैं आज ठीक हो रहा हूं | के के जैन ने कहा की दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाएं कितनी मजबूत है , यूपी में कुछ नहीं है” |
12. नोफा संस्था के अध्यक्ष राजीव सिंह ने कहा “शुरुआत में हेल्पलाइन काफी मददगार रही , इस हेल्पलाइन से बहुत लोगों को सुविधाएं मिली , लेकिन अब यह सुविधाएं नहीं मिल रही है , क्योंकि देखा गया है कि जब से गौतमबुद्ध नगर में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है , वैसे ही स्वास्थ्य सुविधाएं कम होती जा रही हैं | उन्होंने कहा की धीरे धीरे जब केस कम हो जाएंगे , तो यह हेल्पलाइन सही तरीके से काम करना शुरू कर देगी , क्योंकि इनके पास बेड भी उपलब्ध होंगे और ऑक्सीजन भी उपलब्ध होगी, जिससे लोगों का इलाज जल्दी ही हो पाएगा ” |
13. नोवरा संस्था के अध्यक्ष रंजन तोमर ने कहा “जो प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है , उस हेल्पलाइन नंबर पर अगर कोई व्यक्ति फोन करता है , तो अच्छा रिस्पांस नहीं मिलता , यह हेल्पलाइन वाले रजिस्ट्रेशन भी तक नहीं करते हैं | पहली बात यह है कि 10 से 15 बार फोन मिलाने के बाद फोन मिलता है और उसमें जवाब सिर्फ यही आता है कि बेड खाली नहीं है , डॉक्टर से बात तक नहीं कराते हैं | साथ ही उन्होंने कहा की ये हेल्पलाइन वाले कहते है की बेड खाली नहीं है अगर किसी वीवीआईपी को बेड चाहिए , तो तुरंत बेड मिल जाएगा |
बता दे की इतने मामले सामने आने के बाद खुद टेन न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार रोहित शर्मा ने गौतमबुद्ध नगर के लिए जारी किया गया कोविड हेल्पलाइन नंबर पर फ़ोन किया तो फ़ोन नहीं मिला , काफी बार फोन मिलाया , तब जाकर फ़ोन उठाया , हमारे पत्रकार ने कहा की मेरे अंकल कोविड संक्रमित है , उन्हें बेड की सख्त आवश्यकता है , इस पर जवाब मिला की बेड कोई खाली नहीं है , 20 दिन तक कोई बेड नहीं मिलेगा | अभी 1500 से 2000 मरीज बेड के लिए वेटिंग में है , उनके बाद ही आपका नंबर आएगा , साथ ही उन्होंने कहा की डॉक्टर अभी नहीं हैं , थोड़ी देर बाद फ़ोन कर लेना , रिपोर्टर ने कहा की आप मेरा नंबर रजिस्टर करके रजिस्ट्रेशन नंबर दे दीजिए , जिससे आपकी तरफ मुझे कॉल आ जाए , उनकी तरफ जवाब आया की आपके मोबाइल पर मैसेज भेज दिया है , लेकिन अभी तक मैसेज नहीं आया | मतलब साफ है की हेल्पलाइन नंबर का अच्छा रिस्पांस नहीं है |
वही इस मामले में टेन न्यूज़ ने गौतमबुद्ध नगर के जिला अधिकारी सुहास एलवाई से सम्पर्क किया , तो उन्होंने कहा की इस मामले की जाँच करवाई जाएगी , सुविधाओं को ठीक करवाया जाएगा , जो समस्या आपने बताई है उसका समाधान किया जाएगा | डीएम सुहास एलवाई ने कहा की हेल्पलाइन नंबर के जो अधिकारी है वो आपसे सम्पर्क करेंगे , लेकिन अभी तक उनका फ़ोन नहीं आया |