दवाओं पर जीएसटी ना हटाने को लेकर वित्त मंत्री का तर्क

Ten News Network

विगत कई दिनों से अनेकों राजीनीतिक पार्टियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यक्तियों द्वारा जीवनरक्षक दवाओं और कोवड के इलाज में काम आने वाले यंत्रो को जीएसटी के दायरे से बाहर करने की माँग उठ रही है।

हालांकि भारत सरकार का कहना है कि अगर ऐसे उत्पादों पर जीएसटी हटाया गया तो उनके दाम बढ़ सकतें हैं क्योंकि इससे उत्पादकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी लेने में समस्या होगी।

पर अगर नियत और नीति साफ हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। और ऐसे ही मानना है चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रवीण कुमार मौर्य का जो कुछ समय पूर्व कोरोना से जंग जीत कर लौटे हैं औऱ देशहित में सरकार को अवर सुझाव एवं सेवा देने के लिए तत्पर है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दाम महँगे होने के तर्क पर सीए प्रवीण ने कहा, “अभी की व्यवस्था में ये बात बिल्कुल सही है कि जीएसटी को अगर यूँही हटा दिया गया तो इन वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। परंतु नीति में जरा सा बदलाव करके इसे सुधारा जा सकता है। जिस प्रकार एक्सपोर्ट होने वाली वस्तुओं पर उनके निर्माता आईटीसी सीधे सरकार से क्लेम करते हैं, वैसे ही दवाइयाँ बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुविधा देनी चाहिए। अगर हम भारत के सम्पूर्ण दवा उद्योग को भी जीएसटी में छूट देते हैं तो इससे सिर्फ मासिक रूप से 750 करोङ रुपए की कमी जीएसटी कलेक्शन में आएगी।”

इसी बीच आज ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी को ऐसी वस्तुओं पर जीएसटी हटाने के लिए पुनः पत्र लिखा है। देखना होगा क्या सरकार कुछ उपाय निकाल इस विषय पर जनता को राहत देगी या यह जनउपयोगी कदम भी लालफीताशाही की भेंट चढ़ जाएगा।

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