वैक्सीनेशन को लेकर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- वैक्सीन की किल्लत पर मौन है बीजेपी

Ten News Network

नोएडा :– कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर देश में सियासी संग्राम मचा हुआ है, विपक्ष लगातार देश में हो रही वैक्सीन की कमी और वैक्सीनेशन के प्रोसेस को लेकर सरकार को घेरने में लगा हुआ है। हाल ही में राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर सरकार पर वैक्सीनेशन को लेकर हमला बोला था।

 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा था कि मोदी सरकार की जीरो वैक्सीन नीति भारत माता के सीने में खंजर का काम कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार ट्विटर के माध्यम से केंद्र सरकार को निशाना बना रहे हैं।

 

इसके साथ ही कांग्रेस नेता आराधना मोना मिश्रा ने आज नोएडा के प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता को संबोधित कर सरकार पर वैक्सीनेशन को लेकर सवाल खड़े किए उन्होंने कहा कि कल अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से प्रधानमंत्री मोदी ने फोन पर बात की। इस बातचीत के बाद इसे कूटनीतिक विजय बताते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को कोविड-19 की वैक्सीन देने की बात कही है।

उन्होंने कहा अमेरिका दुनिया के लगभग 19 देशों को कोविड-19 के टीके दे रहा है जिसमें भारत, कनाडा, मेक्सिको और कोरिया को लगभग 70 लाख टीके दे रहा है इस तरह भारत को बहुत कम टीके मिल रहे हैं।

 

आराधना मिश्रा ने कहा कि दुख होता है एक भारतीय होने के नाते में विदेश के संबंधों पर भरपूर समर्थन सरकार को देती हूं किंतु सवाल उठता है कि हमारे देशवासियों और देश के बच्चों को लगने वाली वैक्सीन दुनिया के 72 देशों को क्यों बांटी गई और अब उसी वैक्सीन को लाने के लिए तमाम राष्ट्रों के सामने हाथ जोड़कर अनुनय विनय कर रहे हैं और वह भी तब जब भारत के विदेश मंत्री 1 सप्ताह तक अमेरिका में कैंप कर रहे थे। उन्होंने कहा क्या तब भी अमेरिका के राष्ट्रपति भारत के प्रधानमंत्री से बात करने को तैयार नहीं हुए जो उन्हें अमेरिका की उपराष्ट्रपति से बात करनी पड़ी।

उन्होंने कहा शायद कहीं ना कहीं कूटनीतिक तनाव अवश्य है कि माननीय प्रधानमंत्री ने जो अमेरिका में जाकर तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चुनाव प्रचार किया था और अहमदाबाद में उनका प्रचार किया था तब एक साधारण कार्यकर्ता की तरह नारा लगाया था कि अबकी बार ट्रंप सरकार

 

आराधना मिश्रा ने कहा यह भारत की स्थापित विदेश नीति से पलायन था देश के प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेई जी ने भी भारत की विदेश नीति का पूरी तरह से पालन किया था। भारत किसी भी देश के अंतरराष्ट्रीय मामलों में या वहां के चुनाव में दखल नहीं देगा। मोदी को इससे बचना चाहिए था। ऐसा करके उन्होंने भारत का अहित किया है और आज उसकी कीमत तेज को चुकानी पड़ रही है।

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