नई दिल्ली (10 जून 2022): भारत भूमि को यूँ ही महान एवं देवों की भूमि नहीं कही जाती है, अपितु भारत की पवित्रता, दिव्यता यहां का हजारों सालों का समृद्ध इतिहास, विशद एवं व्यापक आध्यात्मिक गंगा इस बात का प्रमाण है कि भारत सांस्कृतिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक विश्वगुरू है।

भगवान शंकर आश्रम मसूरी के संस्थापक प्रमुख परम प्रज्ञ जगतगुरु प्रो. पुष्पेंद्र कुमार आर्यम द्वारा जानकारी दी गई है कि आश्रम के आंनद वाटिका में ब्रम्हकमल के दो पौधे हैं। गत वर्ष भी आश्रम में बुद्ध पूर्णिमा को ब्रम्हकमल खिले थे।

इस वर्ष ज्येष्ठ मास की चतुर्थी को तीन व पंचमी अर्थात भगवान शिव एवं पार्वती के विवाह के प्रांजल अवसर पर आठ यानि कुल 11 ब्रम्हकमल खिले थे।
आपको बता दें कि यह पुष्प अनूठा और दुर्लभ है, यह उत्तराखंड का राजकीय पुष्प है, उत्तराखंड में इसे कौलपद्म के नाम से जाना जाता है। यहां ब्रम्हकमल की 24 प्रजातियां पाई जाती है वहीं दुनिया भर में इसकी 210 प्रजातियां पाई जाती है। कई बार मैदानी क्षेत्रों में खिलने वाले अनेक पुष्पों को भ्रमवश उसे ब्रम्हकमल मां लिया जाता है, जबकि वास्तविक ब्रम्हकमल पुष्प में ब्रम्हा का रथ एवं सुदर्शन चक्र स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है।

यह पुष्प लगभग 13500 फुट ऊंचाई पर हिमालय की गोद में खिलता है, वहीं मसूरी की ऊंचाई 6578 फुट है,आधी ऊँचाई पर ब्रम्हकमल का खिलना दिव्य ईश्वरीय चमत्कार ही माना जा सकता है। वहीं इस पुष्प के खिलने का सामान्य समय जुलाई-सितंबर है लेकिन जून माह में इस पुष्प का खिलना भगवान शंकर एवं माता पार्वती का आशीर्वाद ही माना जा सकता है। वहीं आश्रम में एवं आसपास के भक्तगणों में ब्रम्हकमल पुष्प खिलने से हर्ष व्याप्त है उनका कहना है कि भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती का यह आशीर्वाद है, और हमलोग इसे पाकर धन्य हो गए।।