नोएडा: खुले नाले को लेकर अरुण विहार वासियों ने पर्यावरण मंत्रालय को लिखा पत्र, पढ़े पूरी खबर

Ten News Network

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नोएडा: अरुण विहार के तीन सेक्टरों – 28, 29 और 37 में बहने वाले एक खुले पानी के नाले की अनपेक्षित समस्या से तंग आकर आरडब्ल्यूए निकाय ने शुक्रवार को सेक्टर के स्वयंसेवकों की एक समिति बुलाई, जो विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों के साथ समन्वय करेगी जिससे कि समस्या का समाधान हो सके। निवासियों का कहना है कि खुला नाला उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है क्योंकि यह सीवेज, रासायनिक अपशिष्ट और जहरीली गैसों से भरा है।

इन तीन सेक्टरों में 30,000 की आबादी है जिसमें सात स्कूल, दो अस्पताल और कई धार्मिक संस्थान शामिल हैं। मामले पर नोएडा प्राधिकरण से कोई निवारण नहीं होने के कारण निवासियों के निकाय ने अब पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पत्र लिखकर निवारण की मांग की है।

अरुण विहार रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (एवीआरडब्ल्यूए) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) आईपी सिंह ने कहा की “हमने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार को पत्र लिखकर उन्हें हमारे क्षेत्र में खुले पानी के नाले के बारे में अवगत कराया है जो सीवेज के पानी, रासायनिक कचरे और जहरीली गैसों से भरा है।’

उन्होंने कहा, ‘ये जहरीली गैसें हमारे वरिष्ठ नागरिकों और स्कूल जाने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। कास्टिक हवा की निरंतर उपस्थिति के कारण ये गैसें आसपास के विद्युत बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे बिजली के खतरे पैदा होते हैं, जिससे कई मौकों पर बिजली में आग लग जाती है।’

कविता जमील, वाइस चेयरपर्सन एवीआरडब्ल्यूए और वार्ड 16, सेक्टर 37 के निदेशक के अनुसार, अरुण विहार सेक्टर 28, 29 और 37 में ज्यादातर सेवारत / सेवानिवृत्त रक्षा कर्मी और उनके परिवार वाले रहते है, जिनकी औसत आयु 70 वर्ष से अधिक है। कई मौकों पर नोएडा प्राधिकरण के साथ गंदे नाले के मुद्दे को उठाया गया है, जिसका अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा ‘हमने नोएडा प्राधिकरण से बार-बार मांग की है कि या तो गंदी नाली को कवर किया जाए या इसे साफ करने के लिए एसटीपी स्थापित किया जाए, लेकिन इस मामले का कोई निवारण नहीं हुआ है, जिसके कारण हमारे निवासियों को तीन दशकों से अधिक समय से परेशानी हो रही है।’

‘इसलिए हमने सदस्यों की एक समिति बनाई है जो पर्यावरण मंत्रालय सहित समस्या के समाधान के लिए विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों के साथ समन्वय करेगी।’

उन्होंने आगे बताया की प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि एनजीटी के दिशानिर्देशों के अनुसार नाली को कवर नहीं किया जा सकता है, वे कहते हैं कि नाली की नियमित सफाई विशेष रूप से मानसून से पहले की जाती है।

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