टेन न्यूज़ नेटवर्क के शिक्षक दिवस कार्यक्रम में बिमटेक निदेशक ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार, पढें पूरी खबर

Ten News Network

ग्रेटर नोएडा : देश मे आज शिक्षक दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है, वही इस दिवस को लेकर टेन न्यूज़ नेटवर्क द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका विषय रहा, “कोरोना काल मे शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका”। इस कार्यक्रम का संचालन एमिटी यूनिवर्सिटी के डिप्टी डायरेक्टर प्रोफ. विवेक कुमार ने किया।

प्रोफेसर विवेक कुमार ने आज शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों को बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के संबंध में चाणक्य ने कहा था की शिक्षक गौरव घोषित तब होगा, जब यह राष्ट्र गौरवशाली होगा और यह राष्ट्र गौरवशाली तब होगा, जब यह राष्ट्र अपने जीवन मूल्य एवं परंपराओं का निर्वाह करने में सफल एवं सक्षम होगा और यह राष्ट्र सफल एवं सक्षम तब होगा, जब शिक्षक अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करने में सफल होगा और शिक्षक सफल तब कहा जाएगा जब वह राष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्रीय चरित्र निर्माण करने में सफल होगा । यदि व्यक्ति राष्ट्र भाव से शून्य हैं, राष्ट्र भाव से हीन है, अपने राष्ट्रीय के प्रति सजग नहीं है, तो शिक्षक की असफलता कही जाएगी।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप बिमटेक संस्थान के निदेशक डॉ हरिवंश चतुर्वेदी शामिल हुए, आपको बता दें कि इस कार्यक्रम में एमिटी के वरिष्ठ प्रोफेसर विवेक कुमार ने डॉ हरिवंश चतुर्वेदी से महत्वपूर्ण प्रश्न किए।

बिमटेक संस्थान के निदेशक डॉ हरिवंश चुतर्वेदी ने कहा कि आज के दिन भारत रत्न सर्वपल्ली राधाकृष्णन का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 में हुआ था, उन्होंने शिक्षक के रूप में काम किया, इसलिए उनके जन्मदिन पर शिक्षक दिवस मनाते है। कोरोना काल में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, किसी ने यह नही समझा कि आखिर कोरोना महामारी में छात्रों को कैसे शिक्षा दी जाए। आज हमारे देश मे 1 करोड़ 20 लाख शिक्षक है, जिन्होंने इस कोरोना महामारी में अपना योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में शिक्षकों की हालात खराब हो गई थी, क्योंकि कोरोना महामारी में लॉकडाउन लगा हुआ था, सभी इंस्टिट्यूट, स्कूल औऱ कॉलेज संस्थान बंद थे, जिसके चलते शिक्षको की तनख्वाह नही मिल रही थी, जिससे वो सभी शिक्षक अपने परिवार का गुजारा नही कर पा रहे थे।

डॉ हरिवंश चतुर्वेदी ने कहा कि अंधेरे में दिया जलाओ तो घर मे प्रकाश होता है, इंटरनेट ने उस दिये का काम किया जिसके माध्यम से छात्रों को शिक्षा दी गई, जिससे सभी छात्रों की पढ़ाई पूरी हो सके, एग्जाम की तैयारी कर सकें। खासबात यह है कि शिक्षकों में इतना रुझान था कि 1 घण्टे की क्लास को 10 और 20 मिनट तक खेचा जाता था, जिससे छात्रों को कोई भी शिकायत का समाधान हो सके |

डॉ हरिवंश चतुर्वेदी ने आगे कहा कि शिक्षक के बैगर छात्र अधूरा है, वैसे ही छात्र के बैगर शिक्षक अधूरा है। इस ऑनलाइन की पढ़ाई ने दोनों के बिच गैप को कम किया है। ऑनलाइन की पढ़ाई में छात्रों ने अच्छी शिक्षा ग्रहण की है |

साथ ही उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार शिक्षा पर बेहतर काम कर रही है, जिससे छात्रों का भविष्य बन सकें। आज जब कोरोना के केस कम हुए है तब सरकार की तरफ गाइडलाइन जारी हुई है की छात्र इंस्टिट्यूट, स्कूल, और यूनिवर्सिटी में आकर शिक्षा ग्रहण कर सकते है, लेकिन उनके परिवार अभी भी दुविधा है, क्योंकि किसी छात्र को कोरोना हो जाए तो बहुत से छात्र कोरोना से संक्रमित हो सकते है।

इसके लिए हमने पूरी तरह से तैयारी की हुई है, जिला प्रशासन हमारा पूरा सहयोग दे रहा है। हम चाहते कि सभी छात्रों को अच्छी सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा मिल सकें।

बिमटेक के निदेशक हरिवंश चतुर्वेदी ने इस प्रसंग में कुछ दो टूक लेकिन पते की बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैं समझता हूँ कि शिक्षकों, प्राध्यापकों को इन इस बातों पर गौर करना चाहिए। शिक्षकों के बारे में समाज की धारणा पिछले 50 वर्षों में कैसे बदल गई, यह हमारे साहित्य और फिल्मों में शिक्षक पात्रों के चरित्र-चित्रण में ही देखा जा सकता है। 20वीं सदी के महान लेखकों यथा प्रेमचंद, शरत चंद्र, बंकिम चंद्र, रवींद्रनाथ टैगोर आदि ने अपनी रचनाओं में शिक्षकों को बहुत सकारात्मक रूप में चित्रित किया था।”

“भारतीय फिल्में भी आजादी से पहले और बाद के कालखंडों में शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता और एक आदर्श नायक के रूप में दिखाते रहे। फिल्म गंगा-जमुना में जब अभिनेता अभि भट्टाचार्य को इंसाफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के गाना स्कूली बच्चों के साथ गाता हुआ दिखाया गया, तो भारतीय युवाओं को एक बहुत मूल्यवान संदेश मिला। यह संदेश था कि शिक्षक समाज के लिए एक जिम्मेदार भावी पीढ़ी तैयार करते हैं, जो हमारे शाश्वत मूल्यों यथा-न्याय, समानता, भाईचारा और सामाजिक सद्भाव की रखवाली करती है।”

 

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