कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने आर्थिक संकट को लेकर बीजेपी को घेरा, कहा, देश आर्थिक इमरजेंसी की कगार पर

Abhishek Sharma / Rahul Kumar Jha

0 129

नई दिल्ली: कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद शर्मा ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और वित्त मंत्री को खुद से पैदा किए गए आर्थिक संकट का समाधान नहीं सूझ रहा है। इसको लेकर उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री तथा वित्तमंत्री खुद के पैदा किए हुए आर्थिक संकट को हल करने के बारे में कुछ समझ नहीं पा रहे हैं। आरबीआई से चोरी करना काम नहीं आएगा।


बता दें, रिजर्व बैंक ने विमल जालान समिति की सिफारिशों को अमल में लाते हुये सोमवार को रिकार्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये का लाभांश और अधिशेष आरक्षित कोष सरकार को हस्तांतरित करने का फैसला किया। इससे नरेंद्र मोदी सरकार को राजकोषीय घाटा बढ़ाये बिना सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी।

वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा केंद्र सरकार को लाभांश और अधिशेष कोष के मद से 1.76 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने के निर्णय को लेकर कांग्रेस ने आज नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि आरबीआई से ”प्रोत्साहन पैकेज” लेना इस बात का सबूत है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है।

पार्टी प्रवक्ता आनन्द शर्मा ने यह भी कहा कि सरकार ने यह नहीं बताया कि इस पैसे का इस्तेमाल कहां होगा। उन्होंने कहा, ”सरकार द्वारा खुद को प्रोत्साहन पैकेज देना इस बात का सबूत है कि अर्थव्यवस्था संकट में है। सरकार अपनी खुद की एक इकाई यानि आरबीआई से मिलने वाले घरेलू अनुदान पर निर्भर है।

केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने 1,76,051 करोड़ रुपये सरकार को हस्तांतरित करने का निर्णय किया है। इसमें 2018-19 के लिये 1,23,414 करोड़ रुपये का अधिशेष और 52,637 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्रावधान के रूप में चिन्हित किया गया है।

आरबीआई से प्राप्त राशि से सरकार को अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के प्रयासों में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पांच वर्ष के निचले स्तर पर पहुंच गयी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार के लिये पिछले सप्ताह विभिन्न कदमों की घोषणा की।

हालांकि, सरकार की कोशिश राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 प्रतिशत पर सीमित रखने की है. इससे पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल और सरकार के बीच आरबीआई में अधिशेष राशि की सीमा तय करने को लेकर गतिरोध की स्थिति बन गयी थी।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.