कोरोना संकट के बाद रोजगार और अर्थव्यवस्था को लेकर हुआ मंथन, निकलकर आयीं कई अहम तरकीबें
Rohit Sharma
नई दिल्ली :– कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के इस दौर में आर्थिक संकट और वैश्विक मंदी की बातें हो रही हैं | हालांकि लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था में बूम और कई सेक्टर में उछाल आने की भी उम्मीदें हैं।
आइए जानते हैं कि लॉकडाउन के बाद किन सेक्टर में सबसे ज्यादा उछाल और नौकरियां आने की संभावना है। वहीं कई प्रोफेशनल्स के लिए पहले से अधिक आकर्षक अवसर निकलकर सामने आ सकते हैं। यहां हम यह भी बता रहे हैं कि कोरोना संकट के बाद उभरने वाली नई नौकरियों के लिए युवाओं को किस तरह तैयारी करनी चाहिए। वही कोरोना महामारी के बाद रोजगार और अर्थव्यवस्था कैसे बढ़ेगी इस पर मंथन के लिए वाईयूसीआई संस्था और टेन न्यूज़ नेटवर्क ने मिलकर एक वेबीनार का आयोजन किया।
जिसमें “कोरोना संकट के बाद रोजगार और अर्थव्यवस्था कैसे बढ़ेगी ” विषय पर चर्चा हुई | इस कार्यक्रम में नेता , एनजीओ , विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों के पैनल ने विस्तृत चर्चा की। इस दौरान लोगों के प्रश्नों का भी जवाब दिया गया। आपको बता दे की यह कार्यक्रम टेन न्यूज़ की फेसबुक पेज पर लाइव हुआ | खासबात यह है की लॉकडाउन होने के बावजूद भी टेन न्यूज़ नेटवर्क वेबीनार के माध्यम से बहुत ही महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करवा रहा है , साथ ही इस प्लेटफार्म के माध्यम से लोगों को एक दूसरे से सीख लेने का मौका दे रही है | दरअसल , टेन न्यूज़ नेटवर्क ने अब तक “नोएडा में लाॅकडाउन की तैयारियों और चुनौतियों”, “देश को बदलने में युवाओं की अहम भूमिका” समेत अन्य विषयों पर पैनल द्वारा चर्चा कर चूका है |
आज के पैनल में मुख्यतौर पर दिल्ली विश्वविधालय के छात्रसंघ अध्यक्ष अक्षित दहिया , इंडियन युथ कांग्रेस के महासचिव राजेश सिन्हा , वाईयूसीआई संस्था के अध्यक्ष रजत श्रीवास्तव , टीडीक्स प्रवक्ता लहर सेठी , हेलमेट मेन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर राघवेंद्र कुमार और माॅडरेटर के तौर पर जिम्स संस्थान के प्रोफेसर मयंक पाण्डेय मौजूद रहे।
लॉकडाउन के बाद उभरने वाली नई अर्थव्यवस्था में इन सेक्टर को हम आवश्यक सेक्टर कह सकते हैं। ये सेक्टर हैं-हेल्थ केयर, हेल्थ टेक, फार्मा, हाइटेक, मैन्युफैक्चरिंग, एग्री टेक, नियो-बैंकिंग और फिनटेक।
दिल्ली विश्वविधालय के छात्रसंघ अध्यक्ष अक्षित दहिया ने कहा कि जब ज्यादा से ज्यादा कंपनियां वर्क फ्रॉम होम को तरजीह देंगी, तो सपोर्ट सर्विस जैसे लॉजिस्टिक, रसद, सुविधा प्रबंधन जैसे सेक्टर में काफी ग्रोथ होगी और देश में नई नौकरियां आएंगी। इस महामारी के खत्म होने के बाद हमारे देश की सरकार को एक्सपोर्ट पर विशेष ध्यान देना चाहिए , इम्पोर्ट पर कम | एक्सपोर्ट पर काम ज्यादा होगा तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी , साथ ही रोजगार पैदा होगा |
उन्होंने कहा कि इस महामहारी खत्म होने के बाद स्वदेशी पर जोर रहेगा | मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया कार्यक्रम रफ्तार पकड़ेंगे , खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर काफी जोर रहेगा । इन सेक्टर्स में ढेरों भारतीयों के लिए नौकरियां आ सकती हैं।
कृषि तकनीक पर विशेष जोर दिया जाएगा | देश में कृषि संबंधी तकनीक पर काफी ध्यान दिए जाने की संभावना है और इससे काफी नौकरियां आएंगी। कोरोना संकट ने हमारा ध्यान कृषि क्षेत्र की ओर खींचा है।
मजबूत कृषि देश की इकोनॉमी रीढ़ बन सकती है। वहीं, यह श्रमिकों के माइग्रेंट होने की समस्या से निपटने में भी मदद करेगी। संभावना है कि राज्य सरकारें खासकर कृषि तकनीक में ज्यादा निवेश करेंगी, जिससे स्थानीय रोजगार उत्पन्न होंगे।
अध्यक्ष अक्षित दहिया ने कहा कि उन उद्योगों पर ध्यान दें जो ज्यादा नौकरियां दे रहे हैं। ग्राहक सेवा, वेयरहाउस वर्कर, अकाउंटेंट्स, स्वास्थ्यकर्मियों की मांग बढ़ेगी। सरकारें भी महामारी से लड़ने के लिए नई नौकरियां लाएंगी। आप ये देखें कि आप किस सेक्टर में काम कर सकते हैं। सोशल डिस्टैंसिंग के चलते इंटरव्यू प्रोसेस धीमा होगा।
टीडीक्स प्रवक्ता लहर सेठी ने कहा कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए और ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनना चाहिए | उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाना चाहिए, , यह देश की आर्थिक वृद्धि के लिए अहम कदम साबित हो सकता है |
साथ ही उन्होंने कहा की भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद भले ही कृषि क्षेत्र हो | लेकिन, वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास के पीछे मिडिल क्लास और लोअर मिडल क्लास का सबसे बड़ा हाथ है | यही कारण है कि भारत को एक ‘मिडिल इनकम ग्रुप’ की अर्थव्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है |
लहर सेठी ने कहा कि कोविड-19 के जारी वैश्विक संकट के बीच भारतीय परिदृश्य में आर्थिक दृष्टिकोण से सबसे अधिक चर्चा दो पहलुओं पर हो रही हैं | पहला, भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे कमजोर आबादी यानी किसान, असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर, दैनिक मजदूरी के लिए शहरों में पलायन करने वाले मजदूर और शहरों में सड़क के किनारे छोटा-मोटा व्यापार करके आजीविका चलाने वाले लोग |
दूसरा, भारतीय अर्थव्यवस्था में उत्पादन करने वाले यानी वह क्षेत्र जो इस देश में पूंजी और गैर-पूंजी वस्तुओं का उत्पादन करता है | सामान्य भाषा में कहें तो मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर या बिजनेस सेक्टर |
हेलमेट मेन ऑफ़ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने कहा की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट स्कीम कोरोना संकट में बहुत ज्यादा सहायक रहेगी , वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट को लेकर उसी जिले को लोगों को रोजगार मिलेगा , उसे दूसरे जिले में जाना नहीं पड़ेगा | साथ ही उन्होंने कहा की इस लॉकडाउन में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट स्कीम पर ज्यादा असर पड़ा हुआ है , लेकिन महामारी खत्म होने के बाद ये स्कीम बहुत ही ज्यादा अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए सहायक रहेगी |
वाईयूसीआई संस्था के अध्यक्ष रजत श्रीवास्तव युवाओं में जोश है, देश के लिए काम करें, जिससे हमारा देश पुरे विश्व में बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सके। साथ ही उन्होंने कहा की युवाओं का हौसला बुलंद करने के लिए सरकार को भी महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए। आज के समय में युवाओ के पास रोजगार नहीं है, बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। जिसको लेकर केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए।
साथ ही उन्होंने कहा की इस महामारी खत्म होने के बाद अर्थव्यवस्था को ग्रोथ होने में समय लगेगा | मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर अगर सरकार ध्यान देगी तो ढेरों भारतीयों के लिए नौकरियां आ सकती हैं। वही सरकार एक्सपोर्ट पर ध्यान ज्यादा दे और इम्पोर्ट पर कम |
इंडियन युथ कांग्रेस के महासचिव राजेश सिन्हा का कहना है की अर्थव्यवस्था पहले से ही भारत की कमजोर रही है | अब इस कोरोना संकट में अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी | केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था और रोजगार पर ध्यान नहीं दिया | लॉकडाउन के दौरान देश में लगभग 14 करोड़ लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन के कारण शहरों में निर्माण गतिविधियां और तमाम फैक्ट्रियों में कामकाज ठप होने से इतनी बड़ी तादाद में लोगों की नौकरियां गई हैं। इनमें से ज्यादातर श्रमिक अपने गांव-घरों से दूर दूसरे शहरों में भूखे-प्यासे फंसे हैं, जिससे इनके सामने जीवन की भी संकट खड़ा हो गया है।
इस हालत में इन श्रमिकों की मदद के लिए सरकारों को सीधे उनकी आर्थिक मदद करनी चाहिए। हालांकि उनका ये भी कहना है कि यह विकल्प लंबे समय तक के लिए नहीं हो सकता, इसलिए जरूरी शर्तों के साथ वैसे क्षेत्रों में उद्योग-धंधों में काम की इजाजत देनी चाहिए, जहां कोरोना वायरस का खतरा कम हो। इससे बेरोजगार लोगों को काम मिल जाएगा और अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी।
Webinar on Corona Pandemic and Lockdown Impact
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Posted by tennews.in on Friday, May 1, 2020