यमन, ओमान, ईरान में ठीक नहीं हुई ओसमाह की बीमारीः जेपी हॉस्पिटल ने फिर किया कमाल

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GREATER NOIDA TENNEWS REPORTER LOKESH GOSWAMI

जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपने विदित हुनर से न सिर्फ जेपी हॉस्पिटल बल्कि भारत देश का नाम रौशन किया है। यमन निवासी 23 वर्षीय युवक 2 साल पहले हुए बम ब्लास्ट इन्जरी से बहुत परेशान था। इससे निजात पाने के लिए युवक ने 3 देशों में ऑपरेशन भी कराया था लेकिन कहीं उसकी बीमारी ठीक नहीं हुई। बैंगलोर के दो नामी अस्पताल में मरीज ने अपना इलाज कराना चाहा लेकिन वहां के डॉक्टर ने भी असमर्थता जताई। आखिरी उम्मीद लिए जब मरीज जेपी हॉस्पिटल आया तो जी.आई-हिपेटो-पैनक्रिएटिक-बिलियरी विभाग के अति अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने अपना कमाल दिखाया और सफल ऑपरेशन कर मरीज को रोगमुक्त कर दिया। यह अनोखा ऑपरेशन जेपी हॉस्पिटल के जी.आई-हिपेटो-पैनक्रिएटिक-बिलियरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कपूर एवं उनकी टीम के सदस्य डॉ. दीपांकर शंकर मित्रा के साथ डॉ. अमित जैन ने किया।बीमारी के बारे में विस्तार से बताते हुए जेपी हॉस्पिटल के जी.आई-हिपेटो-पैनक्रिएटिक-बिलियरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कपूर ने कहा, “युवक का नाम ओसमाह है जो यमन का रहने वाला है। ओसमाह साल 2014 में यमन में हुए बम ब्लास्ट की घटना में बुरी तरह घायल हो गया था। दुर्घटना में ओसमाह के मूत्राशय (ब्लैडर) एवं मलाशय को बहुत गंभीर चोट पहुंची थी। इस घटना में युवक के मलाशय की नली फट गई थी और वहां से शौच का रिसाव होने लगा था। यमन में डॉक्टरों ने मूत्राशय की बीमारी तो ठीक कर दी लेकिन मलाशय की बीमारी ठीक नहीं कर पाए। जिसके बाद डॉक्टरों ने युवक के शौच का स्थान बदलकर पेट की बाईँ तरफ बना दिया। इसके बाद भी मलाशय से मवाद का रिसाव जारी रहा तथा मरीज को हमेशा के लिए इस कृत्रिम रास्ते (COLOSTAMY) के साथ जीने के लिए कहा गया डॉ. राजेश कपूर ने बताया, “मवाद का रिसाव जारी रहने से युवक का जीवन असामान्य हो गया था। परेशानी से मुक्ति पाने के लिए ओसमाह ने ओमान एवं ईरान के नामी अस्पतालों में भी ऑपरेशन कराया लेकिन दोनों ही जगह ऑपरेशन सफल नहीं हुआ। तीनों देश से निराश होने के बाद ओसमाह ने जनवरी 2016 में बैंगलोर के दो नामी अस्पताल में भी दिखाया। यहां युवक को भर्ती तो कर लिया गया लेकिन बीमारी की जटिलता देखकर डॉक्टर्स ने ऑपरेशन करने से ही मना कर दिया।”डॉ. कपूर के अनुसार, “जब ओसमाह जेपी हॉस्पिटल आया तो बहुत परेशान था। जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने युवक की जांच की और बीमारी का स्थाई इलाज करने का आश्वासन दिया। इसके बाद सर्जरी की गई और सर्जरी सफल हुई।”जेपी हॉस्पिटल के जी.आई-हिपेटो-पैनक्रिएटिक-बिलियरी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कपूर ने आगे बताया, “जेपी हॉस्पिटल में युवक की बीमारी ठीक करने के लिए RESIDUAL PROCTECTOMY COLOANAL PULL THROUGH & DIVERTING ILEOSTOMY SURGERY की गई। इस सर्जरी में युवक के मलाशय की फटी नली को हटा दिया गया। युवक की बड़ी आंत को अपने स्थान से नीचे लाया गया फिर शौच के रास्ते को सामान्य बनाया गया ताकि युवक की सारी गतिविधियां एक सामान्य व्यक्ति की तरह सम्पन्न हो सके।”गौरतलब है कि जेपी हॉस्पिटल के अन्य विभाग ऐसे अनेक अनोखे सफल ऑपरेशन द्वारा अपनी खूबी का लोहा मनवाता रहे हैं। जी.आई-हिपेटो-पैनक्रिएटिक-बिलियरी विभाग की उपलब्धि भी उसी दिशा में एक सफल कदम है। इस विभाग के चिकित्सक पाचनतंत्र संबंधित गंभीर से गंभीर बीमारी का सफल इलाज करने में सक्षम हैं। दिल्ली-एन.सी.आर. ही नहीं बल्कि देश-विदेश के कई मरीज जेपी हॉस्पिटल के जी.आई. विभाग की विशिष्टता का लाभ उठा चुके हैं। तीनों देशों की चिकित्सकीय अनुभव से निराश हुए ओसमाह का सफल ऑपरेशन कर जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने न सिर्फ अपने गहन अनुभव एवं कार्यकुशलता का उत्कृष्ट परिचय दिया है बल्कि भारतीय चिकित्सकीय व्यवस्था को भी गौरव प्रदान किया है।

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