मोदी- योगी का प्रेम कहीं शहर की जनता को नासूर न बन जाए
ललित मिश्र
नोएडा। पत्रकारिता के दुर्गुण से प्रभावित हूं जिसके कारण दूसरों को टटोलने की आदत खत्म नहीं होती है। इसी दुर्गुण के कारण नोएडा विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ आमजनों के बीच चर्चा की। इस चर्चा में बड़ा रोचक तथ्य सामने निकल कर आया। प्रत्याशी तो चुनाव लड़ रहे है लेकिन शहर का आमजन अपने से ही लड़ रहा है। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि शहर का सामान्य व्यक्ति भारी मात्रा में मोदी और योगी के लिए वोट देना चाहता है लेकिन भाजपा प्रत्याशी पंकज सिंह को किसी भी सूरत में विधायक स्वीकार करने को तैयार नहीं है। शहर की जनता के पास कोई विकल्प भी नहीं है जिसका सीधा कारण है वोट प्रतिशत कम हो सकता है। वोट कम पड़ने का कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि करीब पौने दो लाख से अधिक नए वोट भी बने हैं जिसका सीधा लाभ भाजपा को ही मिलेगा।
शहर की जनता का मानना है कि पंकज सिंह बहुत बड़े आदमी है जिनका आम जनता से कोई लेना-देना नहीं है। उनके पिता राजनाथ सिंह का देश में बहुत बड़ा व्यक्तित्व है जिसे उनके पुत्र आसानी से भुनाने में कामयाब हो सकते हैं। पिछले 5 वर्षों की तुलना की जाए तो पंकज सिंह का आमजन के बीच कोई सरोकार नहीं रहा है। यही कारण है शहर का आम आदमी नवाब सिंह नागर जैसे नेता को याद कर रहा है। नवाब सिंह नागर सदैव आम लोगों के बीच ही रहते थे और यथासंभव उन्होंने मदद भी की है। निवर्तमान विधायक पंकज सिंह से मिलना तो दूर फोन पर बात करना भी संभव नहीं है। नोएडा के किसी भी पत्रकार, साहित्यकार, समाजसेवी अथवा चिकित्सक के पास पंकज सिंह का मोबाइल नंबर तक उपलब्ध नहीं है लिहाजा पहले उनके कर्मचारी से बात होगी फिर उनकी मंशा के बाद विधायक से बात हो सकेगी। प्रदेश के प्रमुख शहर नोएडा के लोग इस तरह का विधायक चुनने के मूड में नहीं है।
नोटा से बहिष्कारः शहर की जनता को बड़ा सोच समझकर मतदान करना होगा क्योंकि आने वाले 5 वर्षों की वह अपनी तकदीर खुद लिखेंगे। शहर की जनता को कैसा नेता चाहिए क्या वह चुनाव मैदान में है अथवा नहीं, सोच समझकर मतदान करना होगा नहीं तो विकल्प के तौर पर भारी मात्रा में नोटा का बटन दबा कर प्रत्याशियों का बहिष्कार करना चाहिए। नोटा का मतलब इनमें से कोई नहीं।
अब आयेगा बहुत मश्किल दौरः कोरोना काल में आमजन की मुश्किलें बहुत बढ़ गयी है। बहुत बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार व नौकरी खत्म हो गयी है। करोबार से मंदी हट नहीं रही है। नये वायरस आने की सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता है। तीसरे विश्व युद्ध की आहट ने समान्य लोगों की चिंताएं बढ़ा दी है। आने वाले समय में समाज सेवियों एवं जनप्रतिनियों की बहुत जरूरत होगी। निवर्तमान विधायक के पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल पर नजर डालें तो जनता से इतनी बेरूखी रखने वाला विधायक 33 वर्षो की पत्रकरिता में कभी नहीं देखा।
