केंद्र सरकार के द्वारा बायर्स को मिली राहत ,बढ़ाई बिल्डरों की मुसीबत
NOIDA ROHIT SHARMA
केंद्र सरकरा द्वारा रीयल एस्टेट एक्ट से जुड़े नियम नोटिफाई हो गए है जिससे बिल्डरों की मुसीबते बढ़ गई हैं वहीं बायर्स को इससे काफी राहत मिली हैं। आपको बता दे की अब अगर बिल्डरों ने पजेशन देने में देरी करी तो उन्हें यह काफी भारी पड़ेगा क्योंकि रीयल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट के नियम अब नोटिफाई हो गए हैं जिसमें साफ कर दिया गया हैं की यादि बिल्डरों ने पजेशन देने में देरी की तो वह घर खरीददारों को 45 दिनों के अंदर सालाना 12 फीसदी की दर से ब्याज का भुगतान करेगें। वही (ऑनगोइंग) जिस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चल रहा हैं उसके बिल्डर को बायर्स के द्वारा मिली रकम का 70 फीसदी हिस्सा अलग बैंक खाते में जमा कराना होगा। ताकि खरीददारों को प्रोजेक्ट पूरा होने की गांरटी मिल सकें। सरकार द्वारा नोटिफाई किए गए नियमों को पहले 5 क्षेत्रों में लागू किया जाएगा।
इन नियमों को किया गया नोटिफाई
केंद्र सरकार ने रीयल एस्टेट एक्ट के नियमों को नोटिफाई करके बायर्स को बहुत राहत दी हैं क्योंकि सालों से बायर्स इन बिल्डरों परेशान हैं। नोटिफाई किये गए नियम कुछ इस प्रकार हैं ।
- बिल्डरों को अब अनयूज्ड 70 फीसदी रकम को अलग बैंक अकाउंट में रखना होगा। ताकि ग्राहकों को यह सुनिश्चित हो जाए उनका प्रोजेक्ट पूरा होने की पूरी गारंटी हैं। बायर्स से कितने पैसे लिये गए हैं और कितने पैसे का यूज़ हुआ हैं इस बात का जानकारी देनी होगी।
- दूसरा यहा हैं कि अगर कोई भी बिल्डर दिये गए समय पर पजेशन नहीं देता हैं तो उसे बायर्स को 12 फीसदी की दर से ब्याज देना हो।
- बिल्डर ने क्या और किस तरह का प्लान प्रोजेक्ट बनाने के लिए तैयार किया हैं उस ओरिजिनल प्लान का जानकारी बायर्स को देनी होगी और अगर आगे जाकर प्लान में कुछ बदलाव किया तो उस बारे में भी बायर्स पूरी जानकारी देनी होगी।
- इसके साथ ही बिल्डरों को अथॉरिटी से रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अपने दस्तावेजो की कॉपी जमा करानी होगी।
- साथ ही प्रोजेक्ट में ओपेन पार्किंग होगी या क्लोज्ड इसकी जानकारी के साथ साथ प्रार्किंग का एरिया भी बताना होगा।
अपने घरों का इंतजार करने वाले लोगों के लिए यह काफी अच्छी खबर हैं क्योंकि अब बिल्डर्स अपनी मनमर्जी नहीं कर पाएगे। और अब नए नियमों के मुताबिक ही शिकायत दाखिल किए जाने के 60 दिनों के अंदर ही रेग्युलेटर को मामला निपटाना होगा। साथ ही यह नियम फिलहाल अभी 5 क्षेत्रों में लागू होगें जिनमें अंडमान व निकोबार द्वीपों, चंडीगढ़, दादर और नगर हवेली, दमन एवं दिु और लक्षद्वीप शामिल हैं।