कांग्रेस प्रवक्ता रणदीव सुरजेवाला ने गैस की सब्सिडी पर केंद्र सरकार को घेरा

Abhishek Sharma (Photo-Video) Lokesh Goswami Tennews New Delhi :

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लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त मिलने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीव सिंह सुरजेवाला ने कहा कि जरूरी 54 लोकसभा सीटों से दो सीटें कम होने के कारण वह लोकसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए कांग्रेस दावा नहीं करेगी। नियमानुसार, विपक्ष का नेता बनाने के लिए किसी पार्टी के पास लोकसभा की कुल 545 सीटों की 10 प्रतिशत सीटें होनी चाहिए। यह पद कैबिनेट स्तर का है। लेकिन कांग्रेस के पास सिर्फ 52 सीटें हैं।



पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 44 सीटें मिलने के कारण लोकसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं दिया गया था। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस अन्य दलों के साथ मिलकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए दावा करेगी? उन्होंने कहा, “नवनिर्वाचित संसदीय दल पार्टी की रणनीति तय करेगा”

उन्होंने आगे बीजेपी पर निशाना साधते कि देश की सरकार ने पहले ही दिन आम आदमी को झटका दे दिया। भाजपा सरकार ने बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत ₹25 और बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत ₹1.23 बढ़ा दी है। लगातार चौथे महीने रसोई गैस के दाम बढ़े हैं :

16 मई 2014 को सब्सिडी वाला जो सिलेंडर दिल्ली में ₹412 में मिलता था, वो अब ₹497.37 का हो गया है। यानी पिछले पाँच सालों में ₹85.37 की वृद्धि हुई है। एक परिवार साल के 12 सिलेंडर खरीदे, तो यह वृद्धि ₹1024.44 होती है। इसका सबसे ज्यादा असर हमारी गृहणियों पर पड़ेगा

बगैर सब्सिडी वाला सिलेंडर दिल्ली में 16 मई 2014 को ₹414 में मिलता था, उसकी कीमत अब ₹737.50 हो जाएगी यानी ₹323.50 की वृद्धि। 12 सिलेंडर खरीदने पर एक परिवार को ₹3882 अतिरिक्त चुकाने पड़ेंगे :

मोदी जी ने सब्सिडी छोड़ने के लिए “गिव इट अप” स्कीम शुरू की थी, जिसमें सवा करोड़ परिवारों ने सब्सिडी छोड़ी थी। उस समय सिलेंडर की कीमत ₹323.50 थी, जो अब ₹737.50 हो गई है। क्या यह उज्ज्वला की गृहणियों के साथ-साथ उन सवा करोड़ परिवारों के साथ अन्याय नहीं है?

हम प्रधानमंत्री जी से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि उज्ज्वला और देश की गृहिणियों के पक्ष में गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि को फौरी तौर से वापस लिया जाए। अमेरिकी सरकार द्वारा भारत का “स्पेशल ट्रेड स्टेटस” को 5 जून 2019 से वापस लिया जाना देश के व्यापार और देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घण्टी है। क्योंकि, यह सीधे-सीधे भारत द्वारा अमेरिका को किए जा रहे $54 बिलियन के निर्यात को प्रभावित करता है

हमारा सबसे ज्यादा निर्यात अमेरिका को होता है। इसकी वजह से हमारा 16% निर्यात प्रभावित होने वाला है। एक तरफ बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम शिखर पर है। जीडीपी 5 साल के निम्नतम स्तर पर है। ऐसे में अगर निर्यात प्रभावित होता है, तो नौकरियां भी प्रभावित होंगी
हमारा प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि वो इन विषय में देशवासियों को विश्वास दिलाएं कि वो आर्थिक और व्यापार से जुड़ी इस समस्या से कैसे निपटेंगे।

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