कानून-व्यवस्था सिर्फ धारणा की बात नहीं : पूर्व मेरठ कमिश्नर श्रवण शर्मा का विशेष लेख

आज  का  दैनिक  जागरण पढ़  रहा  था ,उसमें उत्तर प्रदेश  के  पुलिस महा निदेशक  का  कानून और व्यवस्थाके सम्बन्ध में एक  इण्टरव्यू  छपा  है .पत्रकार  पूछता  है कि  पुलिस  का  इकबाल क्यों  नहीं  बन  पा  रहा है  और  सरकार अपराध नियंत्रित करने  में  अक्षम क्यों  हो  रही  है ?  उच्चतम  अधिकारी  का  कथन  है  कि  अभी  समय  लगेगा .

उसके बाद  अमेरिका में किसी परिचित  से  बात हुई ,उन्होने  भी  यही  सवाल  पूछा कि इतने  बड़े  बहुमत  और  बड़े-बड़े वायदो के  बावजूद  योगी  सरकार  की अपराध  नियंत्रण के  मामले  में छवि  कमजोर  क्यों  हो  रही  है ?
मैं  भी  इस प्रश्न पर  कुछ समय  से  विचार कर रहा  हूँ   कि  आरम्भ के  एक  माह में  इतना जोरदार असर  दिखाने  के  बाद ये  सरकार अब  प्रभावहीन  सी  क्यों  दिखायी  पड़ रही  है ?कोई कारण  तो  है ??योगी  सरकार के  आने  के  बाद  ग्रेटर नोयड़ा में  यह  कहा  जाने लगा  था  कि  रात  में  बेधड़क  निकलिये  अब  योगीजी  की  सरकार  है ,पर  यह  अधिक  समय  तक  नहीं  चला और  वाहन  लूटने और  सीनाजोरी  की  घटनाये  पुन.होने  लगी  ,यातायात में  जो  कुछ  दिनो  का  सुधार आया था  ,वह  गायब हो  चला  है ,जो  अधिकारी और पुलिस  कर्मी सड़क  पर दिखायी  देने  लगे  थे  या  रात में पुलिस  वाहन देख  कर लोगों  में  विश्वास उत्पन्न होने  लगा  था  ,वह  सब  पूरानी  लीक  पर बडी  शीघ्रता  से  लौट  गया  है .बड़े  अधिकारी  फिर दरबार और  मंत्रियों  की  हाजरी  में  वापस  चले  गयें  हैं .इस  लिये  जो  इकबाल  का  भ्रम  हो  रहा  था  वह  निराशा   में  बदल  रहा  है .कुछ  लोग  तो  मायवती से  तुलना  करने  लगे  है . आमतौर पर परसेप्शन की यही  समस्या है,वह  जितनी ज़ल्दी सकारात्मक  होता  है  उससे  अधिक  तेज़ी  से  दूसरी  और  चला  जाता  है .
अपराध -नियंत्रण ही  ऐसा  क्षेत्र  है  जिसमें  भाजपा  की  सरकार  एक अलग  छवि  बना  सकती  है ,पर यह काम केवल  पुलिस  के  अधिकारियों  पर नहीं  छोड़ा  जा  सकता  ,इसमें  मुख्य  मंत्री  को  निजी  रूप  से  दखल देना  पडता  है .प्रशासन और पुलिस  में  यथास्थिति  वादियों की  बडी  संख्या है .योगी जी  में  पूर्ण  क्षमता है .आशा  है जल्दी  परिणाम  आयेंगे।
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