नोएडा में लाॅकडाउन की तैयारियों और चुनौतियों को लेकर हुई चर्चा, सामाजिक संस्थाओं ने रखे विचार

Abhishek Sharma

नोएडा : दुनिया के साथ-साथ अपने देश को भी कोरोनावायरस से फैली महामारी ने हिला कर रख दिया है। इस समय देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति है। बढ़ते कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए केंद्र सरकार ने तीसरे चरण में लॉक डाउन को 18 मई तक बढ़ाने का फैसला लिया है। जब इस तरह की चुनौती आती है तो उससे मुकाबला करने के लिए अलग-अलग स्तर पर नये-नये मापदंड भी तय करने पड़ते हैं।

एक तरफ इस महामारी से निपटने की जिम्मेदारी डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने बखूबी संभाल रखी है तो दूसरी ओर आपदा की इस घड़ी में देश की शान्ति व्यवस्था बनाये रखना पुलिस की अहम जिम्मेदारी है। वहीं सामाजिक संस्थाओं ने गरीबों को भरपेट खाना पहुंचाने की जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन किया है। गौतम बुद्ध नगर में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 155 हो गया है।

Webinar on Lock down issues in Gautam Buddh Nagar

Webinar on Lock down issues in Gautam Buddh Nagar will be discussed by FONRWA, NOFAA,NOVRA,NEFOWA,NAVRATAN FOUNDATIONS

Posted by tennews.in on Friday, May 1, 2020

नोएडा में लाॅक डाउन की तैयारियां एवं चुनौतियों को लेकर टेन न्यूज़ द्वारा फेसबुक लाइव के माध्यम से एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें शहर की कई संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा, नोवरा अध्यक्ष एडवोकेट रंजन तोमर, नेफोवा से श्वेता भारती, नोफा से राजीवा सिंह, फोनरवा महासचिव केके जैन व माॅडरेटर के तौर पर टेन न्यूज के सलाहकार अशोक श्रीवास्तव मौजूद रहे।

गौतम बुद्ध नगर की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार रखते हुए योगेंद्र शर्मा ने कहा कि शहर में कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। यह एक चिंता का विषय जरूर है, लेकिन शासन प्रशासन इससे निपटने के लिए बेहतरीन कार्य कर रहा है। वहीं इसी के साथ साथ फोनरवा गरीब, मजदूरों एवं असहाय लोगों के लिए हर समय तत्पर खडी है। पूरी टीम गरीबों की सहायता कर रही है। उन्होंने कहा कि फोनरवा के कार्यालय पर रोजाना 2500-3000 लोगों का खाना बन रहा है और लोगों को इसका फायदा भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्येय है, ‘कोई भूखा बेशक से उठे लेकिन कोई भूखा सोए ना।’ वहीं उन्होंने कहा कि फिलहाल सामाजिक संस्थाओं का शासन प्रशासन के साथ तालमेल नहीं बैठ पा रहा है जिसके बावजूद भी हम अपनी ओर से हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।

नोएडा की हाई राइज सोसायटियों में कोरोना के केस सबसे पहले सामने आए थे। यहां आबादी भी ज्यादा रहती है। इस पर बोलते हुए नोफा के अध्यक्ष राजीवा सिंह ने कहा कि सबसे पहले कोरोना के मामले हाई राइज सोसायटी ओं में मिलने शुरू हुए थे लेकिन अब नोएडा में ऐसी जगहों पर खुराना का संक्रमण अधिकतर खेल रहा है जहां रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन नहीं है सेक्टर 8 9 10 में देखा जाए तो यहां पिछले कुछ समय से लगातार को रोना पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं जबकि यहां आरडब्लूए भी एक्टिव नहीं है अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन को आरडब्ल्यूए के साथ तालमेल बैठाकर काम करना होगा तभी इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। वहीं अगर हाई राइज सोसायटियों की बात करें तो यहां आबादी काफी अधिक है और और सुविधाएं इतनी नहीं है। यहां एक टावर में रहने वाले सभी लोगों को एक ही लिफ्ट का प्रयोग करना पड़ता है। इससे भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। वही ऐसी जगहों पर शासन प्रशासन की गाइडलाइन स्पष्ट नहीं है। लोग सोसायटियों में घूम रहे हैं। इसके लिए प्राधिकरण की कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। वही हाई राइज सोसायटियों में जो ऊपर की मंजिलों पर लोग रह रहे हैं, वहां इस समय में एसी की जरूरत पड़ रही है। लेकिन सर्विस नहीं होने के चलते लोग नहीं चला पा रहे हैं। इसको भी आवश्यक सेवाओं में जोड़ा जाना चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि आरडब्ल्यूए के पास कोई लीगल अधिकार नहीं है, जिसके चलते आरडब्लूए उस स्तर पर काम नहीं कर पा रही है जिस पर करना चाहिए।

कमिश्नर द्वारा नोटिस जारी करने के बाद भी आरडब्लूए अपने कायदे कानून बना रहे हैं, इस पर फोशरवा के महासचिव केके जैन ने कहा कि इस समय आरडब्लूए अपने कोई नियम नहीं बना रही है। जो भी फैसला सेक्टर, सोसाइटी के निवासियों के पक्ष में होगी वह लागू किए जा रहे हैं। आरडब्ल्यूए की कोशिश रहती है कि उनके किसी फैसले से निवासियों को कोई परेशानी ना हो। बल्कि जो भी फैसले लिए जाते हैं वह निवासियों के हित को सोच कर लिए जाते हैं। जबकि नोएडा की किसी आरडब्लूय को शासन प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार की कोई मदद मुहैया नहीं कराई जा रही है। अपने दम पर आरडब्लूए सारे कार्य कर रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति पर बोलते हुए रंजन तोमर ने कहा कि यह बीमारी सेक्टरों व सोसायटियों से शुरू होकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंची। उनका कहना है कि अमीरों द्वारा लाई गई बीमारी गरीबों को भुगतनी पड़ रही है। अगर सेक्टर या सोसाइटी में कोरोना पॉजिटिव केस मिलता है तो वहां स्थिति कंट्रोल करना काफी आसान हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बिलकुल विपरीत है। वहां लोगों की अलग-अलग समस्याएं हैं। यहां किसी के पास खाने को भोजन नहीं है तो किसी के पास कुछ अन्य समस्या है। ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों के नंबर भी नहीं होते हैं जिसके चलते ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां अगर आवश्यक सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी कराने की कोशिश की जाए तो मकान नंबर ने होने के चलते डिलीवरी नहीं हो पाती है। यह मुद्दा डीएम के संज्ञान में भी लाया गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों का इतना आतंक बढ गया था कि लोग कोरोना से ज्यादा डेंगू , मलेरिया से खौफ खाने लगे हैं। अगर मच्छरों का प्रकोप इसी प्रकार रहा तो नए-नए मरीज सामने आएंगे। जिसका दबाव अस्पतालों पर भी बढ़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों से गेहूं खरीदने के लिए क्रय केंद्र बनाए जाएं क्योंकि ऐसे हालात में किसान अपना गेहूं मंडी में नहीं बेच सकता है।

नेफोवा की सदस्य श्वेता भारती ने अपना पक्ष रखते हुए कहा पूरा देश लॉक डाउन है। ऐसे में इसकी मार सबसे अधिक गरीबों, मजदूरों को झेलनी पड़ रही है। लोग दो वक्त का खाना जुटाने में असमर्थ हैं। ऐसे लोगों के लिए नेफोवा ने खाना खिलाने की पहल शुरू की है। हमारी पूरी टीम ग्रेटर नोएडा वेस्ट और आसपास के क्षेत्रों में गरीबों को सूखा राशन एवं भोजन मुहैया करा रही है। नेफोवा ने अब तक करीब 2500 से अधिक लोगों को सूखा राशन वितरित किया है। वही रोजाना सैकड़ों की संख्या में गरीबों को भरपेट भोजन खिलाते हैं। पिछले 35-40 दिनों से नेफोवा की पूरी टीम इसी कार्य में लगी है। सब लोगों का कार्यक्षेत्र बंटा हुआ है। कोई सामान खरीद कर लाता है, तो कोई उसकी पैकेजिंग करता है, तो वहीं दूसरी टीम उसको गरीबों तक पहुंचाने का कार्य कर रही है और जब तक लॉक डाउन रहेगा तो नेफोवा की टीम इसी प्रकार जरूरतमंदों को राशन व खाना मुहैया कराती रहेगी।

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