इंग्लिश मडियम के नाम पर हो रही कमाई

इंग्लिश मीडियम के नाम पर पब्लिक स्कूलों में पैरेंट्स के साथ जमकर लूट की जा रही है। एडमिशन से लेकर एग्जाम होने तक पब्लिक स्कूल हजारों रुपए प्रति बच्चे कमाते हैं, जबकि इनके पास सीबीएसई की मान्यता भी नहीं है और मानकों के अनुसार टीचर और बिल्डिंग नहीं है।
जिले में इंग्लिश मीडियम से शिक्षा देने के नाम पर एक ही बल्कि दर्जनों पब्लिक स्कूल चल रहे हैं। यह स्कूलों घरों में भी चल रहे हैं। कई स्कूल तो किराए के मकानों में चल रहे हैं। पब्लिक स्कूलों द्वारा इंग्लिश मीडियम की शिक्षा देने के लिए जमकर प्रचार प्रसार भी कर रहे हैं। मानकों के अनुसार, पब्लिक स्कूलों को पहले सीबीएसई की मान्यता लेनी पड़ती है। जिसके बाद ही स्कूल में शिक्षण कार्य चलाया जा सकता है। लेकिन अधिकांश पब्लिक स्कूलों के पास मान्यता नहीं है। मान्यता न होने के बाद भी स्कूल प्रबंधन निडर होकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। स्कूल में बीएड डिग्री धारक टीचर होने चाहिए, लेकिन कई स्कूलों में बीए पास भी टीचर नहीं है। कहने के लिए इंग्लिश मीडियम की शिक्षा दी जा रही है, लेकिन हकीकत है कि स्कूलों में हिंदी मीडियम से ही पढ़ाई की जा रही है। इन स्कूलों द्वारा एडमिशन के रूप में 500 से 2000 रूपए तक पैरेंट्स से वसूल रहे हैं। प्रतिमाह 500 रुपए से कम फीस भी नहीं ली जा रही है। एग्जाम होने तक प्र्रति पैरेंट्स से हजारों रुपए कमाने वाले इन स्कूलों पर कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है। बीएसए विभाग का कहना है कि पब्लिक स्कूल उनके दायरे में नहीं आता है। लिहाजा वे उनकी जांच नहीं कर सकते हैं।

Comments are closed.