प्रथम एशियाड लिटरेचर फेस्ट में बुक के विमोचन के दौरान धर्म पर चर्चा

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प्रिय संपादक, ब्यूरो चीफ
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विषय– प्रथम एशियाड लिटरेचर फेस्ट में बुक के विमोचन के दौरान धर्म पर चर्चा

धर्म कभी भी हिंसा और कट्टरता फैलाने का संदेश नहीं देता है। आजकल देश में धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं। धर्म सिर्फ आत्मा का स्वभाव है। ये बातें जैन श्वेतांबर तेरापंथ के युवा संत ने गुजरात की पूर्व आईएएस अधिकारी अंजू शर्मा की पुस्तक आई आॅफ द स्टाॅर्म के विमोचन कार्यक्रम में कहीं। यह प्रोग्राम दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में रविवार की दोपहर को आयोजित किया गया।
मुनिश्री ने इस मौके पर कहा कि लोगों ने आज धर्म का मूल रूप ही बदल दिया है। लोग संप्रदायों में बंट गए हैं। हर संप्रदाय अपने आपको श्रेष्ठ बताने की होड़ में हिंसा कर रहा है।धर्म में कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देने का काम में राजनीतिक लोगों की अहम भूमिका भी दिखाई देती रहती है। ऐसे लोगों का मकसद होता है सिर्फ राजनीतिक फायदा लेना।

कार्यक्रम में नवोदिता लेखिका अंजू शर्मा ने अध्यात्म पर बोलते हुए कहा कि अध्यात्म अपने अंदर झांकने का प्रयास है। यह अपने से साक्षात्कार सरीखा जैसा है।
इंडिया निर्माण एनजीओ के राष्टीय अध्यक्ष रविन्द्र भंडारी ने कहा कि साहित्य सभी के लिए है। यह ब्यूरोक्रेट से लेकर आम आदमी तक के लिए है। वहीं उपाध्यक्ष डाॅ दीपाली भारद्वाज ने कहा कि मैं तो सिर्फ पढ़ने की शौकीन हूं। मुझे साहित्य पसंद है।
कार्यक्रम की अतिथि डाॅ सीमा ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं बहुत लम्बे समय से प्रतीक्षा कर रही थी कि जयपुर की तरह ही दिल्ली में भी ऐसा साहित्य फेस्टीवल आयोजित किया जाए। उन्होेंने कहा कि लेखक बनना एक तपस्या है। लेखन से पूरे विश्व में पहचान मिलती है। मैं अब तक 50 किताबें लिख चुकी हैं। और मुझे अभी तक याद है जब मेरी पहली किताब छपी थीा।
जिसको किताबों का नशा है वही लेखक बन सकता है। हमें अभिव्यक्ति का माध्यम किताबों से मिलती हैं। पढ़ने की भूख सभी में होनी चाहिए। किताबों के बिना आप जीवन की कल्पना नहीं कर सकते।
इसके साथ ही इस कार्यक्रम में आईएफएस डाॅ अमरेन्द्र कथुआ, आईआरएस संगीता गुप्ता, आईआरएस अरूण एस भटनागर, आईआरएस नीना कुमार, नीना सहर ये सभी डिफेंस मंत्रालय में कार्यरत हैं। इसके अलावा जीएम एचआर एएअीई डाॅ दिवाकर गोयल, आईएएस फैज हाशमी, आईएफएस डाॅ मधुप मोहता थे।

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