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2016

वास्तविक कसौटी है प्रेम – प्रोफ़ेसर पी.के.आर्य

बहुत बार सोचा प्रेम पर कुछ लिखूं ,लेकिन तत्क्षण ये ख्याल आता रहा कि प्रेम तो करने की बात है लिखने की नहीं ! आज जब देखता हूँ कि प्रेम अपनी दिव्यता और नैसर्गिकता के पायदान से कईं सीढ़ी नीचे उतरकर बाज़ारवाद की मेज पर सज रहा है ;तब कुछ बातें आपसे…
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