टेन न्यूज़ लाइव परिचर्चा : कोविड-19 – स्कूल, छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की चुनौतियाँ – विशेष रिपोर्ट

Ten News Network

ग्रेटर नोएडा :– उत्तर प्रदेश में नौवीं से 12 तक के स्कूल खुलने के बाद अब छोटे बच्चों के स्कूल भी खुलेंगे। कोरोना के कारण बंद चल रहे यह स्कूल करीब 11 महीने बाद खोले जाएंगे। सीएम योगी ने कुछ दिन पहले स्कूलों को खोलने के लिए अधिकारियों को व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। अधिकारियों का प्रस्ताव मिलने के बाद आदेश जारी हो गया।

 

 

 

सीएम योगी ने निर्देश दिया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार ही स्कूल खोले जाएंगे। आदेश में कहा गया है कि 10 फरवरी से छठी से आठवीं तक के स्कूल खुल जाएंगे। एक मार्च से पहली से पांचवीं तक के सभी स्कूल खुलेंगे।

 

 

वही स्कूल खुलने को लेकर अब बच्चों के अभिभावकों समेत शिक्षकों के मन मे असमंजस की घड़ी चल रही है कि आखिर किस तरह से बच्चों को कोविड 19 से बचाए रखें , क्योंकि अब एक चुनौती पूर्ण कदम रहेगा , दरअसल बड़ी संख्या में बच्चें स्कूल में पढ़ाई करने आएंगे।

 

“कोविड-19 से स्कूल, छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की चुनौतियाँ” विषय पर टेन न्यूज़ लाइव द्वारा सच्ची बात परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें अपना वक्तव्य देने के लिए सुधा सिंह (शिक्षाविद,प्रधानाचार्या रायन इंटरनेशनल स्कूल , ग्रेटर नोएडा),ज्योति अरोरा (शिक्षाविद,प्रधानाचार्य दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल नोएडा इक्स्टेन्शन), निरंजन सिंह (मानव संसाधन विशेषज्ञ और स्कूल पेरेंट)प्रोफेसर विवेक कुमार (उप निदेशक,एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा, सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सचेतक) के संचालन में परिचर्चा में शामिल हुए।

 

परिचर्चा का प्रारंभ करते हुए प्रोफेसर विवेक कुमार ने परिचर्चा में शामिल हुई ज्योति अरोरा से प्रश्न किया कि 10 फरवरी से विद्यालय खोलने के आदेश आ चुके हैं , इस पर आपका क्या मत है?

 

जिसके जवाब में ज्योति अरोरा ज्योति अरोरा (शिक्षाविद; प्रधानाचार्य , दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल , नोएडा इक्स्टेन्शन) ने कहा, प्रशासन द्वारा विद्यालय खोलने हेतु जो निर्देश दिए गए हैं , जिस प्रकार से विद्यालयों के प्रबंधकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं, विद्यालय खोलने से पहले जो चीजें प्रशासन ने सभी शिक्षकों को समझाई हैं । नियमावली के आधार पर मैं प्रशासन की बेहद सराहना करती हूं बाकी अब हम न्यू नॉर्मल जीना शुरु कर रहे हैं , तो हमें कदम कदम पर सजग रहने की आवश्यकता है और कई विषयों में हिम्मत दिखाने की भी आवश्यकता है , क्योंकि अभी सबसे बड़ी चुनौती है। बच्चों को इसके बारे में गंभीरता से समझाना और अभिभावकों को मनाना ताकि वह अपने बच्चों को विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने हेतु बच्चों को भेज सकें।”

 

परिचर्चा आगे बढ़ी तो प्रोफेसर विवेक कुमार ने सुधा सिंह से प्रश्न किया कि क्या आप सरकार की इस पहल का स्वागत करना चाहेंगे या आपको लगता है कि सरकार ने थोड़ी जल्दी कर दी है इस मामले में?

 

जिसके जवाब में सुधा सिंह (शिक्षाविद; प्रधानाचार्या , रायन इंटरनेशनल स्कूल , ग्रेटर नोएडा) ने कहा कि अभी जो कुछ भी ज्योति अरोरा ने कहा मैं उनकी बात का पुरजोर समर्थन करती हूं , मुझे लगता है कि अब हम पूरी तरीके से तैयार हैं और हमें विद्यालय खोलने चाहिएं। सुधा सिंह ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि “निजी विद्यालयों के छात्रों के पास वर्चुअल माध्यम से पढ़ने के लिए उचित संसाधन मौजूद हैं जैसे कि वाईफाई, लैपटॉप, स्मार्टफोन, ऑनलाइन लेक्चर अटेंड करने के लिए बड़े और अच्छे एप्स का सब्सक्रिप्शन किंतु दूसरी तरफ जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं वह वर्चुअल माध्यम से शिक्षा लेने में असमर्थ हैं अभी तक देशभर में एक कठिन समय चल रहा था किंतु मुझे लगता है कि अब हमें घर से निकलना ही पड़ेगा और विद्यालय खोलने का यह जो निर्णय आया है यह बहुत ही उचित समय पर आया है बस हमको थोड़ी सी सावधानियां बरतनी है और सब कुछ अच्छा होगा।

 

अभी जो विद्यालय खुल रहे हैं , इसको खोलने के लिए 3 कड़ियां हैं , जिन्हें हमें आपस में जोड़ना होगा पहला प्रशासन जो सख्ती से देखे कि सभी विद्यालय निर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं , दूसरा विद्यालय जो कि बच्चों को समझाए कि न्यू नार्मल कैसे जीना है और तीसरी कड़ी हैं अभिभावक जो हिम्मत करके अपने बच्चों को विद्यालय में पुनः से भेजें।”

 

इसी के साथ साथ प्रोफेसर विवेक कुमार ने परिचर्चा में उपस्थित अभिभावक निरंजन सिंह से प्रश्न किया कि क्या विद्यालय खोलने का निर्णय सही कदम है सरकार के द्वारा?

 

जिसके जवाब में निरंजन सिंह निरंजन सिंह (मानव संसाधन विशेषज्ञ और स्कूल पेरेंट) ने कहा कि हम ठहर कर जीवन नहीं जी सकते हैं, क्योंकि चलती का नाम जिंदगी है । हमें न्यू नॉर्मल में आना ही पड़ेगा और विद्यालय खोलने ही पड़ेंगे, फिलहाल जो निर्णय प्रशासन द्वारा लिया गया है मैं इसका स्वागत करता हूं मैंने प्रशासन की सभी गाइडलाइन पड़ी हैं यह गाइडलाइंस बहुत ही सोच समझकर मंथन करके बनाई गई हैं , यह साफ झलकता है ।

 

 

प्रशासन द्वारा एक सराहनीय कार्य किया गया है , बस इन गाइडलाइंस को जमीनी स्तर पर उतारने की चुनौती हम सब के ऊपर है। विद्यालय खोलते हुए हमें ध्यान देना है कि एक ट्रांसपेरिसी बनी रहे हमें कोविड-19 के प्रति सिर्फ शिक्षकों और छात्रों को सजग नहीं करना है हमें स्कूल बस ड्राइवर, गार्ड, माली, सफाई कर्मचारी आदि लोगों को भी इसके प्रति सजग बनाना होगा , जिसके बाद हम सुनिश्चित कर सकते हैं कि बच्चे सुरक्षित हैं।

 

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चर्चा के दौरान प्रोफेसर विवेक कुमार ने एक बात कही कि कभी भी क्लास रूम की पढ़ाई और वर्चुअल पढ़ाई की तुलना नहीं की जा सकती , क्योंकि क्लास रूम में ना सिर्फ किताबें पढ़ाई जाती है बल्कि क्लास रूम में शिक्षकों द्वारा बच्चों को जीवन सिखाया जाता है और यह वर्चुअल माध्यम से जो पढ़ाई हो रही है वह सिर्फ एक मजबूरी के तहत हमें करना पड़ा । यही कारण है कि शिक्षकों से लेकर छात्रों तक में विद्यालय खुलने की उत्सुकता बनी हुई है।

 

 

प्रोफेसर विवेक कुमार ने इस परिचर्चा में विद्यालय खुलने से जुड़ी कुछ चिंताएं साझा की जिनमें मुख्य रुप से, यातायात के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की चुनौती बहुत बड़ी है । स्कूल बस में हमें यह ध्यान रखना होगा कि जो बच्चे सफर कर रहे हैं , वह एक निश्चित दूरी बनाकर सफर कर रहे हैं कि नहीं, जो अन्य छात्र पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करके आ रहे हैं वह अच्छे से स्वयं को सैनिटाइज कर रहे हैं या नहीं यह एक बड़ी चुनौती होने वाली है।

 

बच्चे स्वाभाविक रूप से हमेशा अनुशासन में नहीं रहेंगे जब पीरियड चेंज होगा तो उनको पांच ,दस मिनट का समय मिलता है। उस समय वह आपस में मिलेंगे । लंच टाइम में एक दूसरे का टिफन भी शेयर करेंगे , इन चीजों से कैसे बचा जाए यह भी एक बड़ी चुनौती है।

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