आम्रपाली हॉस्पिटल में डाइबीटीज सेमिनार का आयोजन

LOKESH GOSWAMI आम्रपाली हॉस्पिटल में डाइबीटीज सेमिनार का आयोजन का आयोजन किया गया .इस सेमिनार में डाइबी‍टीज के मरीज समेत कई लोगों ने हिस्सा लिया सेमिनार में आम्रपाली हॉस्पिटल के वरिष्ट फिजिसियन और डाइबटलॉजिस्ट डॉक्टर अमित गुप्ता ने मधुमेह सम्बंधित कई पहलु पर बातचीत की और इस रोग के बारे में लोगों को जागरूक बनाया इस सेमिनार में क्या है मधुमेह, मधुमेह के लक्षण, इसका इलाज और इसका बचाओ पर जानकारी दी गयी.. वहीँ इस मौके पर डॉक्टर अमित गुप्ता ने कहा की भारत में डाइबीटीज एक गंभीर समस्या है बढते शहरीकरण, आधुनिक युग की समस्‍याऍं व तनाव, अचानक खानपान व रहन-सहन में आये परिवर्तन, खान पान और  शारीरिक श्रम की कमी के कारण मधुमेह हमारे देश में आजकल तेजी से बढ रहा है।क्या है मधुमेह : मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। यह बीमारी में हमारे शरीर में अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है …..रक्त ग्लूकोज स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीजों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं। धमनियों में बदलाव होते हैं। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है मधुमेह  के प्रमुख लक्षणः

 1. वजन में कमी आना।
 2. अधिक भूख प्‍यास व मूत्र लगना।
 3  . थकान, पिडंलियो में दर्द
.बार-बार संक्रमण होना या देरी से घाव भरना। हाथ पैरो में झुनझुनाहट, सूनापन या जलन रहना। नपूंसकता मधुमेह रोग की विकृतियॉः-। कुछ खास दीर्घकालीन विकृतियॉः-नेत्र समय पूर्व मोतिया बनना, कालापानी, पर्दे की खराबी(रेटिनापैथी) व अधिक खराबी होने पर अंधापन। …….हदय एवं धमनियॉ हदयघात (हार्ट अटैक) रक्‍तचाप, हदयशूल (एंजाइना)। ..गुर्दा मूत्र में अधिक प्रोटीन्‍स जाना, चेहरे या पैरो पर या पूरे शरीर पर सूजन और अन्‍त में
गुर्दो की कार्यहीनता या रीनल फैल्‍योर। मस्तिष्‍क व स्‍नायु तंत्र उच्‍च मानसिक क्रियाओ की विकृति जैसे-स्‍मरणशक्ति, संवेदनाओं की कमी, चक्‍कर आना, नपुंसकता (न्‍यूरोपैथी), लकवा।उपचारः-मात्र रक्‍त में ग्‍लूकोस को कम करना मधुमेह का पूर्ण उपचार नहीं है उपयुक्‍त भोजन व व्‍यायाम अत्‍यंत आवश्‍यक
है। कुछ प्रमुख खाद्य वस्‍तुऍं ज्रिन्‍हे कम प्रयोग में लाना चाहिए। नमक, चीनी, गुड, घी, तेल, दूध व दूध से निर्मित वस्‍तुऍं परांठे, मेवे, आइसक्रीम, मिठाई, मांस, अण्‍डा, चॉकलेट, सूखा नारियल खाद्य प्रदार्थ जो अधिक खाना चाहिए।हरी सब्जियॉं, खीरा, ककडी, टमाटर, प्‍याज, लहसुन, नींबू व सामान्‍य मिर्च मसालों का उपयोग किया जा सकता है। आलू, चावल व फलों का सेवन किया जा सकता है। ज्‍वार, चना व गेहूं के आटे की रोटी (मिस्‍सी रोटी) काफी उपयोगी
है सरसों का तेल अन्‍य तेलों (सोयाबीन, मूंगफली, सूर्यमुखी) के साथ प्रयोग में लेना चाहिए भोजन का समय जहॉं तक संभव हो निश्चित होना चाहिए और लम्‍बे समय तक ‍भूखा नही रहना चाहिये। भोजन की मात्रा चिकित्‍सक द्वारा रोगी के वजन व कद के हिसाब से कैलोरीज की गणना करके निर्धारित की जाती है…उपचार का दूसरा पहलू है व्‍यायाम- नित्‍य लगभग 20-40 मिनट तेज चलना, तैरना साइकिल चलाना आदि पर पहले ये सुनि‍श्‍चित करना आवश्‍यक है कि आपका शरीर व्‍यायाम करने योग्‍य है कि नहीं है। योगाभ्‍यास भी उपयोगी है। भोजन में उपयुक्‍त परिवर्तन व व्‍यायाम से जहॉं एक ओर रक्‍त ग्‍लूकोस नियंत्रित रहता है वहीं दुसरी ओर शरीर का वजन संतुलित रहता है ओर रक्‍तचाप नियंत्रण में मदद भी मिलती है।दवाऍः-….बच्‍चों में मधुमेह का एकमात्र इलाज है इंसुलिन का नित्‍य टीका। वयस्‍को में गोलियों व टीके का उपयोग किया जा सकता है। ये एक मिथ्‍या है कि जिसे एक बार इंसुलिन शुरू हो गयी है उसे जिन्‍दगी भर ये टीका लगवाना पडेगा गर्भावस्‍था में इन्‍सुलिन ही एक मात्र इलाज है।विकसित देशों में मधुमेह के स्‍थायी इलाज पर खोज जारी है और गुर्दे के प्रत्‍यारोपण के साथ-साथ पैनक्रियास प्रत्‍यारोपण भी किया जा रहा है, हालांकि ये अभी इतना व्‍यापक और कारगर साबित नहीं हुआ है।मधुमेह रोगियो को क्‍या सावधानियॉं बरतनी चाहिएः-   नियमित रक्‍त ग्‍लूकोस, रक्‍तवसा व रक्‍त चाप की जॉंच।……निर्देशानुसार भोजन व व्‍यायाम से संतुलित वजन रखें। लम्‍बे समय तक भूखे न रहें।…..धूम्रपान व मदिरापान का त्‍याग।

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