गौतम बुद्ध नगर ज़िले के लिए है वरदान-GIMS ग्रेटर नोएडा : डॉक्टर राहुल सिंह, कोरोना वाॅरियर

ABHISHEK SHARMA

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कोरोना वायरस की वजह से हमारे जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। ना केवल हमारे निजी जीवन पर बल्कि हमारे रिश्तों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। लेकिन महामारी के इस दौर में हम ख़ुद और अपनो को कैसे बचाएं और कैसे सुरक्षित रखें इसके लिए तमाम तरह की जानकारी, सुझाव और सलाह मौजूद हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, कोरोना वायरस से ख़ुद को सुरक्षित रखने का सबसे बेसिक और महत्वपूर्ण उपाय है कि हम सफ़ाई से रहें। साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखना सबसे ज़रूरी है।

इसी मुद्दे को लेकर टेन न्यूज़ नेटवर्क ने लाइव कार्यक्रम ‘सच्ची बात : प्रोफेसर विवेक कुमार के साथ’ का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुडे लोगों ने हिस्सा लिया।

आपको बता दें कि प्रोफेसर विवेक कुमार टेन न्यूज़ नेटवर्क पर सच्ची बात कार्यक्रम का संचालन करते आ रहे हैं। जिसमें अलग-अलग क्षेत्र के लोग किसी भी अहम मुद्दे पर चर्चा करते हैं और चर्चा के दौरान समस्याओं और समाधान पर भी जोर दिया जाता है। प्रोफेसर विवेक कुमार ने इस कार्यक्रम के 18वें संस्करण का बेहद बखूबी संचालन किया।

कार्यक्रम के पैनलिस्ट

डाॅक्टर प्रो सिद्धार्थ गुप्ता, सलाहकार संपादक, टेन न्यूज नेटवर्क, सलाहकार एंटी टास्क फोर्स, डाॅ राहुल सिंह, रेजिडेंट डाॅक्टर, जिम्स ग्रेटर नोएडा, एस एस शुक्ला, जाॅइंट कमिश्नर, एनएसईजेड, कोरोना वाॅरियर

डॉक्टर सिद्धार्थ गुप्ता ने कहा कि कोरोना वायरस ने इस संसार में हर एक व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डाला है। महामारी ने लोगों के जीवन को झकझोर कर रख दिया है। यह बात स्पष्ट है कि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक इसका कोई उपाय नहीं है। कोरोना से बचने के लिए कम्युनिटी स्प्रेड को रोकना होगा और अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि अपने हाथों को समय-समय पर धोते रहें। समय-समय पर साबुन और पानी से हाथ धोएं। या आप चाहें तो एक अल्कोहॉल बेस्ड सैनेटाइज़र भी इस्तेमाल कर सकते हैं। सैनेटाइज़र को हाथों पर अच्छी तरह लगाएं। इससे अगर आप के हाथ पर वायरस मौजूद हुआ भी तो समाप्त हो जाएगा।

वहीं डाॅ सौम्या ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की मार पूरा विश्व झेल रहा है। अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें। जिस तरह से लोगों की जिंदगी चल रही थी, उस को बदलने की जरूरत है। कोरोना वायरस लोगों को सिखा कर जाएगा कि जीवन कैसे जिए। उन्होंने बताया कि मैं कोरोना वायरस मरीजों के लिए जुलाई से काम कर रही हूं।

उन्होंने बताया कि मैं दिसंबर से ब्रेक पर चल रही थी। मार्च में भारत में कोरोना शुरू हुआ तो उस वक्त मैंने सोचा कि मैं घर पर बैठकर क्या कर रही हूं, अगर हम जैसे लोग ऐसे वक्त पर घर पर बैठ जाएंगे, तो काम कौन करेगा। जिसके चलते मैंने कोरोना वायरस मरीजों के साथ काम करने का निर्णय लिया।

उन्होंने बताया कि 14 दिन के लिए हमारी ड्यूटी कोरोना वार्ड और फ्लू ओपीडी में रहती है। इस दौरान हम कोविड मरीजों का इलाज करते हैं। इस दौरान 14 दिन तक हम अपने घर नहीं जाते और होटलों में ठहरते हैं। 15 वें दिन हमारा कोविड टेस्ट होता है। अगर हमारी रिपोर्ट नेगेटिव आ जाती है तो हम 1 हफ्ते के लिए घर जा सकते हैं। जिससे कि हमारी बॉडी रिकवर कर सके।

उन्होंने बताया कि अगस्त में जब 15 दिन ड्यूटी खत्म होने के बाद मेरा कोविड टेस्ट हुआ तो मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। उन्होंने बताया कि मुझे कोरोना के लक्षण नहीं थे। 7 दिन तक मैं हॉस्पिटल में भर्ती रही, जब दोबारा टेस्ट हुआ तो मेरी रिपोर्ट नेगेटिव आई। जिसके बाद 14 दिन होम क्वॉरेंटाइन रखा गया। जिसके बाद दोबारा आइसोलेशन वार्ड में मैंने ड्यूटी ज्वाइन की और अब 2 महीने हो गए हैं मैं कोरोना मरीजों के साथ काम कर रही हूं।

डॉ राहुल सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि लोग अब कोरोना को लेकर बिल्कुल सामान्य हो गए हैं। यह अच्छी बात है कि हम सामान्य जीवन व्यतीत करें, लेकिन कोरोना से बचने के उपाय लगातार करते रहें। जिस तरह से देश के कुछ हिस्सों में लोग कोरोना को लेकर बिल्कुल निश्चिंत हो गए हैं। बिहार में चुनाव आ रहे हैं, लोगों को लग रहा है कि कोरोना खत्म हो गया है। बड़ी संख्या में चुनावी रैलियों में भीड़ जुट रही है। कोरोना पहले के मुकाबले और तेजी से फैल रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का अनुमान है कि फरवरी 2021 तक आधा भारत कोरोना से संक्रमित हो सकता है। जब हम कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात कर रहे हैं। कोरोना को रोक पाना अब बहुत मुश्किल हो गया है। बहुत तेजी से भारत में स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हुई हैं, लेकिन इससे यह स्पष्ट नहीं होता है कि लोग अब कोरोना से संक्रमित नहीं होंगे। लोगों को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना होगा।

उन्होंने कहा कि यह आजकल थर्मल स्क्रीनिंग को मजाक बना दिया गया है। महज औपचारिकता पूरी करने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि मास्क पहनने से हम कोरोना संक्रमण के खतरे को कम करते हैं, खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में मास्क सबसे बड़ा हथियार है। मास्क नाक से ऊपर पहन कर रखें। कोरोना वायरस के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा और यह तभी संभव होगा जब समाज के पढ़े-लिखे लोग अपनी जिम्मेदारी समझकर लोगों में जागरूकता फैलाएं।

डॉ राहुल सिंह ने कहा कि ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जिम्स) ने कोविड-19 से जुड़ी जानकारियां साझा करने, और इस संबंध में लोगों की भ्रांतियों को दूर करने के लिए एक हेल्प लाइन नंबर शुरू किया था।

कोरोना वायरस संक्रमण के मरीजों की देखभाल के मामले में हमारा संस्थान अग्रणीय रहा है। नोएडा में पहला मामला दर्ज होने के बाद से ही संस्थान कोविड-19 संक्रमित मरीजों की देखभाल कर रहा है।

हमारे संस्थान में एक बार 26 रोगियों को भर्ती किया गया है जिनमें से 13 रोगियों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने ‘डॉक्टर स्पीक जिम्स कोरोना हेल्पलाइन’ शुरू की है, जो चैबीसों घंटे काम करती है ।

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डॉ राहुल सिंह ने कहा कि आज देश ही नहीं पूरा विश्व कोरोना महामारी से ग्रस्त है। समय के साथ भले ही कोरोना संक्रमण का फैलाव कम हुआ है, लेकिन अभी तक यह खत्म नहीं हुआ है। जो लोग कोरोना को हल्के में ले रहे हैं, वो उनकी गलत सोच है।

जिन लोगों ने कोरोना बीमारी को मात दी है, उन लोगों ने भी अपने अनुभव सांझा करते हुए आमजन को यही संदेश दिया कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी बरतते हुए मास्क लगाने, हाथों की सफाई का ख्याल रखने और शारीरिक दूरी की पालना करके इस बीमारी से बचा जा सकता है।कोरोना को लेकर ज्यादा पेनिक होने की जरूरत नहीं ।

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