सद्विचार मंच एवं भागीरथी सेवा संस्थान ने ई गोष्ठी का किया आयोजन।

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मुख्य वक्ता श्री दीपक श्रीवास्तव ने” भारतीय संस्कृति के संबंध में वरिष्ठ जनों और युवाओं के मध्य संवाद” एवं दूसरे वक्ता श्री डॉ आशीष रोहतगी ने “आत्मनिर्भर भारत का निर्माण” विषय पर महत्वपूर्ण विचार रखे। दोनों ही वक्ता प्रखर प्रतिभा के धनी हैं तथा युवा हैं एवं वर्तमान में अनेक युवाओं को भी कुशल मार्गदर्शन दे रहे हैं।

ई गोष्ठी का संचालन प्रसिद्ध विद्वान् श्रीकृष्ण कुमार दीक्षित द्वारा किया गया।

श्री दीपक श्रीवास्तव ने अपने वक्तव्य में युवा वर्ग की समस्या रखते हुए कहा कि भारतीय परिवारों के युवा श्रीराम के बारे में तथा अपने धर्म के बारे में मूल बातों का तार्किक समाधान नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास के बिना वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को सार्थक नहीं किया जा सकता। हमारे पुराने ग्रंथों में विभिन्न प्रकार के विमान एवं प्रभावशाली अस्त्रों का वर्णन मिलता है किन्तु ईसा पूर्व के इतिहास में विमान तथा मोहनी अस्त्र जैसे चीजों का प्रयोग नहीं पाया जाता है जिससे लगता है कि लोग भारतीय विज्ञान से बहुत पहले ही दूर होने लगे थे। ऐसा क्या हुआ कि यह सब विद्याएं समाप्त हो गईं क्योंकि उस समय के विज्ञान एवं रक्षा तन्त्र पर किसी भी देश को गर्व होगा जो किसी भी बाहरी आक्रमणकारी की पूरी सेना को एक बाण में ही नष्ट कर सकते थे, फिर भी हम आक्रमणों से हारे। उन्होंने भाषा स्वर विज्ञान के बारे में भी बात कही। शमी के वृक्ष के औषधीय गुण बताएं यह भी कहा कि औषधीय गुण वाले पौधों को अध्यात्म से जोड़ा गया। भारत ने गणित में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा वर्ग की समस्या यह है कि वे अपने को भारत के पूर्व इतिहास से तथा वर्तमान विज्ञान से जोड़ नहीं पाते हैं। इसके लिए उन्हें मार्गदर्शन की अत्यंत आवश्यकता है। इस प्रकार उनका संभाषण विचारों को आंदोलित करने वाला तथा वर्तमान में नई सोच पैदा करने के संबंध में रहा।

प्रमुख राजनेता श्री बालेश्वर त्यागी जी ने भी अपने संभाषण में दुर्गा भाभी जो क्रांतिकारी रही हैं उनके बारे में बताया। वह किस प्रकार लाहौर से निकाले जाने के बाद गाजियाबाद रहीं।उन्होंने प्यारेलाल कन्या महाविद्यालय में अध्यापन भी किया। किस प्रकार उनकी सहायता के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री आदि भी आया करते थे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश शासन में जब वह मंत्री थे उस समय बाबरी मस्जिद की घटना हुई उस पर भी उन्होंने प्रकाश डाला। उन्होंने यह कहा कि वास्तव में हमें अपने इतिहास को राष्ट्र को नहीं भूलना चाहिए।

डॉ आशीष रोहतगी ने अपने वक्तव्य को पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पढ़ाई का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं होना चाहिए अपितु उद्यमिता होनी चाहिए। जिससे कि हम अपना उत्पादन एवं विक्रय संबंधी कार्य स्वयं कर सकें। स्कूल केवल रोबोट ही पैदा कर रहे हैं । छात्रों में उत्पादन क्षमता नहीं है।एमबीए पास करने वाले छात्र केवल नौकरी की सोचते हैं उद्यम की नहीं सोचते क्योंकि उन्हें वह कॉलेजों में सिखाया ही नहीं जाता। उन्होंने थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए कहा कि वे एक बिजनेसमैन थे उन्होंने सिस्टम की ताकत को सीखा जबकि उनसे पहले भी कुछ लोगों ने बल्ब का आविष्कार कर दिया था परंतु श्रेय श्री थॉमस अल्वा एडिसन को ही गया ।उन्होंने कहा कि भंडारा खिलाना अच्छा है परंतु उसकी अपेक्षा गरीब को खाना कमाने लायक बनाना ज्यादा अच्छा है। स्वयं रास्ता बनाना सिखाएं। समस्या के समाधान में बिजनेस मॉडल खड़ा करें ।उत्पादन सेल्स को बढ़ावा दें ।यह भी कहा कि बेरोजगार रहने से पकोड़े बेचने का रोजगार करना ज्यादा अच्छा है। जो लोग जीडीपी की बात करते हैं वे आलोचना करते समय यह नहीं समझते ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट केवल नौकरी पर निर्भर नहीं है अपितु उत्पादन एवं विक्रय पर आधारित है यदि युवा वर्ग उद्यम ही नहीं करेगा तो जीडीपी में क्या सहयोग देगा? उद्यमिता मूल्य निर्माण की कला और विज्ञान दोनों है। इस प्रकार डॉक्टर रोहतगी जी का भाषण वर्तमान युवा को वर्ग को नई दिशा देने वाला था तथा वर्तमान समय की पढ़ाई को भी आईना दिखाने वाला था।

इसके बाद डॉ रामशरण गौड़, श्री अवधेश कुमार सिंह ,श्री लल्लन प्रसाद, श्री रमानाथ पांडे, प्रोफेसर भूदेव शर्मा जी, श्री अशोक कुमार श्रीवास्तव ने भी अपने-अपने विचार रखे। यह वेबीनार युवा वर्ग के जुड़ जाने के कारण सद् विचार मंच की गोष्ठियों से कुछ अलग था तथा उपयोगी रहा।

श्री कृष्ण कुमार दीक्षित ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। श्री राजेंद्र नाथ पांडेय द्वारा प्रारंभ में वैदिक मंत्रों द्वारा मंगलाचरण किया गया तथा अंत में आभार प्रकट करते हुए की मीटिंग की समापन की घोषणा की गई।

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