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नेशनल लीडरशिप समिट में सकारात्मकता के आइकॉन पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा ने दी नई सोच

Ten News Network

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कौंसिल ऑफ रॉयल रूट्स ने नेशनल लीडरशिप समिट का आयोजन डॉ आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर नई दिल्ली में 23 अक्तूबर 2021 को किया । इस कार्यक्रम को पोज़िटिवित्टी इन्स्टिटूट ने सपोर्ट किया । इस कार्यक्रम का मीडिया पार्ट्नर टेन न्यूज़ रहा।

इस कार्यक्रम में कौंसिल ऑफ रॉयल रूट्स ,कारवाँ मिशन , नेशनल इंडियन स्टूडेंट्स एंड एलुमनी यूनियन , प्रेमास, भारतीय बुनकर एवं कारीगर संघ और कर्मा फाउंडेशन ने इस समिट को सफल बनाने में पूरा सहयोग दिया। इस समिट का अहम विषय सकारात्मकता बनाए रखना और उसे बढ़ावा देना था।

इस कार्यक्रम में गौतम बुद्ध नगर के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा ने सम्बोधित किया । उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी अतिथियों को आभार व्यक्त किया और साथ ही उन्होंने पाजिटिविटी पर कुछ बातें कही।

मुझे गर्व है कि मैं मोदी जी की सरकार के अंदर काम कर रहा हूं। और में खुद को भाग्यवान मानता हूं कि मैं एक प्रेरित नेता के साथ काम कर रहा हूं। और साथ ही उन्होंने कहा जब हम एक पानी का गिलास देखते है जो कि आधा पानी से भरा है और आधा खाली है। उस समय एक नकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति कहेगा आधा खाली ग्लास है और वही एक सकारात्मक सोच रखने वाला व्यक्ति कहेगा ग्लास आधा पानी से भरा है आधा हवा से। एक डॉ होने के नाते मैं कहूंगा पानी से ज्यादा हवा की कीमत है। हवा के बिना आप 3 मिनेट नही रह सकते। सकारात्मक सोच के साथ जब हम अपनी ज़िंदगी को जीना शुरू करते हैं। तब हम जान पाते हैं कि हम क्या हैं। हमारे पास भी देवतय शक्ति है।

पाजिटिविटी के साथ हम अपनी ताकत को क्रिएटिविटी के जोड़े

क्या सिखने के लिए आप एक सूखे पेड़ के टहनी को आप नही बो सकते लेकिन एक नई बेल को आप चाहो तो किसी भी डायरेक्शन में ले जा सकते हो।

हमे खुद से पूछना होगा क्या मैं खुद को बदलने की ताकत रखता हूँ। क्या मैं एक बेल की तरह खुद को किसी भी डायरेक्शन मैं ले जा सकता हूँ। या फिर एक सुखी लकड़ी की तरह एक जगह रुक जाना चाहता हूं।

सफलता और खुशी नदी के दो किनारे हैं अगर आप सफल हैं इसका मतलब ये नही की आप खुश भी हैं, लेकिन अगर आप खुश है तो एक दिन आप सफल जरूर हो जाएंगे।

एक पॉजिटिव सोच के साथ अगर हम आगे बढ़ जाए तो हम ज़िन्दगी में सब कुछ हासिल कर सकते है। आज हमारे देश को किसी चीज़ की जरूरत है वो है कल्पना जो कि सकारात्मक होनी बहुत जरूरी है।

सकारात्मक सोच और नकारात्मक सोच एक इत्र की बोटल की तरह है। जहाँ खुल जाए वह खुशबू फैला देगी। इसलिए यदि हम सकारात्मक सोच रहेंगे उसकी खुशबू हमारे पास से जरूर आएगी।

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