आईआईएमटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में फ़िनलैंड के प्रोफेसरों ने सिखाए शिक्षा के गुर

GREATER NOIDA TENNEWS REPORTER LOKESH GOSWAMI 

ग्रेटर नोएडा। फ़िनलैंड स्थित टुर्कु यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ मिक्को जुस्सी लाक्सोल ने कहा है कि फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली इलेक्ट्रॉरनिक लर्निंग और गेम्स  पर आधारित है। वहां बच्चोंय की रुचि और प्रतिभा के अनुरूप शिक्षा दी जाती है। उनको अपने विषय और तकनीक को चुनने की पूरी आजादी होती है। इसका सुखद परिणाम यह होता है कि वे अपना अध्य यन दिलो दिमाग से करते हैं और नतीजा भी उसी के अनुरूप देखने को मिलता है। प्रोफेसर लास्को  आईआईएमटी इंजीनियरिंग कॉलेज के सेमीनार हॉल में एजुकेशन टेक्नासलॉजी एंड ग्रीन आईसीटी विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्री य कार्यशाला में व्या‍ख्या न दे रहे थे।
लगभग 90 से अधिक देशों के छात्रों को संबोधित कर चुके प्रोफेसर लाक्सोव ने आईआईएम टी के छात्रों का आह्वान किया कि वे अपने थोड़े से प्रयास से अपने लर्निंग प्रोसेस को सुधार सकते हैं। उन्होंवने छात्रों को इस बाबत अनेक टिप्सन भी दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया की हमें परंपरागत शिक्षा की जगह छात्रों की पसंद के अनुसार ही पाठद्यक्रमों को पढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व  में ई  वेस्टेज एवं ई कचरा एक बहुत बड़ी समस्या है।  एइसके बारे मे हमें गंभीरता से सोचना चाहिए और इसका निष्पाटदन इस तरह से किया जाए कि प्रदूषण की समस्यां से निपटा जा सके।  उन्होंने भारत की संस्कृयतिए भोजन और यहां के स्था नीय खेलों की उन्मुक्त  कंठ से प्रशंसा की।प्रोफेसर डॉ राजीव कुमार कंठ ने कहा कि कक्षाओं में सभी छात्रों की सीखने की क्षमता सामान नहीं होती। अतः छात्रों को ध्यान में रखकर ही उनको अध्ययन कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों का मस्तिष्क कंप्यूटर से भी ज्या दा तेज होता है। उसे रचनात्म कता से जोड़ना चाहिए। इसके पहले प्रोफेसर डॉ मिक्को जुस्सीक लाक्सोए और प्रोफेसर राजीव कुमार कंठ का स्वागत निदेशक डॉ  राहुल गोयल और डॉ डी आर सोमशेखर ने किया।  इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डॉ डी आर सोमशेखर ने कहा कि एजुकेशन सिसिस्टम को अधिक लचीला एवं सक्रिय होना चाहिए और छात्रों मे हमेशा सीखने की ललक होनी चाहिए। 
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