जेपी हॉस्पिटल में 1 साल में 100 से अधिक लिवर एवं किडनी ट्रांसप्लांट

GREATER NOIDA TENNEWS REPORTER LOKESH GOSWAMI 2

दिल्ली-एन.सी.आर. में अग्रणी एवं उत्तर भारत में प्रमुख स्थान रखने वाले, नोएडा स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थान जेपी हॉस्पिटल ने केवल एक वर्ष में 100 से अधिक लिवर एवं किडनी का सफल प्रत्यारोपण कर एक अद्भुत और गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जेपी हॉस्पिटल का शुभारंभ साल 2014 में हुआ था और हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट की शुरुआत साल 2015 में की गई थी और सिर्फ 1 साल के अंदर ही जेपी हॉस्पिटल ने 107 सफल लिवर एवं किडनी प्रत्यारोपण कर नई उपलब्धि हासिल की। सबसे खास बात यह है कि दिल्ली-एन.सी.आर. में जेपी हॉस्पिटल में अंगों का प्रत्यारोपण बहुत ही उचित कीमत पर किया जाता है।

जेपी हॉस्पिटल के सी.ई.ओ. डॉ. मनोज लूथरा ने लिवर एवं किडनी विभाग के सभी चिकित्सकों को बधाई दी और कहा,सैकड़ों रोगियों को एक नई जिंदगी प्रदान करने वाला यह एक महान कार्य है जिसके लिए लिवर एवं किडनी विभाग के सभी चिकित्सक बधाई के पात्र हैं। चिकित्सकों के विशाल अनुभव के कारण ही जेपी हॉस्पिटल को यह सफलता हासिल हो पाई। इस हॉस्पिटल की उच्चस्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं एवं तकनीकों के प्रति लोगों के अटूट विश्वास का ही परिणाम है कि सिर्फ 2 वर्षों में इस हॉस्पिटल में 2 लाख से अधिक रोगी अपना इलाज कराने आ चुके हैं। हमें आशा है कि आने वाले समय में हम अन्य क्षेत्रों में ऐसी ही महान उपलब्धि हासिल करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि जेपी हॉस्पिटल के लिवर एवं किडनी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने अंगों के प्रत्यारोपण से संबंधित कई अनोखी उपलब्धि हासिल की है और एबीओ इंकंपैटिबल ट्रांसप्लांटेशनद्वारा दो भिन्न ब्लड ग्रुपों के बीच लिवर एवं किडनी प्रत्यारोपण की सफल सर्जरी उनमें से एक है।  

इस बड़ी उपलब्धि पर वरिष्ठ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अभिदीप चौधरी ने कहा,  “भारत में हर साल 30,000 रोगियों को लिवर ट्रासंप्लांट की जरूरत होती है लेकिन वर्तमान में केवल 1,800 ट्रांसप्लांट ही हो पा रहे हैं। लिवर सिरोसिस होने का मुख्य कारण शराब है। भारत में 40% लोग सिरोसिस की वजह से लिवर की बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं और उनकी मृत्यु हो रही है। इसी तरह लिवर को बीमार बनाने के अनेक कारणों में दूसरा सबसे बड़ा कारण हेपेटाइटिस-सीका संक्रमित (काला-पीलिया) होना भी है जो उत्तरी भारत में अधिक देखने को मिलता है।

इसी विभाग के दूसरे वरिष्ठ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. के. आर. वासुदेवन ने आगे बताया,  “क्रोनिक लिवर संबंधित बीमारी होने का तीसरा मुख्य कारण लिवर का फैटी होना है। एक आंकडे के अनुसार हर 6 में से 1 व्यक्ति फैटी लिवर का शिकार है और इस आंकड़े में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

जेपी हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमित देवड़ा के अनुसार,भारत में हर साल करीब 20,000 लोगों की किडनी खराब होती है जिनमें से करीब 5,000 मरीजों को नई जिंदगी प्रदान की जा सकती है लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। जब किडनी की कार्यक्षमता केवल 10 प्रतिशत रह जाती है तो उस अवस्था को किडनी फैल्योर कहते हैं और ऐसे में मरीजों के पास सिर्फ डायलिसिस या प्रत्यारोपण ही केवल एक रास्ता बच जाता है।

जेपी हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने क्रोनिक किडनी बीमारी के बारे में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की, “वर्तमान का चिकित्सकीय अध्ययन यह बताता है कि मोटापे से न सिर्फ लोगों को मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप की बीमारी होती है बल्कि किडनी से जुड़ी कई बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

यह हॉस्पिटल 25 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। हॉस्पिटल की योजना और डिज़ाइन 1200 बेड्स से युक्त टर्शरी केयर स्पेशलिटी सुविधा के रूप में तैयार की गई है। प्रथम चरण में 525 बेड्स के साथ इसकी सफल शुरुआत हो चुकी है।

जेपी हॉस्पिटल के बारे में-

नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल जेपी ग्रुप की एक प्रमुख ईकाई है। जिसकी शुरुआत स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महान इरादों के साथ की गई है।  जेपी ग्रुप करोड़ों लोगों को उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्तापूर्ण एवं समर्पित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी महान उद्देश्य से जेपी हॉस्पिटल का निर्माण हुआ है। जेपी हॉस्पिटल भारत के प्रख्यात चिकित्सक, उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं, नवीनतम नैदानिक सेवाएं, अत्याधुनिक आधारिक संरचना एवं तकनीक से सुसज्जित जेपी हॉस्पिटल विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने में पूर्णतया सक्षम है।

जेपी हॉस्पिटल अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, नैदानिक सेवाओं एवं आधुनिक तकनीकों से युक्त सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल है, जो आम जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करता है। हॉस्पिटल की योजना, डिज़ाइन एवं निर्माण कार्य इसे भारत के कुछ ही गोल्ड लीड प्रमाणित हॉस्पिटल इमारतों में शामिल करते हैं।

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