लाॅकडाउन में ढील देना सबसे बडी गलती, दोबारा की जाए सख्ती, टेन न्यूज से बोले नाॅर्थ वेस्ट दिल्ली के सांसद हंसराज हंस

Abhishek Sharma

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देश में कोरोना का कहर लगातार जारी है। दिन प्रतिदिन मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है, जो कि हर किसी के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर है। वहीं दूसरी और दिल्ली में भी लगातार कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली में 31 जुलाई तक साढे 5 लाख लोगों के संक्रमित होने की उम्मीद जताई जा रही है। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार व सांसद हर संभव कोशिश कर रहे हैं। आज अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी यह फैसला लिया गया है कि दिल्ली में दोगुने टेस्ट किए जाएं।

वही लॉकडाउन के दौर में कई गरीब मजदूरों का रोजगार छिन गया है, उनको दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए हैं। इस बीच दिल्ली के सांसद होने गरीबों तक खूब मदद पहुंचाई और नॉर्थ वेस्ट दिल्ली के सांसद हंस राज हंस ने लॉकडाउन के दौर में गरीबों को खाना सूखा राशन एवं आर्थिक सहयोग दिया।

बीजेपी के सांसद एवं मशहूर सिंगर हंसराज हंस टेन न्यूज़ के लाइव कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने कोरोना से निपटने के लिए ‘एक मुलाकात हंसराज हंस के साथ’ कार्यक्रम में रणनीति पर भी विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन राघव मल्होत्रा ने बहुत बखूबी किया।

कार्यक्रम में सांसद हंसराज हंस ने कहा कि मेरी मालिक से यही दुआ है कि हमारे देश के नौजवान काफी समय तक युवा रहें। हमें कोरोना से डरना नहीं लड़ना है। अभी युवा शक्ति ने काफी मेहनत की है। मेरी सारी टीम में युवा लोग ही थे। सभी लोग इस टाइम लंगर पहुंचाते थे, खाना पहुंचाते थे। पूरे हिंदुस्तान में ऐसा हुआ है।

उन्होंने कहा कि यहां छतरपुर में बाबाजी के दरबार से लंगर आता था। वैसे तो सारे हिंदुस्तान को वो खाना खिलाते थे। लेकिन मेरे चुनावी क्षेत्र में भी वहीं से खाना आता था। हम रात-दिन सेवा में लगे रहते थे। मुझे लगता है जो लोगों की मदद कर सकते हैं उन्हें अपना फर्ज जरूर अदा करना चाहिए ।

हंस हंसराज हंस ने बताया कि वे मुश्किल की घड़ी में लोगों की हर संभव मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा- जब लॉकडाउन अनाउंस हुआ तो बहुत से लोगों को खाने के लाले पड़ गए। मैंने खुद गरीबी देखी है, मुझे पता है गरीबी क्या है। जो रोज चूल्हा जलाते थे तो उनके लिए हमारे पीएम ने कहा था कि कोशिश करें तुम्हारे चुनाव क्षेत्र में कोई भूखा ना रहें। मेरी कोशिश थी कि लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग दोनों का पालन किया जाए।

हंसराज हंस ने बताया कि मेरा जन्म पंजाब के छोटे से गांव सफीपुर में हुआ था। यहां हमारे घर भी मिट्टी के बने हुए थे। उन दिनों गांव में रास्ता नहीं था, बिजली नहीं थी। उस दौर में कोई समझाने वाला नहीं था, बस मालिक की कृपा से संगीत में लगन लग गई थी या फिर यूं कहें कि संगीत ही किस्मत में लिखा था। इसके बाद राजनीति जिंदगी से जुड़ गई। उन्होंने कहा कि मैंने जितने भी गाने गाए हैं उसमें मोहब्बत को सपोर्ट किया है। मैंने हमेशा संदेश दिया है ‘नो ड्रग्स , नो वाॅर।’

उन्होंने अपनी बायोग्राफी के बारे में बताया हमारे पंजाब की बेटी हैं प्रीतिंदर कौर ढिल्लों। उन्होंने मुझे गांव में नंगे पैर फकीर के वेश में चलता हुआ देखा था। उन्होंने कई बार मुझे देखा और महसूस किया और मेरी बायोग्राफी लिखने का निश्चय किया। उन्होंने कहा कि मेरी बायोग्राफी कोई और लिखता तो मेरी बायोग्राफी के साथ जस्टिस नहीं होता। लेकिन उन्होंने बहुत शिद्दत से महसूस किया, उसको कलम के जरिए रूप दिया। मेरे लिए यह एक दस्तावेज है जो मैंने काम किया है उसको पेपर के जरिए सहेज लिया गया है।

सांसदीय क्षेत्र में लाॅकडाउन के दौरान चुनौतियां

उन्होंने कहा हमने लॉकडाउन के दौरान लगातार कोई भूखा ना सोए अभियान चलाया था। रोज दो टाइम गरीबों में खाना जाता था। अभी कुछ दिनों पहले लंगर रोक देने को कहा गया। इन दिनों मैं बहुत तकलीफ में हूं। इतनी यह जो ढील दे दी गई, शराब खाने खोल दिए गए, फिर सब चीजें खोल दी गई। तो उस वजह से कोरोना के मरीज बहुत बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में अब बेहद खौफनाक मंजर आया है। मैं क्षेत्र के लिए और दिल्ली के लिए और हिंदुस्तान के लिए पूरी दुनिया के लिए प्रार्थना करता हूं कि भगवान सबकी रक्षा करें।

दिल्ली में कोरोना मरीजों के लिए व्यवस्था पर प्रतिक्रिया

उन्होंने कहा कि जब देश में कोरोना के केस मिलने शुरू हुए थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को लॉकडाउन किया था, जो कि एक बेहद समझदारी वाला फैसला था। लेकिन अचानक सबको अर्थव्यवस्था की चिंता होने लगी और लॉकडाउन में ढील दे दी गई। जिसके चलते बड़ी संख्या में संक्रमित मिलने लगे। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में ढील अभी नहीं देनी चाहिए थी। केजरीवाल ने लॉकडाउन में ढील देकर दिल्ली को इस हालात में ला खड़ा कर दिया है कि रोजाना 50-60 मौतें हो रही हैं, कई हजार मरीज रोजाना सामने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मेरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह है कि देश का कंट्रोल अपने हाथ में लें और सभी मुख्यमंत्रियों को ढील ना देने के आदेश जारी करें। पूरी दुनिया में कोरोना से लड़ने के लिए नरेंद्र मोदी जी की सराहना हुई है। अमेरिका, स्पेन, ब्राजीलियन सबने हिंदुस्तान की तारीफ की है। इतनी मेहनत ऐसे ही बर्बाद ना चली जाए। देश में फिर से जल्दी से जल्दी लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए।

दिल्ली में कम टेस्टिंग पर बोले

उन्होंने कहा कि जब कोरोना शुरु हुआ था तो दिल्ली के मुख्यमंत्री टीवी पर बैठकर बहुत भाषण दे रहे थे कि कोरोना से निपटने के लिए हमारी पूरी तैयारियां हैं। उन्होंने कहा मई में ज्यादा टेस्टिंग हुई हैं लेकिन जून में टेस्टिंग का आंकड़ा घट गया है। जबकि बड़े पैमाने पर लोगों के टेस्ट किए जाने चाहिए थे। केजरीवाल बिना काम किए टीवी पर बैठकर क्रेडिट लेना चाहते हैं। कोरोना को रोकने के मामले में मुख्यमंत्री पूरी तरह से फेल हो गए हैं। लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ ना किया जाए। अस्पतालों की व्यवस्था और अच्छी की जाए।

प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के महंगे इलाज पर दी प्रतिक्रिया

उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में लोगों के जीवन को बचाने के लिए अस्पतालों को आगे आना चाहिए, लेकिन ऐसे में उल्टा हो रहा है। एक मरीज से इलाज के लिए ₹500000 जमा कराए जा रहे हैं। जबकि ऐसे दौर में प्राइवेट अस्पतालों को आगे आकर कोरोना का इलाज फ्री में करना चाहिए। जिसके पास रोटी खाने के लिए पैसे नहीं है वह कहां से ₹500000 देगा। मेरा सभी प्राइवेट अस्पतालों के मालिकों से निवेदन हैं कि ऐसे दौर में देश का साथ दें, देश को लूटे नहीं।

केजरीवाल को दी सलाह

उन्होंने केजरीवाल को सलाह देते हुए कहा कि जितनी भोली और मासूम केजरीवाल की शक्ल है , वह कोरोना के दौर में ‘एक्सपोज’ ना हो जाए, इसलिए दिल्ली के लोगों की हर संभव मदद करें और सभी का इलाज मुफ्त में कराएं।

देशवासियों के लिए संदेश

मैं सभी देशवासियों को यही कहना चाहूंगा कि पैनिक ना हों, जो डॉक्टर सलाह दे रहे हैं, उस पर गौर करें। रोज हेल्थ बुलेटिन सुने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें। उन्होंने कहा, ‘सवारियां समान की खुद जिम्मेदार हैं’, इसलिए सभी लोग अपनी जिंदगी खुद बचा सकते हैं। घरों में रहो, कोई बहुत ही ज्यादा जरूरी काम हो तो ही घर से बाहर निकले।

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