मोदी सरकार के सौ दिन : श्रवण कुमार शर्मा

किसी भी सरकार के कार्य का मूल्यांकन करने के लिए सौ दिन की अवधि बहुत कम है,फिर भी मीडिया के हर अंग और हर पत्रकार ने `ना ना` करते हुए भी इस छोटी अवधि के कार्य का विश्लेषण अवश्य किया है.कुछ पत्रकारों की राय उनके पूर्व के दृष्टिकोणों पर आधारित है और वे स्वयं को बदलने में असफल रहे हैं ,वही अधिकांश टीवी चैनल और जागरूक लोगो और सामान्य जनता ने मोदी सरकार के कार्य के प्रति सकरात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया व्यक्त की है.मोदी सरकार की प्रथम परीक्षा महंगाई को लेकर हुई’ जिसमें यह सरकार कामयाब रही.राज्य सरकारों द्वारा बहुत अधिक सहयोग ना देने के बावजूद केंद्र सरकार आलू और प्याज के दामों को नियंत्रित करने में सफल रही है.सरकार की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है केद्र के सचिवालय की कार्य संस्कृति में सुधार,इसे किसी स्केल से नापा नहीं जा सकता.अनेक पत्रकारों को इस बात की बड़ी चिंता है कि निर्णय लेने के सारे अधिकार पीऐमो या प्रधानमंत्री में केंद्रित हो गये हैं, पर वे भूल जाते हैं कि लोगो ने एक प्रभावी और निर्णय लेने वाली सरकार के लिए मतदान किया है और लोग त्वरित परिणाम चाहते हैं.लोगों ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विश्वाश व्यक्त किया है और वे चाहते हैं कि वे निर्णय लें और देश की समस्याओं को हल करें.विदेश नीति के मामलों में मोदी सरकार का कार्य अभूतपूर्व रहा है.उनकी भूटान, नेपाल और जापान यात्रों से उन देशों में भारत के प्रति विश्वास बढ़ा है और देश के लोगों को भी लगा है कि अब उनके पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जिसके नेतृतव में वे देश के भविष्य के बारे में आश्वस्त महसूस कर सकते हैं.शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्होंने जिस प्रकार स्कूली बच्चों के सवालों के उत्तर दिए उसीसे आशाएं जग रही हैं कि देश के क्षितिज पर नये नेतुत्व का उदय हो चुका है और पुराने नेताओ और ढोंगी राजनीति के दिन समाप्त हो चुके हैं.

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