ग्रेटर नोएडा : नेफोवा संस्था ने यूपी रेरा की कार्यशैली में बदलाव के लिए लिखा पत्र

ABHISHEK SHARMA

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की नेफोवा संस्था ने बिल्डर की लापरवाही और यूपी रेरा के कार्यशैली में अपेक्षित बदलाव के लिए रेरा के चेयरमेन को पत्र लिखा है। संस्था के अध्यक्ष अभिषेक कुमार का कहना है कि उत्तर प्रदेश रेरा शिकायतों को तेजी से निपटा रही है। रेरा का बेंच कोर्ट हो या फिर कॉंसिलिएशन फोरम, घर खरीदारों के पक्ष में अच्छे फैसले दे रही है।

उन्होंने कहा कि कई बिल्डर रेरा के फैसले नहीं मान रहे, इस बात से आप भी रेरा रखता हैं। रेरा ने इस सम्बन्ध में टॉप 25 डिफॉल्टर बिल्डरों से मीटिंग भी की है। इस मीटिंग में भी कुछ बिल्डर ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। उन्होंने कहा कि हम कुछ बिंदुओं को रखना चाहेंगे जिन पर रेरा का संज्ञान अपेक्षित है, जिससे लोगों में रेरा के प्रति विश्वास और सुदृढ़ हो।

उन्होंने कहा, अभी भी बिल्डर रेरा के आदेश के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित नहीं कर रहे। बिल्डरों का रेरा के प्रति भी वही टालने वाला रवैया है जैसा आम घर खरीदारों के प्रति है। रेरा में कब्ज़ा देने की तिथि के नाम पर बिल्डर कुछ भी बोल देता है और समय आने पर फिर से कहता है अभी और समय लगेगा। ऐसे में रेरा के आदेश का अनुपालन ना करने पर बिल्डरों के ऊपर रेरा के सेक्शन-63 की कड़ी कार्यवाही के बदले बिल्डरों को बुला कर मीटिंग करना कहाँ तक जायज है?

रेरा के आदेश का अनुपालन ना करने की स्थिति में घर खरीदार की शिकायत पर सीधे सीधे रेरा के सेक्शन-63 की कार्यवाही सुनिश्चित करें, बिल्डर अपने आप आपके पास आएगा और आपके आदेश का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि प्रायः देखा गया है रेरा की तरफ से बिल्डर को पैसे वापसी के आदेश के मामले में बिल्डर कोई कार्यवाही नहीं करता और मामला अटका रहता है। ऐसे में पैसे वापसी के मामले में शीघ्र क्रियान्वन शिकायतकर्ता को काफी बड़ी राहत प्रदान करेगा।

देखा गया है कि रेरा के कुछ फैसले में शिकायतकर्ता को बहुत बढ़िया विलम्ब शुल्क का आदेश दिया गया तो अन्य मामले में बिल्डरों को राहत देते हुए। विभिन्न घर खरीदारों से प्राप्त शिकायतों के अनुसार कुछ फैसलों में MCLR से कहीं अधिक दर से विलम्ब शुल्क का आदेश दिया गया है तो कुछ मामलों में MCLR के दर से बहुत कम (बिल्डर के BBA के अनुसार) रेरा से अनुरोध है कि कृपया सभी शिकायतकर्ता को रेरा नियमों के अनुसार – MCLR दर से ही विलम्ब शुल्क मिलना सुनिश्चित करें।

रेरा को सरकार ने कोर्ट का दर्जा दिया है। आपसे अनुरोध है कि जैसे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट किसी चर्चित मामले से स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही करती है वैसे ही रेरा भी चर्चित मामलों में स्वतः संज्ञान ले कर कार्यवाही कर आदेश पारित करे। उदहारण के लिए पैरामाउंट प्रॉपबिल्ड नामक बिल्डर घर खरीदारों को घर की रजिस्ट्री कराने के बाद भी कब्जा देने में अप्रत्याशित विलम्ब करता है।

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