कमिश्नर प्रणाली : तो अब गौतमबुद्धनगर में डीएम से छीनेंगे ये अधिकार? पढ़ें पूरी खबर

ABHISHEK SHARMA

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Greater Noida : उत्तर प्रदेश की कैबिनेट बैठक 13 जनवरी को यूपी में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई नई व्यवस्था के तहत सुजीत पांडेय को लखनऊ का पुलिस कमिश्नर और आलोक सिंह को नोएडा का पुलिस कमिश्नर बना दिया गया है। जिसके तहत आलोक सिंह ने आज नोएडा के पहले कमिश्नर के तौर पर चार्ज संभाला।

उधर इस बड़े बदलाव के बाद लखनऊ के सत्ता के गालियारों में नई व्यवस्था के तहत आईएएस और आईपीएस अफसरों के अधिकारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सरकार के इस फैसले के बाद डीजीपी ओपी सिंह से लेकर पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह, पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता और पूर्व डीजीपी बृजलाल समेत की आईपीएस अधिकारियों ने इसका स्वागत किया है।

वहीं डीजीपी ओपी सिंह ने इस मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी है।  ओपी सिंह ने कहा है कि नई व्यवस्था में चेन आफ कमांड के कम होने से बहुत हद तक कानून व्यवस्था न सिर्फ बेहतर होगी बल्कि पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो जाएगी। कानूनी भाषा में समझें तो सीआरपीसी की मैजिस्ट्रियल पावर वाली कार्रवाई अब तक जिला प्रशासन के अफसरों के पास थी, वह अब पुलिस कमिश्नर को मिल जाएगी।

सीआरपीसी की धारा 107-16, 144, 109, 110, 145 का क्रियान्वयन पुलिस कमिश्नर कर सकेंगे। कमिश्नर सिस्टम से शहरी इलाकों में भी अतिक्रमण पर अंकुश लगेगा। अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाने का आदेश सीधे तौर पर कमिश्नर दे सकेगा और नगर निगम को इस पर अमल करना होगा। पुलिस कमिश्नर को गैंगस्टर, जिला बदर, असलहा लाइसेंस देने जैसे अधिकार होंगे। अभी तक ये सभी अधिकार जिलाधिकारी के पास थे।

कमिश्नरी सिस्टम में धरना प्रदर्शन की अनुमति देना और न देना भी पुलिस के हाथों में आ जाएगा। जमीन संबंधी विवादों के निस्तारण में भी पुलिस को अधिकार मिलेगा। पुलिस कमिश्नर सीधे लेखपाल को पैमाइश का आदेश दे सकता है। कानूनविदों की मानें तो इससे जमीन से संबंधित विवाद का निस्तारण जल्दी होगा।

दंगे के दौरान लाठीचार्ज होना चाहिए या नहीं, अगर बल प्रयोग हो रहा है तो कितना बल प्रयोग किया जाएगा इसका निर्णय भी पुलिस ही करेगी, अब तक यह फैसला जिला प्रशासन के पास होता था।

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