सुशासन दिवस मनाना पर्याप्त नहीं है , सुशासन लाना होगा—-श्रवण कुमार शर्मा

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दिनांक  २५ दिसम्बर को  सुशासन दिवस के रूप में मनाया  गया ,कुछ लोगों को आपति हुई कि क्रिसमस   के पर्व पर  सुशासन दिवस मना कर परम्परागत  रूप से ईसाई  लोगों द्वारा  मनाएं जाने वाले उत्सव को फीका  करने की कोशिश की गयी . हम इस धारणा से सहमत नहीं हैं , एक दिन में कई काम किए जा सकते हैं, क्रिसमस भी मना सकतें हैं और अटलजी का जन्म दिवस भी . अनेक लोगों के जन्म दिन होंगे  और अनेक  लोगों की शादी  की वर्ष गांठ  भी हो सकती है, सब साथ साथ मनाने से तो हर्ष बढ़ता है,ऐसी चिढ दिखाना  तो  आपके complex को  शो करता है.खैर , यह हमारा  विषय  नहीं है. हमारा  कथन है कि सुशासन की बात करने से अधिक  सुशासन लाना बड़ा कार्य है. मोदी सरकार ने इस दिशा में  पिछले  कुछ महीनों मै यद्यपि अनेक अनेक प्रयास  कियें हैं , पर वे symbolic  ही  हैं, व्यवस्था  पर उनका  स्थाई  प्रभाव  आना कठिन है.देश में सुशासन का सबसे बड़ा शत्रु भ्रष्टाचार है ,यद्यपि  मोदीजी की व्यक्तिगत निगरानी  के कारण  केंद्र में भ्रष्टाचार का कोई मामला अभी तक सामने नहीं आया है,पर मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार को समाप्त  या कम करने  की  कोई बड़ी पहल भी नहीं की है .केंद्र और राज्यों   के स्तर  पर बड़े २  राज नेताओं  और उच्च अधिकारीयों द्वारा किए गये जग जाहिर  मामलों को रहस्यमयी तरीके से भुला दिया लगता है .ज्ञात भ्रष्ट  पूंजीपतियों  और मिडिया  houses के विरुद्ध  कोई कार्यवाही  नहीं की जा रही है , न इरादा लगता  है .राज्यों में विभिन्न विभागों और प्राधिकरणों   में  भ्रष्टाचार बदतुस्तूर  जारी है,लोकपाल  और लोकायुक्त  और कार्य की समय सीमा तथा जवाबदेही के विधेयकों  का क्या हुआ , कुछ  पता  नहीं , चिन्ता  है तो बीमा विधेयक और Land Acquisition Act मै परिवर्तन  लाने की है, आम आदमी  राज्यों  मै भ्रष्टाचार से कराह रहा है ,उसकी चिन्ता कर  लीजिए  समय से . दूसरा  मुद्दा  सुशासन  लाने का  है अपराध  नियंत्रण,कुछ  किया है इस मामले मै  नई सरकार ने , शायद नही? पुलिस  व्यवस्था  सड चुकी है, बेहद भरष्ट है, FIR भी  दर्ज  नहीं होती  है ,थाने बेलगाम है . क्या गृह  मंत्रालय   इन ६ महीनो  मै कोई योजना बना सका है या  इतना कहना प्रयाप्त है कि यह राज्यों  का विषय है .दिल्ली की सरकार  तो आपके अधीन है ,क्या किया आपने सुशासन के लिए?एक  कनिष्ठ  अधिकारी  या पुलिस के दरोगा को भी आप सस्पैंड  करने का कष्ट  या अप्रिय  कार्य करने का साहस आप नहीं  कर पाए . क्या दिल्ली में पूर्ण राम राज्य है?सुशासन का अहसास  कैसे  होगा  नागरिकों  को ?अब समय  emotional issues को  कुर दते रहने का नहीं  बचा  है , जिसमें  पक्ष  और  विपक्ष  दोनों पूरे मनोयोग  से लगें हैं , सुशासन के लिए ठोस रूप से कुछ  करने का है.

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