एक्यूरेट ने 70 साल की आज़ादी को याद किया.

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भारत सर्कार के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय विभाग ऐ आई सी टी इ  के निर्देशानुसार सम्पूर्ण शिक्षक एवं छात्र समूह ने 70  साल की आज़ादी एवं 75 साल पुराने भारत छोडो आंदोलन को याद किया । अति सुबह प्राप्त हुए सरकारी निर्देश के अनुसार सभी छात्र एवं शिक्षकगणों ने भारत को भ्रस्टाचार मुक्त, गरीबी मुक्त, जातिवाद मुक्त एवं भेदभाव मुक्त करने की शपथ ली ।

संस्थान ने सभी को शपथ से जोड़ने के इंतेज़ाम किये और सन्देश सभी विभागों तक तीव्रगति से प्रसारित किया गया । कक्षा के मध्य अंतराल में सभी छात्र एवं शिक्षक जोश उल्लास के साथ शपथ लेने के लिए साथ खड़े हुए । सभी ने शपथ को अपने सहपाठियों एवं गुरुजनों के साथ दोहराया । इस अवसर पर संस्थान के एडमिशन विभाग के डायरेक्टर डॉ. संदीप शर्मा ने लोगों को 70 साल पहले मिली आज़ादी में हुए संघर्ष के बारे में लोगों को बताया । उन्होंने बताया की किस तरह सब धर्म और जाति के लोगों ने एक साथ खड़े होकर आज़ादी का आह्वाहन किया । कितने लोगों को इस प्रयास में लाठियां खानी पड़ी और किस किसने अपने प्राण गवाए ।

संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजीव भारद्वाज ने लोगों को भारत छोड़ो आंदोलन के बारे में विस्तार से बताया । उन्होंने बताया की 75 वर्ष पूर्व जब हममे से कोई भी पैदा भी नहीं हुआ था हमारे पुरखों ने अंग्रेजों को भारत से बाहर खदेड़ने का प्रण किया । अँगरेज़ सरकार की भेदभाव पूर्ण नीतियों के कारण भारतीय जनता को जुल्मों का शिकार होना पड़ा । उन्होंने बताया की किस तरह अंग्रेज़ों ने भारतियों से जानवरों के जैसा बर्ताव किया जिसके फलस्वरूप जनता त्राहि त्राहि कर उठी और उसने एक स्वर में महात्मा गाँधी के नेतृत्व में अंग्रेज़ों भारत छोडो का नारा बुलंद किया ।

संस्थान की समूह निदेशिका सुश्री पूनम शर्मा ने बताया की जिस आज़ादी को हमने इतने संघर्षों से प्राप्त किया है उसकी कदर करनी चाहिये । आज़ादी का असली महत्व  सिर्फ वही लोग सही मायनों में जानते हैं जिन्होंने गुलामी भरा जीवन जिया हो । उन्होंने कहा की हमें अपने महापुरुषों का हृदय से शुक्रगुज़ार होना चाहिये जिनकी वजह से हम आज़ादी भरा जीवन जी रहे हैं ।

संस्थान के प्रोफेसर श्री हरीश कुमार के अनुसार हम सच्चे मायनों में तब ही आज़ाद होंगे जब हम भेदभाव , जातिवाद , एवं गरीबी से मुक्त भारत का निर्माण कर सकें और इसके लिए हम सबको मिलकर प्रयास करना चाहिये ।

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