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जेवर हवाई अड्डे के लिए 1,334 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित होने पर मुख्यमंत्री ने जताई खुशी, बोले प्रधानमंत्री मोदी का सपना होगा साकार

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लखनऊ, 31 जुलाई: दुनिया के विशालतम हवाईअड्डों में से एक “नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, जेवर” के निर्माण का काम जल्द ही शुरू होने जा रहा है। शनिवार का दिन इस लिहाज से बेहद खास रहा, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में जेवर एयरपोर्ट के लिए राज्य सरकार की ज्वाइंट वेंचर कम्पनी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एनआईएएल) एवं विकासकर्ता ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की एसपीवी, यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रा.लि. के बीच लाइसेंस मेमोरेंडम हस्ताक्षरित हुए। अब जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस एयरपोर्ट का शिलान्यास संभावित है, जिसके बाद एयरपोर्ट निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

शनिवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह एयरपोर्ट प्रदेश के उस क्षेत्र में है, जहां आए दिन विवाद होते थे।कुप्रबंधन के कारण कई बड़ी घटनाएं घटीं। लेकिन राज्य सरकार ने जेवर एयरपोर्ट परियोजना के अंतर्गत आने वाले सभी गांव के किसानों से संवाद किया-समन्वय बनाया, अंततः परियोजना के पहले फेज के लिए निर्धारित 1,334 हेक्टेयर भूमि बिना किसी विवाद के अधिग्रहीत हुई।

सीएम ने कहा कि एविएशन सेक्टर अतीव संभावनाओं वाला क्षेत्र है। यह रोजगार पैदा करने का माध्यम भी है और आर्थिक समृद्धि का साधन भी। जेवर एयरपोर्ट की स्थापना से उत्तर प्रदेश में औद्योगिक अवस्थापना का संरचनात्मक विकास होगा, जिससे रोजगार एवं निवेश के अवसर बढ़ेंगे। विनिर्माण एवं निर्यात को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ हवाई यातायात सुगम होगा। इससे पर्यटन के क्षेत्र में भी अप्रत्याशित वृद्धि की संभावना है। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी की दिशा में भी काम चल रहा है। इसके लिए एयरपोर्ट को हाईस्पीड रेल से जोड़े जाने, इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा जोड़े जाने तथा मेट्रो रेल से जोड़े जाने की कार्यवाही चल रही है। योगी ने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार से साइट क्लीयरेंस प्राप्त करना हो या गृह मंत्रालय से इमीग्रेशन सर्विसेज के लिए अनुमोदन अथवा पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी लेनी हो सारे कार्य समयबद्ध रूप से पूरे हुए हैं। निश्चित रूप से आगे के काम भी तय समयसीमा के भीतर शुरू हो जाएंगे।

समयबद्घ ढंग से पूरी हो रही अब तक सारी प्रक्रिया:
सीएम ने कोरोना महामारी के बीच भी जेवर एयरपोर्ट का कार्य समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई चप्पल पहने व्यक्ति के हवाई सफर का जो सपना देखा था, अब वह साकार हो रहा है। बहुत जल्द उत्तर प्रदेश में पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होंगे। कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट कार्य लगभग पूरा हो चुका है और कभी भी इस एयरपोर्ट को इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए प्रारंभ किया जा सकता है। इस अवसर पर प्रस्तुतिकरण का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट टर्मिनल को भारतीय वस्तुकला का विशिष्ट नमूना बनाने की कोशिश होनी चाहिए।

इससे पहले प्रदेश के नागरिक उड्डयन विभाग के मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी ने बीते चार साल में उत्तर प्रदेश ने नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में ऊंची उड़ान भरी है। जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की वैश्विक पहचान बनेगा। कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारी, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ और ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल (एजी) के प्रतिनिधियों सहित शासन के अनेक अधिकारियों की उपस्थिति रही।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट : खास बातें

● जनपद गौतमबुद्धनगर के जेवर में नोएडा इन्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का विकास पीपीपी मोड पर कराया जा रहा। इस हेतु साइट क्लियरेंस, इमिग्रेशन सर्विसेज का अनुमोदन, पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी सहित सभी आवश्यक अनापत्तियाँ प्राप्त हो चुकी हैं।

● एयरपोर्ट की स्थापना के लिए 4100 करोड़ की लागत से “भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनरव्यवस्थापन में उचित प्रति कर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013” की व्यवस्था के अनुसार 1334 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है।

● एयरपोर्ट के विकास के लिए ग्लोबल ई-टेंडर के माध्यम से सबसे अधिक पैसेंजर राजस्व की बोली लगाने वाली कंपनी ज़्यूरिख़ एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को विकासकर्ता के रूप में चयनित किया गया है। जेवर एयरपोर्ट के लिए चयनित विकासकर्ता ज़्यूरिख़ एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी द्वारा गठित एसपीवी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड एवं उत्तर प्रदेश सरकार की कंपनी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के साथ कंसेशन एग्रीमेंट स्थापित किया जा चुका है।

● राज्य सरकार द्वारा नोएडा इंटरनेशनल ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के रनवे की संख्या 2 से बढ़ाकर 6 किए जाने का निर्णय लिया गया है। रनवे की संख्या बढ़ाए जाने के संबंध में पीडब्ल्यूसी की फिजीबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार 5 रनवे को फिजिकल बताया गया है।

● एयरपोर्ट की भूमि से संबंधित परिवारों के पुनर्वासन एवं पुर्नव्यवस्थापन हेतु आवश्यक 48.0970 हेक्टेयर भूमि का अर्जन किया जा चुका है। पुनर्वासन एवं पुर्नव्यवस्थापन का कार्य 99 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है।

● वर्ष 2021-22 में इस एयरपोर्ट का निर्माण कार्य प्रारम्भ होकर प्रथम चरण का कार्य तीन वर्षों में पूर्ण होगा। जब यह एयरपोर्ट प्रारम्भ होगा तो 12 मिलियन पैसेन्जर से शुरू होगा जो चरणवार बढ़ कर वर्ष 2040-50 तक बढ़ कर 70 मिलियन हो जाएगा।

● जेवर एयरपोर्ट कार्गो एयरपोर्ट भी है, वर्ष 2040-50 तक 2.6 मिलियन टन कार्गो की क्षमता का विकास होगा। इससे व्यापार और उद्योगों को एक नई दिशा मिलेगी।

● जेवर एयरपोर्ट को हाई स्पीड रेल से जोड़े जाने के सम्बन्ध में कार्यवाही की जा रही है। साथ ही जेवर एयरपोर्ट को इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से सड़क मार्ग द्वारा जोड़े जाने तथा मेट्रो रेल से जोड़े जाने की दिशा में कार्यवाही चल रही है।

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