जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने तीन वर्षीय अनाथ रूद्राक्ष की बचाई जान
GREATER NOIDA LOKESH GOSWAMI
बच्चे को जन्मजात ह्रदय की अति गंभीर बीमारी ‘CORRECTED TRANSPOSITION OF GREAT ARTERIES’ थी रूद्राक्ष की आर्टरीज एवं पंपिंग चैम्बर प्राकृतिक बनावट से विपरीत आ रही थी जेपी हॉस्पिटल के बाल ह्रदय रोग विभाग के चिकित्सकों ने अपने स्वास्थ्य सेवा धर्म की अनोखी मिसाल पेश की है। चिकित्सकों ने एक ऐसे अनाथ बच्चे के जीवन को मौत के मुंह से बाहर निकालने में कामयाबी पाई है जिसका ईलाज भारत में केवल तीन-चार स्थानों में होना संभव था। तीन वर्षीय बच्चे का नाम रूद्राक्ष है जिसकी देखभाल मथुरा के एक अनाथालय द्वारा की जाती है। रूद्राक्ष के ईलाज में करीब आठ लाख रुपये का खर्च आया। बड़ी बात यह है कि ईलाज में खर्च हुई राशि का 50 प्रतिशत जेपी हॉस्पिटल की पहल पर एक समाज सेवी संस्था ने वहन किया। बीमारी पर अद्भुत जीत हासिल करने का श्रेय जेपी हॉस्पिटल के बाल ह्रदय रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा एवं उनकी टीम को जाता है। गौरतलब है कि डॉ. राजेश शर्मा विश्व भर में ऐसे ही क्रिटिकल केसेज पर विजय पाने की महारत के लिए जाने जाते हैं। जेपी हॉस्पिटल के बाल ह्रदय रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा ने रूद्राक्ष की बीमारी के बारे में विस्तार से बताया, “रूद्राक्ष को ह्रदय की अति जटिल बीमारी ‘CORRECTED TRANSPOSITION OF GREAT ARTERIES’ थी। इस बीमारी में ह्रदय के अंदर की बनावट प्राकृतिक रूप से बिल्कुल उल्टी होती है। रूद्राक्ष की आर्टरीज एवं पंपिंग चैम्बर प्राकृतिक बनावट से विपरीत उल्टी दिशा से आ रही थी। इस बीमारी के कारण बच्चे का शरीर बहुत अधिक नीला नहीं होता लेकिन भविष्य में बच्चे को हार्ट फेल्योर की समस्या से जूझना पड़ता है। इसलिए इस बीमारी का सही ईलाज दो-तीन साल की उम्र में ही हो जानी चाहिए ताकि बच्चे के शरीर का विकास सही तरीके से हो पाए।”डॉ. शर्मा के अनुसार, “रूद्राक्ष के जीवन को बचाने के लिए ‘DOUBLE SWITCH SURGERY’ की गई। सर्जरी तो सफल हो गई लेकिन ह्रदय की रिकवरी CARDIO PULMONARY BYPASS से नहीं हो सकी। इस वजह से रूद्राक्ष को E.C.M.O. (EXTRACORPOREAL MEMBRANE OXYGENATION) के साथ आई.सी.यू. में शिफ्ट किया गया। 72 घंटे बाद जब बच्चे की ह्रदय गति और कान्ट्रैक्टिलिटी (CONTRACTILITY) में सुधार हुआ तो रूद्राक्ष को E.C.M.O. से निकाला गया, और चार दिन INTENSIVE TREATMENT देने के बाद छाती को बंद किया गया। इस ईलाज की सुविधा भारत में केवल तीन-चार स्थानों में ही उपलब्ध है।”भारत के प्रसिद्ध बाल ह्रदय रोग चिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा ने कहा, “ छाती बंद करने के 48 घंटे बाद बच्चे को वेंटिलेटर से निकालाया गया, लेकिन सांस लेने में तकलीफ के कारण उसे वापस वेंटिलेटर पर ले जाना पड़ा। बच्चे को वेंटिलेटर से निकालने के लिए ट्रेकियोस्टोमी (TRACHEOSTOMY) की गई। इसके साथ रूद्राक्ष को N.G. FEEDING के साथ HIGH CALORIE और HIGH PROTEIN वाला खाद्य पदार्थ दिया गया, ताकि उसका शरीर जल्द स्वस्थ हो सके और वह सर्जरी के तनाव से वह बाहर आ सके।”
सर्जरी के दस दिन बाद ट्रेकियोस्टोमी (TRACHEOSTOMY) निकाल दी गई। रूद्राक्ष को जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया। अभी रूद्राक्ष के ह्रदय की स्थिति बेहतर है, और वह स्वस्थ हो रहा है।
