महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर एस. पी सिंह के जन्मदिवस पर टेन न्यूज़ ने जानी उनकी वीरता की कहानी

Abhishek Sharma / Rahul Kumar Jha

नोएडा (12/06/19) : एक फौजी देश के लिए हमेशा अपने बलिदानों की आहूति देने के लिए तत्पर रहता है, चाहे कैसी भी परिस्थिति आ जाए हमेशा उसका डटकर सामना करता है। एक फौजी के लिए घर परिवार से बढ़कर देश होता है। फौजी का नाम सुनकर लोगों के मन में खुद ब खुद सम्मान की भावना उमड़ जाती है।


एक सच्चे देशभक्त की परिभाषा के बारे में जानना हो तो एक फौजी इसकी सबसे बड़ी मिशाल होता है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं एक ऐसी शख्सियत के बारे में जिसने 30 साल देश की सेवा करते हुए वीरता का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान “महावीर चक्र” प्राप्त किया। आज उनके 91वें जन्मदिवस के मौके पर टेन न्यूज़ ने उनसे बातचीत करते हुए उनके संघर्ष की कहानी को जाना।

1962 के युद्ध के अनुभव को ब्रिगेडियर एस.पी श्रीकांत ने हमारे साथ साझा करते हुए बताया कि वे उस समय एनईएफए में गोरखा राइफल्स की एक बटालियन के सहायक थे, जब 20 अक्टूबर 1962 को चीनी सेना ने बटालियन मुख्यालय को घेर लिया। मेजर श्रीकांत ने स्थिति को हताश पाते हुए, सैनिक से एक बंदूक (स्टेन गन) छीन ली, उन्होंने चीनी बटालियन मुख्यालय के कुछ बचे लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

उन्होंने अपने प्राणों की परवाह के बगैर वीरता का परिचय देते हुए उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की उपेक्षा करते हुए दुश्मन को घेरकर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। ब्रिगेडियर श्रीकांत ने 1962 के युद्ध में साहस और एक उच्च क्रम का नेतृत्व प्रदर्शित किया। जिसकी बदौलत उन्हें देश के दुसरे सर्वोच्च सम्मान “महावीर चक्र” से नवाजा गया।

निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और जानें महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर एस.पी श्रीकांत की वीरता के किस्से -:

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