गोल्डन फेडरेशन ऑफ़ आरडब्ल्यूज ने किया 64.7% मुआवजे के अतिरिक्त धनराशि के नोटिस का विरोध

ABHISHEK SHARMA

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Greater Noida (09/10/19) : ग्रेटर नोएडा के कम से कम 25 हजार लोगों को दिवाली से पहले बड़ा झटका लगा है। दरअसल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक नोटिफिकेशन जारी कर 20 साल पहले खरीदे गए प्लॉट के लिए अतिरिक्त रकम जमा करने के लिए कहा है।  29 सितंबर को जारी एक अधिसूचना में प्राधिकरण ने कहा है कि किसानों को अतिरिक्त 64.7 प्रतिशत मुआवजा देने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद, प्राधिकरण 1,287 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से लोगों से अधिक पैसा वसूलेगा।



इस रकम पर 1 मई से अब तक का 11 फीसदी ब्याज भी देना होगा। इस तरह 200 वर्ग मीटर आकार के प्लॉट के लिए 4,29,766 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।  किसानों को हाई कोर्ट के आदेश पर 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने के एवज में प्राधिकरण शहर के विभिन्न सेक्टरों में रहने वाले लोगों से 1287 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से वसूली करेगी। इस रकम पर 1 मई 2013 से लेकर अब तक का 11 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। यह रकम तीन-तीन माह के अंतराल पर 4 किस्तों में देनी होगी। पहली किस्त 31 अक्टूबर तक जमा करानी है।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने इसके लिए शहरवासियों को नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के 39 गांवों के किसानों ने जमीन अधिग्रहण के विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट में 3 जजों की बेंच ने वर्ष 2011 में किसानों की याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और 10 प्रतिशत आबादी के विकसित प्लॉट देने के आदेश प्राधिकरण को दिए थे।

शहर के करीब 50 आवासीय सेक्टरों में लगभग 25 हजार आवंटियों से 1287 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 11 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ एक्सट्रा वसूला जाएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के इस फैसले पर गोल्डन फेडरेशन ऑफ़ आरडल्यूए ने विरोध किया है। इस मामले में गोल्डन फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूएज के महासचिव दीपक भाटी का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला दिया है। जबकि न्यायालय द्वारा 2003 के बाद 39 गांवों के किसानों को 64.7 प्रतिशत का आदेश दिया था।

जिसकी एवज में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा 39 गांवों की भूमि पर समस्त आवंटियों से वर्षों पहले 1465 रुपए वर्ग मीटर की दर से अतिरिक्त धनराशि ली जा चुकी है। प्राधिकरण द्वारा जिन आवंटियों को अतिरिक्त धनराशि के नोटिस भेजे गए हैं वह न्याय संगत नहीं हैं, क्योंकि इन सेक्टरों की जो भूमि है उसका अधिग्रहण वर्ष 1994 से लेकर 1999 तक का है, और ना ही जिस भूमि पर स्वर्ण नगरी सेक्टर 36, 37  ओमीक्रोन सेक्टर बसे हुए हैं।

उस भूमि का कोई अतिरिक्त 64. 7 प्रतिकार प्राधिकरण द्वारा किसानों को नहीं दिया गया है।  उनका कहना है कि प्राधिकरण द्वारा उठाया गया यह कदम सरासर गलत है। फेडरेशन ऑफ आरडब्लूए इसका विरोध करती है। उन्होंने मांग की है कि प्राधिकरण ने जो नोटिस भेजे हैं उनकी दोबारा से जांच कराकर 1 सप्ताह के अंदर वापस लिया जाए।

वहीं, जब इस बारे में फोन पर अधिकारीयों का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो कोई जवाब नहीं मिल सका।

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