जन की बात कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ के गौतमबुद्ध नगर निरीक्षण पर हुई चर्चा, टेन न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट

Ten News Network

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Noida: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गौतम बुद्ध नगर आकर ज़िले में कोरोना प्रबंधन का और वैक्सीनेशन अभियान का निरिक्षण किया| इस मौके पर टेन न्यूज़ द्वारा जन की बात कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे जिले के गणमान्य व्यकितयों ने भाग लिया और कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आ रही चुनातियों की बात कि और साथ ही अपने सुझाव भी सांझा किये। इस कार्यक्रम में पूर्व ब्रिगेडियर अशोक हक, सेक्टर 18 मार्किट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन, फोनरवा के जनरल सेक्रेटरी केके जैन, डीडी आरडब्लूए के वाइस प्रेसिडेंट संजीव कुमार, टेन न्यूज़ के डायरेक्टर सुनील कुमार द्विवेदी, डीडी आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष एनपी सिंह, नेफोवा के सेक्रेटरी विशाल कुमार, नोवरा से एडवोकेट रंजन तोमर और सुनीता वैद दीक्षित शामिल रहे। इस कार्यक्रम की प्रस्तुति डॉक्टर अतुल चौधरी और डॉली कुमारी द्वारा की गई।

ब्रिगेडियर अशोक हक ने कहा की मुख्यमंत्री हमारे शहर में आए उनका मैं स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा प्रदेश के अंदर अब तक इस महामारी के दौरान जो भी देरी हुई है उस पर मैं चर्चा नहीं करना चाहूंगा, लेकिन अब जो स्थिति थोड़ी-थोड़ी ठीक हो रही है उस बिंदु पर मैं जोर डालना चाहता हूं। जो सिस्टम हमारा फेल हो गया था उस सिस्टम को सुधारने के साथ-साथ कस्टमाइज करना चाहिए। इसके साथ ही जैसा कि हमने देखा शहर के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर हो या बेड हो या अन्य कोई स्वास्थ्य सेवा हो जिसको लेकर कालाबाजारी चल रही थी और अभी भी चल रही है, इसको खत्म करने के लिए सिस्टम को इनफ्लुएंस करना बहुत जरूरी है।

अशोक हक ने कहा की जो कोविड सहायता केंद्र बनाए गए है उन्हें और ज्यादा व्यवस्थित करने की आवश्यकता है, उनको पूरी तरीके से कॉल सेंटर में तब्दील कर देना चाहिए जिससे कि लोगो को सही समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा जिले में बेड की कमी की जो बातें सामने आई थी अब उसमें सुधार हुआ है और लोगों को बेड मिल रहे हैं, लेकिन हमें इस चीज का ध्यान रखना चाहिए कि यह वायरस अब गांव को भी अपने चपेट में ले रहा है, जिस पर सरकार को खास तौर पर ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि अगर हमारे गांव इस महामारी की चपेट में आ गए तो परिणाम बहुत ही बुरे होंगे| इसके साथ ही इस महामारी में कोरोना की टेस्टिंग और वैक्सीनेशन के काम में ढिलाई देखने को मिल रही है जिसको लेकर के मेरी सरकार से विनती है कि वह 18 साल से ऊपर और 45 साल से ऊपर वाले व्यक्तियों के लिए अलग अलग काउंटर बनाएं जिससे कि उन्हें वैक्सीनेशन को लेकर कोई परेशानी ना हो और उसके साथ ही हमारे यहां पर कई सारे ऐसे लोग हैं जो ऑनलाइन वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते जैसे कि मजदूर या अन्य लोग, उनके लिए भी सरकार कुछ ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे कि वह वैक्सीनेशन करा सकें।

आगे उन्होंने कहा कि जिले में ऐसी समस्या भी सामने आई है जिसमें लोग अधिकारियों को फोन करते हैं तो कई बार उनसे संपर्क नहीं हो पाता है, इस व्यवस्था को भी दुरुस्त करना चाहिए जिससे कि लोग अपनी आवश्यकता की आपूर्ति के लिए प्रशासन द्वारा संपर्क कर पाए और जिले में जो ऑक्सीजन डिलीवरी के लिए व्यवस्था बनाई गई है उसके लिए सही तरीके से मॉनिटरिंग होनी चाहिए क्योंकि इसमें भी कालाबाजारी होने की आशंका है। उन्होंने कहा सरकार की कुछ अधिकारियों का ऐसा रवैया है कि वह फीडबैक लेना नहीं चाहते, वह बोलते बहुत हैं, अपनी बात सबके सामने रखते हैं, लेकिन आखरी में जब कोई सजेशन देता है तो वह उस पर अमल नहीं करते, जो कि करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा जनता को मैं नमन करता हूं की उन्होंने इस समय ऐसी महामारी में बहुत साथ दिया, चाहे वह जिले में चल रही कोई संस्था हो,आरडब्लूए हो, इन सभी को मैं नमन करता हूं।

सुशील कुमार जैन ने परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए कहा कि इस महामारी के दौर में सिर्फ दर्द ही दर्द है और हमें इस दौर में सिस्टम फेलियर बहुत ज्यादा देखने को मिला। उन्होंने बताया कि मेरे पास खुद 500 कॉल दिन के आते थे, इनको मैं रिसीव करता था लेकिन उनमें से 50 की भी मैं मदद नहीं कर पाया क्योंकि पर्याप्त मात्रा में संसाधन उपलभ्ध नहीं थे। उन्होंने कहा जिस सिस्टम का फेलियर हमने देखा उसमें था हॉस्पिटल में बेड की कमी होना, वैक्सीनेशन सेंटर का बनना, ऑक्सीजन सेंटर का बनना और ऑक्सीजन सप्लाई का ना होना। मैंने कहा कि मुझे बहुत बड़ा आश्चर्य इस बात का है की पहले भी हमने यह सुझाव दिया था कि अगर किसी व्यक्ति को कोरोना है तो हमें इमरजेंसी वेस पर उसका इलाज करना चाहिए, उसको आइसोलेट करना चाहिए और यह भी हम नहीं कर पाए और मुझे अभी तक भी समझ में नहीं आ रहा कि जो आइसोलेशन सेंटर बने हैं और उसमे जो ऑक्सीजन की व्यवस्था बनाई गई है, आखिर वह है क्या| मैंने कई लोगों को अस्पताल के बाहर ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर घूमते हुए देखा है जो कि उनका काम नहीं था, अगर ऑक्सीजन की बात थी तो ऑक्सीजन सिलेंडर को अस्पतालों में होना चाहिए था, ऑक्सीजन बेड की लगातार कमी अस्पतालों में सामने आ रही थी लेकिन नॉर्मल बेड अस्पतालों में खाली थे, मुझे यह समझ में नहीं आया कि हमने उन बेड को ऑक्सीजन बेड में तब्दील क्यों नहीं किया। यह सारी चीजें व्यवस्था के फेलियर की है, मैं यह नहीं कहना चाहता कि यह सभी हो सकता था लेकिन हम इसको बहुत अच्छी प्लानिंग के साथ कर सकते थे।

 

अगर महामारी की व्यवस्था की बात करते हैं या फिर मुख्यमंत्री के आगमन की बात करते हैं तो यह बहुत अच्छी बात है कि उन्होंने नोएडा या फिर अन्य जिलों में व्यवस्था की जांच करना शुरू किया है। और यह दुर्भाग्य की बात है कि इससे पहले जो भी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री हुआ करते थे वह कभी नोएडा का दौरा नहीं करते थे और उनकी वजह से इन सारे शहरों को बहुत सी चीजों से दूर रहना पड़ता था। उन्होंने कहा की ऐसी विजिट जिले में होनी चाहिए, क्योंकि जब भी कोई बड़ा नेता या अधिकारी जिले में आता है तो उससे बहुत सारी चीजें ठीक होने लगती हैं, उससे एक पॉजिटिविटी आती है और कई अधिकारी भी ठीक से काम करने लगते हैं, और मैं तो यह कहता हूं कि ऐसी विजिट बार-बार होनी चाहिए। क्योंकि ऐसी विजिट अगर समय पर हो तो हमारे लिए और भी अच्छा है।

आगे उन्होंने कहा जैसा कि सबको पता है कि इस समय सभी व्यापार बंद पड़े हैं, किंतु शराब की दुकानें खुली है। मुझे सभी व्यापारियों का दर्द सुनने को मिलता है इसको लेकर के हमने एक एप्लीकेशन लिखी थी जिसमें हमने लिखा था कि हर किसी को शराब खोलने का लाइसेंस दे दिया जाए। क्योंकि हम दुकान खोलेंगे शराब बेचेंगे तो कम से कम घर तो चलाएंगे। अगर उससे संक्रमण नहीं होता है या उससे कोई नुकसान नहीं होता है तो कम से कम बंद पड़ी दुकानों से सरकार भी रेवेन्यू कमाए और हम लोगों के भी घर चलें, इसमें कोई नुकसान नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें कई सारी चीजें सुनने को मिली की प्रदेश में क्राइम रेट बढ़ रहा है इसके कारण शराब की दुकान खोलनी पड़ी, लेकिन उसके लिए घर-घर डिलीवरी की व्यवस्था भी बनाई जा सकती थी। दुकानों को खोलना इतना आवश्यक नहीं था। आखिर में उन्होंने कहा कि जो भी व्यवस्थाओं में कमियां हमने देखी है उन कमियों से ही हमें सीखना चाहिए और उस पर अमल लाना चाहिए।

डीडी आरडब्लूए के वाइस प्रेसिडेंट संजीव कुमार ने पैनल के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस शहर के अंदर में बहुत सारे व्यक्ति ऑक्सीजन की कमी से मरते हुए नजर आए, इन सारी चीजों को रोका जा सकता था अगर सरकार के द्वारा इन सारी चीजों पर प्रॉपर मैनेजमेंट किया जाता तो। उन्होंने कहा इस समय पर स्थिति थोड़ी सुधरी हुयी है, जो भी आंकड़े सरकार की तरफ से आ रहे हैं उसमें कमी देखी जा रही है। उन्होंने कहा सबसे पहली समस्या जो मैं आप सबके सामने रखना चाहता हूं वह वैक्सीनेशन की है। उसको लेकर अभी 2 फेस में वैक्सीनेशन का काम चल रहा है| 45 साल से अधिक आयु वाले लोगो के लिए इस समय जो सबसे ज्यादा समस्या देखने को मिल रही है वह यह है की उनको दूसरी डोज़ नहीं मिल पा रही है, सरकार बार-बार उनका टाइम बढ़ा देती है। लोगों को समझ में ही नहीं पा रहा है कि आखिर वैक्सीनेशन का टाइम क्या होना चाहिए, टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में बड़े-बड़े डॉक्टर आते हैं और सबकी वैक्सीनेशन के समय को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं होती हैं, जिससे लोग बहुत ज्यादा कंफ्यूज हो रहे हैं। इसको लेकर सरकार को गाइडलाइन जारी कर एक समय निर्धारित करना चाहिए।

उन्होंने कहा वैक्सीन लगाने को लेकर भी लोगों को परेशानी हो रही है जिसका कारण वैक्सीनेशन सेंटर में होने वाली भीड़ है| अगर कोई सीनियर सिटीजन व्यक्ति वैक्सीनेशन सेंटर वैक्सीन लगवाने के लिए जा रहा है तो उसके लिए कोरोना का खतरा और भी बढ़ जाता है, क्योंकि वैक्सीनेशन सेंटर पर इतनी भीड़ होती है जिसके कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाता। इसके लिए सरकार को जितने भी खाली स्थान है जैसे कि अभी स्कूल बंद पड़े हैं या अन्य जगह जो फिलहाल बंद है वहां पर वैक्सीनेशन करानी चाहिए जिससे कि भीड़ कम हो और लोगों को सही तरीके से वैक्सीन लगाई जा सके। ड्राई वैक्सीनेशन भी बहुत अच्छा विकल्प है और कई शहरों और महानगरों ने इसे शुरू भी किया है और इसे जल्द से जल्द हर शहर में शुरू करना चाहिए क्योंकि इससे हमारे लोगों को बहुत फायदा होगा।

आगे उन्होंने कहा कि इस बार हमें ऐसा लॉकडाउन देखने को मिला है जिसमें सभी फैक्ट्री और कंपनियां चालू है और लोग अपने समय पर ड्यूटी जा रहे हैं और समय पर आ रहे हैं| एक फैक्ट्री में 500 से ऊपर व्यक्ति काम कर रहे हैं और वह एक समय पर एक ही जगह से निकलते हैं जिससे कि संक्रमण का खतरा ज्यादा हो सकता है और कई सारी कंपनियां ऐसी भी है जहां पर कोरोना के मामले सामने आए हैं| इसके बावजूद लोग वहां पर काम करने के लिए जा रहे हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे संक्रमण और ज्यादा फैल सकता है। उन्होंने कहा पिछली बार हमने देखा था कि कई सारे लोग पलायन कर रहे मजदूरों और जो जरूरतमंद लोग हैं जिनके पास राशन नहीं था खाने के लिए कुछ नहीं था उन लोगों की मदद कर रहे थे, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी हमें देखने को नहीं मिल रहा है। यह गवर्नमेंट की जिम्मेदारी है, हजार रुपए दे देने से उनकी जीविका नहीं चल सकती है। इसके लिए एक प्लानिंग होनी चाहिए थी जो कि इस बार हमें नहीं नजर आ रही है।

संजीव कुमार ने परिचर्चा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात रखते हुए कहा कि हम सबको पता है कि इस बीमारी की फिलहाल कोई दवा नहीं है उसके बावजूद अस्पतालों में 3 दिन अगर कोई पेशेंट रुक जाता है तो उसको लाख रुपए का बिल थमा दिया जाता है जिसके लिए भी पहले से प्लानिंग की जानी चाहिए थी जो कि नहीं की गई| आखिर में उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की तरफ से कुछ चीजें हैं जो बहुत सराहनीय कि गई हैं जिसके लिए हमें प्राधिकरण को धन्यवाद कहना चाहिए जैसे कि अभी उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर को घर-घर पहुंचाने की जो मुहिम शुरू की है उससे लोगों को काफी फायदा होने वाला है।

सुनील कुमार द्विवेदी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि लॉकडाउन में काफी देरी हो गई है और लोगों में संक्रमण इस साल काफी तेजी से फैला है, लॉक डाउन का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं किया गया| इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में गांव में भी कोरोना काफी तेजी से फैला है इसका कारण पंचायत चुनाव है। उन्होंने कहा कि इस समय जो समस्या हो रही है वह वैक्सीनेशन को लेकर हो रही है। जिसके लिए हमारी सरकार को दिल्ली सरकार की तर्ज पर 45 वर्ष तक के लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन बंद करवा देना चाहिए, इससे लोगों को काफी मदद मिल सकेगी। आखिर में उन्होंने कहा कि जनपद के अंदर जितने भी संस्थान हैं चाहे वह आरडब्लूए हो एओए हो या अन्य कोई संस्था हो इन सभी ने इस महामारी में काफी सराहनीय काम किया है और इनकी तारीफ केंद्र सरकार ने भी की है, हमें आशा है कि यह सभी संस्थान आगे भी इस प्रकार का कार्य करते रहेंगे।

फोनरवा के जनरल सेक्रेटरी केके जैन ने इस परिचर्चा के दौरान अपनी बात रखी और कहा की माननीय मुख्यमंत्री के सामने हम अपनी कई सारी बात रखने जा रहे हैं और जहां तक वैक्सीनेशन की बात है हमारा उन से निवेदन है कि जितने भी आरडब्लूए सेक्टर हैं उनके आसपास के अस्पतालों में 45 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए वैक्सीनेशन की व्यवस्था बनाई जाए जिससे कि लोगों को मदद मिल सके और जो 18 साल से 45 वर्ष के बीच के लोग हैं उनके लिए वैक्सीनेशन को बढ़ा दिया जाए। इस समय हम देख रहे हैं कि कोविड के टेस्ट की संख्या में कमी आई है, इसको लेकर सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है और प्राइवेट लैब वाले जरूरत से ज्यादा चार्ज कर रहे और इसकी रिपोर्ट चार चार दिन के अंदर मिल रही है। उन्होंने कहा अस्पतालों के अंदर कितने बेड खाली हैं इसकी जानकारी हमें सही ढंग से प्राप्त नहीं हो पाती, जिसको लेकर एक ऐसा सूचना केंद्र बनाया जाना चाहिए जिसमें जनपद में मौजूद संस्थाओं के अलावा आम लोगों को भी अस्पतालों में बेड की सही जानकारी मिल सके।

डीडी आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष एनपी सिंह ने भी इस परिचर्चा में भाग लिया और उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि पहले हमारे नोएडा में कोई मुख्यमंत्री आता ही नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह पुरानी परंपरा जो चली आ रही थी इसको तोड़ दिया है| मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा कई बार आ चुके हैं। नोएडा में इस महामारी के दौरान कई सारे लोग हैं जिन्होंने दम तोड़ दिया है चाहे वह ऑक्सीजन की कमी को लेकर हो चाहे वेंटिलेटर की कमी को लेकर हो| उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में जितने भी आरडब्लूए हैं मैं उन सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने सेक्टरों के अंदर छोटे-छोटे आइसोलेशन सेंटर बना रखे हैं जिसके कारण बहुत सारे लोगों की मदद की जा रही है।

नेफोवा के सेक्रेटरी विशाल कुमार ने पैनल के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस समय अस्पतालों के अंदर हम देख रहे हैं कि मरीजों के साथ जो व्यवहार हो रहा है, जो उनका ट्रीटमेंट हो रहा है वह ठीक तरीके से नहीं हो रहा है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं कि डॉक्टर अवेलेबल हो, होम नर्सिंग स्टाफ अवेलेबल हो, लेकिन जमीन की सच्चाई कुछ और ही है। उन्होंने कहा हम कमियों को ना देखते हुए अगर उनके समाधान पर बात करें तो प्रशासन की तरफ से जो वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू की गई है वह बहुत ही अच्छा कदम है और वैक्सीनेशन सोसाइटी लेवल पर और कम्युनिटी लेवल पर होना बहुत जरूरी है जिससे कि हम इस कोरोना की चेन को तोड़ पाए।

विशाल कुमार ने बताया कि वैक्सीनेशन सेंटर में हम देखते हैं कि कई सारे लोग ऐसे मौजूद होते हैं जिनको रजिस्ट्रेशन के बारे में नहीं पता या फिर उन्हें कंप्यूटर चलाना नहीं आता| ऐसे बहुत सारे लोग भी वैक्सीनेशन सेंटर में हमें लंबी-लंबी लाइनों में लगे हुए मिल जाते हैं लेकिन आखिर में उनको वैक्सीन नहीं लगाई जाती और उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है इसको लेकर भी सरकार को कुछ ध्यान देने की आवश्यकता है जिससे कि सभी लोगों को वैक्सीन मिल पाए।

नोवरा से एडवोकेट रंजन तोमर ने परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए कहा कि जैसे कि इस महामारी के दौरान इस समय सबसे महत्वपूर्ण चीज है वैक्सीनेशन जिसको लेकर के सरकार की तरफ से वैक्सीनेशन ड्राइव भी चलाई जा रही है| यह सेक्टरों और कम्युनिटी हॉल में चलाई जाए तो इसका फायदा ज्यादा से ज्यादा लोगों को हो सकेगा, साथ ही हमने सरकार से यह डिमांड भी रखी है कि वैक्सीनेशन को स्कूलों में या अन्य स्थानों पर भी चालू कराया जाए जिससे कि जो हमारे ग्रामीण लोग हैं जो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं करा सकते उनको भी वैक्सीन जल्द से जल्द मिल सके क्योंकि फिलहाल अभी हम देखते हैं कि जैसे ही हमारे क्षेत्र में वैक्सीन आती है उसके दो-तीन घंटे बाद ही हमें पता लगता है कि वैक्सीन खत्म हो चुकी है, यह नहीं होना चाहिए वैक्सीन ज्यादा से ज्यादा मात्रा में उपलब्ध होनी चाहिए जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग सके।

आगे उन्होंने कहा इस समय हम देख रहे हैं कि बेड या ऑक्सीजन की समस्या को लेकर जो परेशानियां सामने आ रही थी उसमें कमी आई है, अब लोगों को बेड और ऑक्सीजन सिलेंडर मिल जा रहे हैं, उनको ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ रहा है| मेरा मानना है कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री को थोड़ा सा समय निकाल कर हमारे यहां के सोशल वर्करों के साथ भी एक मीटिंग करनी चाहिए क्योंकि ऐसी परिस्थिति में सबसे ज्यादा हमारे सोशल वर्कर और संस्थाओं से जुड़े हुए लोग काम कर रहे हैं। और जहां तक वैक्सीनेशन की बात है उसमे कोई शक नहीं है वैक्सीनेशन को और ज्यादा बढ़ाना पड़ेगा चाहे वह शहरों में हो या ग्रामीण क्षेत्रों में, खासकर गांव में स्पेशल कैंपों को लगाना इतना मुश्किल कार्य नहीं है, सरकार को इस पर भी ध्यान देना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में टेस्टिंग और वैक्सीनेशन की सुविधा को बढ़ाना चाहिए।

सुनीता वैद दीक्षित ने परिचर्चा में अपनी बात रखते हुए कहा की वैक्सीनेशन की जो ड्राइव शुरू हो रही है यह बहुत ही महत्वपूर्ण है इसके अलावा हमें इस चीज पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि जब आप वैक्सीनेशन करवाते हैं तो उसके बाद आपको 10 दिन के लिए आइसोलेशन में जाना जरूरी है, यह इंफॉर्मेशन बहुत कम लोगों को होती है, इसकी जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों को होनी चाहिए क्योंकि वैक्सीनेशन करवाने के लिए जब आप जाते हैं तो कई लोगों के संपर्क में आप आते हैं। इसको लेकर मैं डॉक्टरों से भी अपील करना चाहूंगी कि जब वह किसी को वैक्सीन लगाएं तो उनको जरूर बताएं कि आप को 10 दिनों के लिए आइसोलेशन में जाना है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमें सही जानकारी होना बहुत जरूरी है कि कहां कहां पर वैक्सीनेशन हो रही है, इस समय कितनी वैक्सीन उपलब्ध है या कौन-कौन सी वैक्सीन उपलब्ध है और इसके साथ ही हमें दवाइयों को लेकर भी इंफॉर्मेशन मिलती रहनी चाहिए क्योंकि अगर हमें इस महामारी को रोकना है तो उसके लिए सही जानकारी होना बहुत आवश्यक है और यह इंफॉर्मेशन हमें हर दिन अपडेट कराई जानी चाहिए। हमने देखा है कि जिस समय ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर की कमी हो रही थी उस समय हम 10 जगह से ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए या बेड के लिए या फिर वेंटिलेटर के लिए तलाश कर रहे थे तब जाकर कई घंटों बाद हमें इसकी जानकारी मिल पाती थी और तब तक पेशेंट की मृत्यु हो जाती थी। यह आगे ना हो पाए इसके लिए हमें यह सारी जानकारियां डेली बेसिस पर अपडेट कराई जानी चाहिए।

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