अंतरराष्ट्रीय कवियत्री अना देहलवी का बयान , इंक़लाबी शायरी के लिए हमेशा याद आएँगे मशहूर कवि राहत इंदौरी

ROHIT SHARMA

0 293

ग्रेटर नोएडा :– 11 अगस्त 2020 की शाम 5 बजे जैसे ही यह खबर फैली कि मशहूर शायर राहत इंदौरी हमारे बीच नहीं रहे,तो पूरी दुनिया में उर्दू अदब से मोहब्बत रखने वालों में शोक की लहर दौड़ गई । 1 जनवरी 1950 को इंदौर में जन्में स्व०राहत इंदौरी अपने पिता रफअत उल्लाह क़ुरैशी व माता निशा बेगम की चौथे नंबर की संतान थे | उनकी प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से हुई तथा इंदौर में स्थित इस्लामिया करीमियां कॉलेज से वर्ष 1973 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की तथा वर्ष 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से उर्दू साहित्य में एम ए किया और फिर 1985 में मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की ।

 

पीएचडी करने के बाद उन्होंने प्रोफेसर के रूप में 16 वर्ष तक शिक्षण किया और उनके मार्गदर्शन में कई छात्रों ने पी एच डी की ! शायरी की दुनिया में कदम रखने से पहले वह एक चित्रकार बनना चाहते थे और उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के लिए पोस्टर व बैनर भी डिजाइन किए,इतना ही नहीं किताबों के कवर पेज़ तो वह वर्तमान तक डिज़ाइन करते रहे ।
बॉलीवुड की फ़िल्मों को भी उन्होंने बहुत से हिट गीत दिए !

 

इंटरनेशनल शायरा अना देहलवी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह विश्व स्तरीय क़ाबिल शायर होने के साथ-साथ एक बेहतरीन इंसान भी थे ! मैंने अनगिनत बार उनके साथ सफर किए और उनके साथ बहुत से स्टेज़ों पर कलाम पेश करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ |

 

टेन न्यूज़ नेटवर्क के साथ एक ऑनलाइन चर्चा में अना देहलवी ने डॉक्टर राहत इंदौरी की एक और खूबी को उजागर करते हुए बताया कि आज के मतलबी दौर में कोई किसी की मदद करने को तैयार नहीं है , लेकिन राहत साहब सभी शायरों की हौंसला अफ़ज़ाई के साथ – साथ उनका मार्ग दर्शन भी किया करते थे ।

 

अना देहलवी ने आगे कहा कि वह इंक़लाबी शायरी करते थे,सरकार की खामियों को बहुत ही मनमोहक अंदाज में दर्शकों को परोसा है , उनकी शायरी का चापलूसी से कोई रिश्ता नहीं रहा,अल्फ़ाज़ों की जादूगरी के अलावा शायरी पेश करने का निराला अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद है।

 

अना देहलवी ने कहा कि डॉक्टर राहत इंदौरी साहब का इंतकाल उर्दू जगत ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए अफ़सोस की बात है और इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती। सभी धर्म, जाति,वर्ग,समुदाय के सेकूलर लोग उनके व्यक्तित्व व उनकी शायरी को पसंद करते थे।

 

 

उनको सुनने के लिए लोग पूरी पूरी रात इंतजार करते थे। उनका नाम जिस मुशायरे से जुड़ जाता था वहाँ सीट मिलना तो दूर खड़े होने के लिए भी अगर जगह मिल जाए तो बड़ी बात थी ।

 

अना देहलवी ने आगे कहां कि आज वह हमारे बीच नहीं रहे , लेकिन अपनी बेवाक शायरी के बल पर वह हमेशा जिंदा रहेंगे | मैं उनको नजराना – ए – अकीदत पेश करती हूं ।

डॉ. राहत इंदौरी के कुछ मशहूर शायर

* हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे ,
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते!

* मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को,
समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे !

* अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को,
वहाँ पे ढूँड रहे हैं जहाँ नहीं हूँ मैं !

* ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था,
मैं बच भी जाता तो इक रोज़ मरने वाला था !

* दो गज़ सही ये मेरी मिल्कियत तो है,
ऐ मौत तूने मुझे ज़मींदार कर दिया !

* बुलाती है मगर जाने का नहीं,
ये दुनिया है इधर जाने का नहीं !

* मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका,
इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूँगा उसे !

* शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम,
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे !

* आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो,
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो !

* बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ !

* रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है,
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है !

* वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा,
मैं उसके ताज की क़ीमत लगा के लौट आया !

* मैंने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए !

* लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में,
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है !

* हमारे मुंह से जो निकले वही सदाक़त है,
हमारे मुंह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है !

* सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है !

* मैं जानता हूँ कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन,
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है !

* मैं आकर दुश्मनों में बस गया हूँ,
यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे !

* ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर,
जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे !

* हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं,
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं !

* इक मुलाक़ात का जादू कि उतरता ही नहीं,
तिरी ख़ुशबू मिरी चादर से नहीं जाती है !

* कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे,
जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे !

* लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं,
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं !

राहत इंदौरी ने लगभर दो दर्जन फ़िल्मों में गीत लिखे। उनके कुछ प्रसिद्ध हिन्दी फ़िल्म गीत

* आज हमने दिल का हर किस्सा (फ़िल्म- सर)

* तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है (फ़िल्म- खुद्दार)

* खत लिखना हमें खत लिखना (फ़िल्म- खुद्दार)

* रात क्या मांगे एक सितारा (फ़िल्म- खुद्दार)

* दिल को हज़ार बार रोका (फ़िल्म- मर्डर)

* एम बोले तो मैं मास्टर (फ़िल्म- मुन्नाभाई एमबीबीएस)

* धुंआ धुंआ (फ़िल्म- मिशन कश्मीर)

* ये रिश्ता क्या कहलाता है (फ़िल्म- मीनाक्षी)

* चोरी-चोरी जब नज़रें मिलीं (फ़िल्म- करीब)

* देखो-देखो जानम हम दिल (फ़िल्म- इश्क़)

* नींद चुरायी मेरी (फ़िल्म- इश्क़)

* मुर्शिदा (फ़िल्म – बेगम जान)

Leave A Reply

Your email address will not be published.