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कोरोना महामारी – नोएडा के जनता की मन की बात

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जहा एक तरफ कोरोना संक्रमण अपने चरम पर है, वही दूसरी तरफ बेड्स, ऑक्सीजन, दवाईयों की कमी ने आम जनता की मुसीबतो को और बड़ा दिया है| नॉएडा देश के उन गिने चुने शहरों में है जहा कोरोना ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है, और आम जनता असहाय महसूस कर रही है| ऐसे में कुछ लोगो ने टेन न्यूज़ के साथ अपने मन की बात साँझा की है, जिसमे से कुछ महत्वपूर्ण बाते आप निचे पढ़ सकते है|

शरद जैन, सेक्रेटरी, केंद्रीय विहार, सेक्टर 51कहते है की हम बस अस्पतालों में बेड चाहते हैं और प्रत्येक रोगी के लिए उचित दवा। कुछ कम नहीं और कुछ ज़्यादा नहीं। हर व्यक्ति इतने सदमे में है की एक व्हाट्सएप मैसेज या फोन कॉल से भी कंपकंपाने लगता है । प्रशासन से मेरा अनुरोध है कि कृपया हर मदद प्रदान करें। हम आरडब्ल्यूए के रूप में इस राष्ट्रीय संकट में मदद करने के लिए अतिरिक्त मील जाने के लिए तैयार हैं।

संजीव कुमार, महासचिव,आरडब्लूए सेक्टर 51 और उपाध्यक्ष, फोनरवा कहते है की शहर के हालात किसी से छिपे नहीं है, सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। शासन प्रशासन किसी की कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं।

हर दिन व्हाट्सएप ग्रुप पर, ट्विटर पर और अखबारों में सुबह – सुबह पढ़ने को मिलता है की शहर में बीमारों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं, ऑक्सीजन खत्म होने की कगार पर है । डीएम और सीएमओ साहब किसी का फोन नहीं उठा रहे हैं । किसी के ट्विटर का जवाब नहीं दे रहे हैं।

हम सबको हर दिन सेक्टर वासियों के फोन आते हैं कि हमारे परिवार से फलाना आदमी कोरोनावायरस से ग्रस्त है और इन्हें तुरंत हॉस्पिटलाइजेशन और ऑक्सीजन की जरूरत है। परंतु शहर की आरडब्लूए और फेडरेशन चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही है।

उच्च अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को शहर की समस्याओं से अवगत करवाना हमारी जिम्मेदारियों में है और हमें संवाद का रास्ता किसी भी सूरत में बंद नहीं करना चाहिए।

अजय चौरसिया कहते है फोनरवा एवं नोएडा के समस्त आरडब्लूए चाह कर भी कुछ नहीं कर रही है, इच्छा लेकर आते हैं कि सोसाइटी और समाज के लिए कुछ करेंगे, लेकिन शासन /प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है|
सांसद और विधायक जी कुंभकरनी नींद में सो जाते हैं।
इस दौरान हमारे इच्छाओं का गर्भपात करा लेना ही बेहतर होता है।
इधर 8- 10 दिनों से हम सबकी इच्छाएं भी गर्भपाती हो गई है।
मुफलिसी और लाचारी के बीच हम सब घरों में कैद होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, और इनके कुंभकरनी नींद से जागने का इंतजार ।
बजाओ भैया ढोलक, बजाओ डुगडुगी ।।

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