मेवाड़ में रेस जूडीकेट पर अतिथि व्याख्यान आयोजित.

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अगर किसी अदालत ने एक बार जिस मुकदमे पर फैसला दे दिया गया हो तो उसी अदालत में उसी फैसले पर दोबारा सुनवाई नहीं हो सकती। इसलिए लोग किसी तरह के भ्रम में न रहें और किसी के बहकावे में न आएं। दिल्ली सेशन कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सत्य नारायण गुप्ता ने वसुंधरा स्थित मेवाड़ लाॅ इंस्टीट्यूट में आयोजित अतिथि व्याख्यान में यह जानकारी कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को दी।
श्री गुप्ता ने ’रेस सबजुडाइस एंड रेस जूडीकेट’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसकी विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने बताया कि रेस जूडीकेट शब्द लैटिन भाषा का है। इसका मतलब पहले से ही न्याय निर्णीत की गई वस्तु से है। ऐसी न्याय निर्णीत वस्तु का दोबारा न्याय निर्णयन किए जाने से यह सिद्धांत रोकता है। उन्होंने बताया कि धारा 11 के तहत यह सिद्धांत केवल तकनीकी सिद्धांत नहीं है। यह उस सामान्य नियम पर आधारित है जोकि किसी भी व्यक्ति को उसी मुकदमे के लिए दोबारा परेशान करने से रोकता है। इसके चार लाभ हैं- एक, यह राज्य के हित में है जिससे मुकदमेबाजी का अंत होता है, दो, इसके जरिये एक व्यक्ति को एक ही मुकदमे में दोबारा तंग नहीं होना पड़ता, तीन, इसे जनहित में ठीक माना जाता है, और चार, न्याय निर्णीत मामले को सही समझा जाता है। अतिथि व्याख्यान में मेवाड़ लाॅ इंस्टीट्यूट के महानिदेशक भारत भूषण, मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल आदि मौजूद थे। इस मौके पर विद्यार्थियों ने श्री गुप्ता से विषय सम्बंधी अनेक सवाल-जवाब भी किए।

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