सुप्रीम कोर्ट से योगी सरकार को झटका , कहा – हटाने ही होंगे लखनऊ में लगे पोस्टर

Lokesh Goswami /Harender Singh Tennews New Delhi

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नई दिल्ली :– नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लखनऊ में हिंसा के दौरान सरकारी तथा अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपियों की फोटो होर्डिंग्स तथा पोस्टर्स में लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर असहमति जताई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ में हिंसा के दौरान तोड़फोड़ करने वाले आरोपियों के फोटो वाले होर्डिंग्स तथा पोस्टर्स को हटाने के निर्देश को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति यूयू ललित और अनिरुद्ध बोस की अवकाश कालीन पीठ ने आज उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई की। सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान लखनऊ तथा अन्य शहरों में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के लखनऊ में लगे पोस्टर के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने विचार के लिए तीन जजों की पीठ को भेजा।

फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस उमेश उदय ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन बेंच इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने का फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक से इनकार कर दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार को अब 16 मार्च तक सभी पोस्टर हटाने होंगे।  नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लखनऊ में हिंसा के दौरान तोड़फोड़ के आरोपितों के लखनऊ में लगाए गए वसूली के पोस्टर पर सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार को राहत नहीं मिली है। इन पोस्टरों को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हटाने का आदेश दिया था, जिसे योगी आदित्यनाथ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस उमेश उदय ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन बेंच इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने का फैसला सुनाया। जस्टिस ललित ने कहा कि इस मामले को चीफ जस्टिस देखेंगे। इस मामले में सभी व्यक्ति जिनके नाम होर्डिंग्स में नाम हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सामने मामले में पक्ष रखने की अनुमति दी गई है।

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