घटते जल स्तर को बचाने के लिए ‘जल पुरुष’ राजेंद्र सिंह ने बिमटेक के छात्रों को किया प्रोत्साहित

ABHISHEK SHARMA

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Greater Noida (03/10/2019) : ग्रेटर नोएडा के बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी में 32 वाँ स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। यह कार्यक्रम 29 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा। पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों द्वारा बिमटेक में गीत, संगीत, नृत्य, नाटक की प्रस्तुतियाँ से बिमटेक पूरे नोएडा क्षेत्र का सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा है।

स्थापना दिवस के अंतिम दिन यानी आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर “जल पुरुष” के नाम से प्रसिद्ध राजेन्द्र सिंह मौजूद रहे। इस मौके पर उन्होंने  छात्रों को पानी बचाने का  संदेश दिया।



वहीं बिमटेक ल के डायरेक्टर डॉ एच. चतुर्वेदी ने बताया कि हाई स्कूल पास करने के बाद राजेन्द्र सिंह ने भारतीय ऋषिकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय से आयुर्विज्ञान में डिग्री हासिल की। उसके बाद राजेन्द्र सिंह ने जनता की सेवा के भाव से गाँव में प्रेक्टिस करने का इरादा किया। साथ ही उन्हें जयप्रकाश नारायण की पुकार पर राजनीति का जोश चढ़ा और वे छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के साथ जुड़ गए।

1981 में उन्होंने नौकरी छोड़ी, घर का सारा सामान बेचा। कुल तेईस हजार रुपए की पूँजी लेकर समाज सेवा में उतर गए। उन्होंने ठान लिया कि वह पानी की समस्या का कुछ हल निकालेंगे। आठ हजार रुपये बैंक में डालकर शेष पैसा उनके हाथ में इस काम के लिए था।

राजेन्द्र सिंह ने “भारत संघ “ के नाम से एक संस्था बनाई जिसे एक गैर-सरकारी संगठन (एन.जी.ओ) का रूप दिया। 2015 में उन्होंने स्टॉकहोम जल पुरस्कार जीता, यह  “पानी के लिए नोबेल पुरस्कार” के रूप में जाना जाता है। डॉ. चतुर्वेदी ने  कहा कि छात्रों को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और घटते जल स्तर पर अपनी ओर से सभी विद्यार्थी कोई न कोई आवश्यक कदम जरूर उठाएं।

वहीं “जल पुरुष” राजेंद्र सिंह ने कहा कि ‘जल ही जीवन है’, लेकिन विडंबना यह है कि मौजूदा दौर में भारत के ज्यादातर राज्यों में पानी की किल्लत है। गर्मियों में यह समस्या देश के कई हिस्सों में विकराल रूप धारण कर लेती है। गर्मियों में महाराष्ट्र के कई इलाकों में पेयजल संकट इतना ज्यादा गहराया था कि रेल परिवहन के जरिये वहां पानी पहुंचाना पड़ा।

उन्होंने  बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में लगभग 9.7 करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं होता। गांवों में तो स्थिति और भी खराब है। वहां लगभग 70 प्रतिशत लोग अब भी प्रदूषित पानी पीने को ही मजबूर हैं। जानकारों का कहना है कि ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के प्रयास में लगातार नए बिजली संयंत्र बनाए जा रहे हैं। लेकिन इस कवायद में पानी की बढ़ती खपत को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इन संयंत्रों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की खपत होती है।

अगर ऊर्जा उत्पादन की होड़ इसी रफ्तार से जारी रही तो अनुमान है कि वर्ष 2040 तक लोगों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त पानी ही नहीं बचेगा।  दुनिया की कुल आबादी में से 18 प्रतिशत भारत में रहती है, लेकिन केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में महज चार प्रतिशत ही जल संसाधन हैं। यह बेहद गंभीर स्थिति है। सरकारी आंकड़ों से साफ है कि बीते एक दशक के दौरान देश में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता तेजी से घटी है।

इस व्याख्यान को सुनने के लिए BIMTECH की फ़ैकल्टी , छात्र , समाज सेवी , मीडिया के लोग उपस्थित रहे

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